क्या वजन घटाने वाली सेमाग्लूटाइड दवा पेट के पैरालिसिस का कारण बन सकती है? US रिपोर्ट से बढ़ी भारत में चिंता
डॉक्टरों ने कहा कि यह दवा, जो भारत में गोली और अन्य देशों में इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध है. इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं लेकिन वे आमतौर पर मामूली और कुछ समय के लिए ही होते हैं.
नई दिल्ली: दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी और मधुमेह के अध्यक्ष प्रमुख डॉ अंबरीश मिथल पिछले कुछ दिनों से अपने कई मरीजों से चिंताजनक सवाल पूछ रहे हैं, जिनमें से कुछ लगभग घबराए हुए हैं.
वे सोच रहे हैं कि क्या उन्हें राइबेल्सस लेना बंद कर देना चाहिए – जो डेनिश दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क द्वारा बनाई गई ‘ब्लॉकबस्टर’ मधुमेह दवा सेमाग्लूटाइड का ब्रांड नाम है, जो कि अब भारत में भी उपलब्ध है.
उनकी चिंता सीएनएन की एक रिपोर्ट से उत्पन्न हुई थी, जिसमें कुछ महिलाओं को दिखाया गया, जिन्हें कई वर्षों तक सेमाग्लूटाइड का उपयोग करने के बाद गैस्ट्रोपेरसिस या पेट का पैरालिसिस – एक ऐसा विकार जो कई वर्षों तक सेमाग्लूटाइड का उपयोग करने के बाद पेट की मांसपेशियों की सामान्य गति को प्रभावित करता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ महिलाएं, जो इलाज छोड़ने के महीनों बाद भी इस स्थिति से पीड़ित हैं, ने अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन से भी संपर्क किया है.
मिथल ने दिप्रिंट को बताया, “कुछ समय पहले तक, मेरा फोन सेमाग्लूटाइड के प्रिस्क्रिप्शन मांगने वालो के अनुरोधों से भरा हुआ था, लेकिन अब लोगों के बीच इसे लेकर घबराहट का माहौल है.”
सेमाग्लूटाइड को अमेरिका और अन्य देशों में इंजेक्शन के रूप में ओज़ेम्पिक (मधुमेह रोगियों के लिए) और वेगोवी (मधुमेह वाले या बिना मोटे लोगों के लिए) नामों से बेचा जाता है.
भारत में अनुमोदित दवा का संस्करण, राइबेल्सस, एक गोली है जो ओज़ेम्पिक और वेगोवी की तरह एक शॉट नहीं है और इसकी खुराक भी कम लेनी होती है इसलिए, यह कम गुणकारी है. दिप्रिंट से बात करने वाले डॉक्टरों ने कहा, यह मधुमेह रोगियों को वजन कम करने में काफी मदद करता है.
डॉक्टरों ने कहा कि कुछ अमीर मरीज जो इसका खर्च उठा सकते हैं, वे इंजेक्शन सेमाग्लूटाइड को भारत में आयात करवाते हैं. भारत में एक ओज़ेम्पिक इंजेक्शन की कीमत लगभग 20,000 रुपये है, जबकि 10 राइबेल्सस टैबलेट की एक स्ट्रिप की कीमत लगभग 3,000 रुपये है.
मिथल की अपने रोगियों को सलाह देते है, सेमाग्लूटाइड और इसके पूर्ववर्ती लिराग्लूटाइड जैसी मजबूत वजन घटाने वाली दवाओं के कुछ साइड इफेक्ट्स होते हैं, लेकिन अगर उनका शरीर इसे सहन कर सकता हैं तो उन्हें दवा बंद करने की जरूरत नहीं.
उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा, जबकि कुछ मरीज़ दवा बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और फिर उनकी दवा बंद कर दी जाती है, अब तक, अपने अभ्यास में, मैंने किसी को भी पेट के पैरालिसिस जैसी गंभीर प्रतिकूल घटनाओं से पीड़ित नहीं देखा है.”
