वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपने X पोस्ट में

आज की अस्थिर geo political परिस्थितियों में हर बड़े देश के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
सुनिश्चित करना बहुत जरुरी हो गया है। चुंकि भारत अपने तेल और गैस की लगभग 90% जरुरतें आयात
से पूरा करता है, लिहाजा इस मामले में हम काफी संवेदनशील स्थिति में है। तीन ओर से समुद्र से घिरे होने
के कारण युद्ध या तनावपूर्ण परिस्थितियों में समुद्री नाकेबंदी का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में हमारे
पास घरेलू उत्पादन बढ़ाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता तेल
और गैस बाजार है और कम से कम अगले 20 वर्षों तक इसकी मांग लगातार बढ़ती रहेगी।
सौभाग्य से भारत के पास अपार प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। हमारे पास लगभग 300 billion barrel तेल
और गैस के बराबर संसाधनों की संभावना है, जो Guyana जैसे देशों की क्षमता से 30 गुना अधिक है।
हमारे पास प्रतिभाशाली उद्यमी, युवा और startups भी हैं। अमेरिका, मध्य पूर्व और यूरोप सहित पूरी
दुनिया में इस उद्योग के लगभग 10% विशेषज्ञ भारतीय हैं। यानी हमारे पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं
है। हमें जिस चीज़ की सबसे अधिक आवश्यकता है, वह है exploration, जो इस उद्योग की आधारशिला
है। दो दशक पहले America भी तेल और गैस के आयात पर निर्भर था। बाद में America ने उद्यमियों के
लिए exploration को खोल दिया और यह इतना आसान था कि घरों और खेतों के पिछवाड़े तक में
exploration किया गया और सभी को इसका लाभ मिला।
मैं पिछले 15 वर्षों से इस उद्योग में काम कर रहा हूं और पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हम आयात
की तुलना में आधी लागत पर तेल और गैस का उत्पादन कर सकते हैं। साथ ही हमने अब तक सरकारी
खजाने में लगभग 40 अरब dollar का योगदान दिया है। बीते वर्षों के दौरान Cairn ने 1.3 billion
barrel तेल का उत्पादन किया है। यह उद्योग उन कुछ क्षेत्रों में से है, जिन्हें PLI जैसी किसी सरकारी
योजना का फायदा नहीं मिलता है।
भारत की पूरी क्षमता को खोलने के लिए ज्यादा से ज्यादा exploration जरुरी है। वर्तमान में भारत में
exploration के लिए मुश्किल से 20 license हैं, जबकि इनकी संख्या लगभग 2,000 होनी चाहिए। इस
industry के लोग निवेश करने में परेशानियों, notice, court मामलों और license रद्द होने के डर से
चिंतित रहते हैं। सार्वजनिक क्षेत्र में आया एक भी notice या कानूनी विवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों
को चिंतित कर देता है। यह स्थिति मुझे भरतपुर के घाना पक्षी अभयारण्य की याद दिलाती है, जहां कभी
दुनिया भर से प्रवासी पक्षी आते थे, जिनमें से कुछ 5,000 mile दूर से उड़कर आते थे। यह दुनिया का
सर्वश्रेष्ठ अभयारण्य बन सकता था, लेकिन 10-15 वर्ष पहले कुछ पक्षियों के शिकार की घटना के बाद
पक्षियों का आना बंद हो गया। बाद में अनुकूल माहौल दोबारा बनाने में सालों लग गए। निवेश के माहौल
के साथ भी ऐसा ही होता है।
दुनिया नहीं चाहती कि भारत कच्चे तेल और गैस का उत्पादन करे, बल्कि वह चाहती है कि भारत इन
उत्पादों का केवल एक बड़ा बाजार बना रहे। लेकिन घरेलू उत्पादन रोजगार पैदा करता है, जो दुनिया के
कई हिस्सों में सिद्ध हो चुका है। हमें इसका मुकाबला करना होगा और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रयास
करना होगा। यह वही देश है जो कभी खाद्यान्न आयात पर निर्भर था और बाद में आत्मनिर्भर बन गया। यह
परिवर्तन सरकार द्वारा आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने से संभव हुआ था।
आज पूरी दुनिया अपनी ऊर्जा और खनिज संसाधनों को सुरक्षित करने में लगी है। भारत को भी तेजी से
जमीन के नीचे मौजूद संसाधनों का उपयोग करना होगा। सरकार निवेश, सहयोग और विकास को
प्रोत्साहित कर रही है। वेदांता में हमारा लक्ष्य उत्पादन को पांच गुना बढ़ाना है। भारत को अपनी भविष्य
की जरूरतों को पूरा करने और विकसित भारत के vision को साकार करने के लिए उत्पादन को दस गुना
बढ़ाना होगा।
मेरा सपना है कि पूरे देश में हजारों drilling rigs चलें। Startup और छोटे उद्यमी भी लगभग ₹5 करोड़
के निवेश से rigs को lease पर लेकर exploration शुरु करें। हमें सबसे अधिक जरुरत स्थिर और
सहयोगी वातावरण की है। यह सही समय है कि tight regulation से आगे बढ़कर exploration और
उत्पादन को प्रोत्साहित करने वाली व्यवस्था बनाई जाए ताकि देश ऊर्जा के क्षेत्र मेंआत्मनिर्भरता की ओर
बढ़ सके।
हमारे सामने अभी लंबी यात्रा है – लेकिन हमारी संभावनाएं असाधारण हैं।
