दिल्ली-NCR में GRAP-III फिर से लागू, वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंची

दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया है, जिसके चलते प्रशासन को ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP-III) को दोबारा लागू करना पड़ा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने यह फैसला तब लिया जब क्षेत्र का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार गिरते हुए ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गया।

दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के कई इलाकों में AQI 300 के पार दर्ज किया गया है। खास तौर पर PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कणों का स्तर खतरनाक सीमा से ऊपर पहुंच गया है, जिससे आम लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है।

प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण

विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। ठंडी हवाओं की कमी, कम हवा की गति, गिरता तापमान और घना कोहरा प्रदूषकों को वातावरण में फैलने से रोक रहा है। इसके कारण हानिकारक कण हवा में लंबे समय तक बने रहते हैं।

इसके अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और आसपास के राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं भी प्रदूषण को बढ़ा रही हैं। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों तक मौसम की स्थिति में ज्यादा सुधार की संभावना नहीं है, जिससे प्रदूषण और बढ़ सकता है।

GRAP-III क्या है और कब लागू होता है

ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान को अलग-अलग चरणों में लागू किया जाता है। जब AQI 301 से 400 के बीच पहुंचता है और हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ हो जाती है, तब GRAP-III लागू किया जाता है।

इस चरण में प्रदूषण को ‘गंभीर’ स्तर तक पहुंचने से रोकने के लिए सख्त प्रतिबंध लगाए जाते हैं। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते GRAP-III लागू करना जरूरी है ताकि हालात और बिगड़ने से रोके जा सकें।

GRAP-III के तहत लगाए गए प्रतिबंध

GRAP-III लागू होने के बाद दिल्ली-NCR में कई कड़े कदम उठाए गए हैं:

  • सभी निर्माण और तोड़-फोड़ कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध, केवल जरूरी और आपातकालीन परियोजनाओं को छूट
  • अवैध या प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन पर चलने वाले उद्योगों को बंद करने के आदेश
  • खनन और स्टोन क्रशर गतिविधियों पर रोक
  • पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की कड़ी जांच
  • सड़कों पर धूल कम करने के लिए मशीनी सफाई और पानी का छिड़काव बढ़ाया गया

प्रशासन ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आम जीवन पर असर

प्रदूषण के बढ़ते स्तर का सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। सुबह और शाम के समय स्मॉग की मोटी परत दिखाई दे रही है, जिससे दृश्यता कम हो गई है। कई इलाकों में लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायत हो रही है।

स्कूलों को बच्चों की बाहरी गतिविधियां सीमित करने की सलाह दी गई है। वहीं अस्पतालों में सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है।

घने कोहरे के कारण दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों पर भी असर पड़ा है, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

डॉक्टरों का कहना है कि ‘बहुत खराब’ हवा में लंबे समय तक रहने से फेफड़ों की बीमारियां, दिल से जुड़ी समस्याएं और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है। बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे बाहर निकलते समय मास्क पहनें, सुबह की सैर से बचें, घर की खिड़कियां बंद रखें और जरूरत पड़ने पर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।

आगे क्या हो सकता है

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगर AQI और खराब होकर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचता है, तो GRAP-IV लागू किया जा सकता है। इसमें डीजल वाहनों पर और सख्त प्रतिबंध, अतिरिक्त उद्योगों को बंद करना और यातायात पर रोक जैसी कड़ी पाबंदियां शामिल हो सकती हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि GRAP जैसे उपाय अस्थायी राहत देते हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए स्वच्छ ऊर्जा, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण पर जोर देना जरूरी है।

जन सहयोग की अपील

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करें, कचरा या पराली न जलाएं और प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन करें। अधिकारियों का कहना है कि सरकार और जनता के संयुक्त प्रयास से ही दिल्ली-NCR को प्रदूषण से राहत मिल सकती है

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