उनकी बात दोहराते हुए, कोच्चि स्थित मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कुमार पी ने भी कहा कि पेट की कुछ समस्याएं – जैसे मतली, उल्टी और सूजन आदि सेमाग्लूटाइड जिस प्रकार की दवाओं से संबंधित है और उसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं. लेकिन इसके गैस्ट्रोपेरसिस वाले किसी भी मरीज को नहीं देखा है.
इस मुद्दे के अमेरिका में चिंता बढ़ाने पर, नोवो नॉर्डिस्क ने दिप्रिंट को दिए एक बयान में कहा, “सेमाग्लूटाइड का मजबूत नैदानिक विकास कार्यक्रमों, बड़े वास्तविक-विश्व साक्ष्य अध्ययनों में पूरी तरह से परीक्षण किया गया है और संचयी रूप से 9.5 मिलियन से अधिक रोगी के साथ वर्षों से इसका उपयोग किया हैं.”
बयान में कहा गया कि दवा निर्माता के अनुसार, गैस्ट्रोपेरेसिस एक नैदानिक सिंड्रोम है जो गैस्ट्रिक खाली करने में देरी की विशेषता है – वह प्रक्रिया जिसके द्वारा पेट की सामग्री को ग्रहणी में ले जाया जाता है जब पेट में यांत्रिक रुकावट की अनुपस्थिति होती है. “हालांकि मधुमेह एक प्रसिद्ध रिस्क फैक्टर है, ऐसे अन्य रिस्क फैक्टर भी हैं जो गैस्ट्रोपेरसिस के जोखिम को बढ़ा सकते हैं, जैसे अधिक वजन/मोटापा, लिंग (महिला), वायरस संक्रमण और तंत्रिका तंत्र रोग, जैसे पार्किंसंस रोग या मल्टीपल स्केलेरोसिस.”
बयान में आगे कहा गया, “रोगी सुरक्षा नोवो नॉर्डिस्क के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. हम रिकमेंड करते हैं कि मरीज़ इन दवाओं को किसी प्रोफेशनल की सलाह पर ही ले. हम अपने उत्पादों की सुरक्षा प्रोफ़ाइल की लगातार निगरानी कर रहे हैं और लेबल में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइड इफेक्ट्स पर पर्याप्त जानकारी सहित रोगी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों के साथ मिलकर सहयोग करते हैं.”
सेमाग्लूटाइड और इसके साइड इफेक्ट्स
सेमाग्लूटाइड और लिराग्लूटाइड, और उनसे पहले एक्सेनाटाइड और डुलाग्लूटाइड, टाइप 2 मधुमेह के लिए और कभी-कभी मोटापे के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं का एक समूह है. वे ग्लूकागन-जैसे पेप्टाइड-1 (जीएलपी-1) जैसे आंत हार्मोन के रिसेप्टर्स से जुड़कर काम करते हैं.
केरल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और चिकित्सा शोधकर्ता डॉ. राजीव जयदेवन ने कहा, “ये रिसेप्टर्स अग्न्याशय हार्मोन के रीलीज़, भूख और आंत के कार्य को नियंत्रित करते हैं.”
जीएलपी-1 जैसे आंत द्वारा निर्मित प्राकृतिक हार्मोन भोजन के बाद इंसुलिन स्राव को उत्तेजित करते हैं. उन्होंने बताया कि सेमाग्लूटाइड जैसे कृत्रिम जीएलपी-1 एगोनिस्ट का उपयोग मधुमेह के रोगियों में इंसुलिन रिलीज में सुधार के लिए किया जाता है.
जयदेवन ने बताया, “इन दवाओं का एक अन्य प्रभाव आंतों की गति कम होने के कारण गैस्ट्रिक खाली होने में देरी है. इससे पेट में परिपूर्णता का एहसास होता है, जो रक्त शर्करा के बेहतर नियंत्रण के अलावा वजन कम करने में भी मदद करता है.”
हालांकि, मतली, सूजन, उल्टी और दस्त दवाओं के इस वर्ग के साइड इफेक्ट्स हैं, उन्होंने कहा, “दवाएं लगभग 18 वर्षों से मौजूद हैं, और ये दवा लेबल पर सूचीबद्ध हैं.”
मिथल के अनुसार, जबकि अधिकांश मरीज़ दवा शुरू करने के बाद दो-चार सप्ताह तक इन साइड इफेक्ट्स का अनुभव करते हैं, ये लक्षण आमतौर पर मतली की दवा के साथ ठीक हो जाते हैं.
