हिंदुस्तान जिंक ने खनन और परिष्कृत धातु उत्पादन में बनाया नया रिकॉर्ड

Particulars
(In ‘000 tonnes, or as stated’)
4Q3QFY
FY26FY25% ChangeFY26% ChangeFY26FY25% Change
Mined Metal3153102%27614%111410952%
Refined Metal2822705%2705%10481052-0.4%
Refined Zinc12272146%2213%8518273%
Refined Lead5556-2%4912%197225-13%
Silver (in tonnes)176177-0.2%15811%627687-9%
Silver (in million ounces)5.75.7-0.2%5.111%20.222.1-9%
         
Wind Power (in million units)5663-11%5011%3723487%

हिन्दुस्तान ज़िंक लिमिटेड का वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही और पूरे वर्ष में खनन तथा परिष्कृत धातु उत्पादन  में उल्लेखनीय प्रदर्शन, नए रिकॉर्ड किए स्थापित

चौथी तिमाही (4QFY26) में कंपनी का खनन धातु उत्पादन 315 किलो टन रहा, जो अब तक का सर्वश्रेष्ठ तिमाही प्रदर्शन है। यह वृद्धि अधिक अयस्क उत्पादन और बेहतर ग्रेड्स के कारण संभव हुई। इसी अवधि में परिष्कृत धातु उत्पादन 282 किलो टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जो चंदेरिया और दरिबा में डिबॉटलनेकिंग परियोजनाओं से मिली अतिरिक्त क्षमता, बेहतर परिचालन दक्षता और उच्च प्लांट उपलब्धता का परिणाम है। चांदी का उत्पादन 176 मीट्रिक टन रहा, जो पिछली तिमाही की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है और यह लेड उत्पादन के अनुरूप है। वहीं पवन ऊर्जा उत्पादन 56 मिलियन यूनिट दर्ज किया गया, जो पवन वेग के अनुरूप रहा।

 वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का खनन धातु उत्पादन 1,114 किलो टन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो अधिक अयस्क उत्पादन और बेहतर ग्रेड्स के अनुरूप है। परिष्कृत जिंक उत्पादन 851 किलो टन रहा, जो सालाना आधार पर 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह वृद्धि डिबॉटलनेकिंग परियोजनाओं के कमीशनिंग, 160 केटीपीए रोस्टर और पूरे वर्ष जिंक-लेड मोड में पाइरो ऑपरेशन्स के चलते संभव हुई।

वहीं परिष्कृत लेड उत्पादन 197 किलो टन रहा, जो सालाना आधार पर 13 प्रतिशत कम है। इसका मुख्य कारण पिछले वर्ष के दौरान पाइरो ऑपरेशन्स का आंशिक रूप से लेड मोड में संचालन एवं कम प्लांट उपलब्धता रहा। चांदी का वार्षिक उत्पादन 627 मीट्रिक टन रहा, जो लेड उत्पादन के अनुरूप है और खनन अनुक्रम के अनुसार खदानों से कम चांदी इनपुट के कारण प्रभावित हुआ।

इसके अलावा, पवन ऊर्जा उत्पादन 372 मिलियन यूनिट रहा, जो सालाना आधार पर 7 प्रतिशत अधिक है और पवन वेग के अनुरूप है।

कंपनी का यह प्रदर्शन मजबूत परिचालन क्षमता, तकनीकी सुधार और निरंतर क्षमता विस्तार के प्रयासों को दर्शाता है, जो आने वाले समय में भी विकास की मजबूत संभावनाओं की ओर संकेत करता है।

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