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन अगर कुछ मरीज लक्षणात्मक इलाज के बावजूद साइड-इफेक्ट की शिकायत करते हैं या लंबे समय तक समस्या रहती है, तो हम उनसे नए जमाने की मधुमेह संबंधी दवाओं को बंद करने के लिए कहते हैं.”
दिल्ली के फोर्टिस-सी-डीओसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर डायबिटीज, मेटाबॉलिक डिजीज और एंडोक्रिनोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. अनूप मिश्रा के अनुसार, ये दवाएं आंतों की कार्यप्रणाली को खराब कर सकती हैं और खराब आंतों की गतिविधि वाले लंबे समय से मधुमेह रोगियों की एक छोटी संख्या में उल्टी का कारण बन सकती हैं.
उन्होंने रेखांकित किया, “अधिकांश रोगियों को ऐसे साइड इफेक्ट्स का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिससे यह वजन घटाने के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प बन जाएगा.”
इस बीच, दिप्रिंट को दिए अपने बयान में, नोवो नॉर्डिस्क ने बताया कि जीएलपी-1 का उपयोग 15 वर्षों से अधिक समय से टाइप 2 मधुमेह के इलाज के लिए और आठ वर्षों से मोटापे के इलाज के लिए किया जा रहा है. नोवो नॉर्डिस्क जीएलपी-1 उत्पाद, जैसे सेमाग्लूटाइड और लिराग्लूटाइड, 10 वर्षों से अधिक समय से बाजार में हैं.
सेमाग्लूटाइड के लिए, अधिकांश गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइड इफेक्ट्स हल्के से मध्यम गंभीरता और छोटी अवधि के होते हैं, कंपनी ने कहा, जीएलपी -1 एगोनिस्ट को गैस्ट्रिक खाली करने में देरी का कारण माना जाता है, जैसा कि इन दवाओं के लेबल में बताया गया है. इसमें कहा गया है, “गैस्ट्रिक खाली करने में देरी, मतली और उल्टी के लक्षणों को साइड इफेक्ट के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.”
आगे का रास्ता
जयदेवन के अनुसार, पेट का पैरालिसिस, सेमाग्लूटाइड थेरेपी लेने वाली कुछ अमेरिकी महिलाओं द्वारा रिपोर्ट किया गया अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव, मधुमेह के लिए इस्तेमाल की जाने वाली खुराक की तुलना में मोटापे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली उच्च खुराक से हो सकता है.
गैस्ट्रोपेरेसिस मधुमेह या वायरल संक्रमण जैसे अन्य कारकों का भी परिणाम हो सकता है. उन्होंने कहा, “मधुमेह ही कुछ मामलों में गैस्ट्रोपैरेसिस का कारण बनता है.”
डॉक्टर ने कहा, “मधुमेह के रोगी में, यह बताना मुश्किल हो सकता है कि अंतर्निहित मधुमेह, दवा या दोनों के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है.”
हालांकि, उन्होंने दवाओं की नई श्रेणियों के लिए अधिक सतर्क प्रतिकूल घटना निगरानी प्रणाली का आह्वान किया जो लंबे समय से उपयोग में नहीं हैं.
जयदेवन ने कहा, “यह भी सच है कि कुछ मामलों में, बड़ी संख्या में रोगियों में दवा का वर्षों तक उपयोग करने के बाद ही गंभीर प्रतिकूल घटनाएं सामने आती हैं. और, इसलिए, दवाओं की सभी नई श्रेणियों के लिए विपणन के बाद निगरानी बढ़ानी चाहिए.”
इस बीच, मिथल ने यह भी चेतावनी दी कि सेमाग्लूटाइड जैसी दवाएं केवल चिकित्सकीय सलाह पर ही ली जानी चाहिए और महत्वपूर्ण साइड इफेक्ट्स होने पर इन्हें बंद कर देना चाहिए. “इसके अलावा, जिन लोगों को मतली, उल्टी और रिफ्लक्स की समस्या है, उन्हें यह दवाएं शुरू ही नहीं करनी चाहिए.”

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