इनडीड: नौकरी के फर्जीवाड़े से बढ़ी चिंता, भारत के आधे नौकरी तलाशने वाले असली और नकली रिक्रूटर में फर्क नहीं कर पा रहे।

इनडीड के 1,161 भारतीय कर्मचारियों पर किए गए एक सर्वे से पता चला है कि नौकरी के नाम पर बढ़ रही ठगी की वजह से लोगों का भरोसा कम हो रहा है। अब लोग नौकरी के ऑफर पर जल्दी भरोसा नहीं करते, जिससे कई बार अच्छी और असली नौकरियां भी उनके हाथ से निकल जाती हैं।
भारत, 9 जुलाई 2026: भारत में नौकरी के नाम पर ठगी के मामले बढ़ रहे हैं। इससे लोगों का नौकरी की भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा कम हो रहा है। इनडीड की नई रिपोर्ट के अनुसार, 93% लोगों ने कभी न कभी फर्जी या शक वाली नौकरी के ऑफर देखे हैं। वहीं, 51% लोगों का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आता कि नौकरी देने वाला असली है या ठग।
जैसे-जैसे नौकरी से जुड़े ठगी के मामले बढ़ रहे हैं और ठग नए-नए तरीके अपना रहे हैं, वैसे-वैसे नौकरी तलाशने वाले लोग अधिक सतर्क हो गए हैं। अब कई लोग तभी किसी भर्तीकर्ता यानी रिक्रूटर से बात करते हैं या नौकरी के लिए आवेदन करते हैं, जब उन्हें उस अवसर के सही और भरोसेमंद होने का यकीन हो। इससे असली कंपनियों के लिए भी सही उम्मीदवारों तक पहुंचना पहले से ज़्यादा मुश्किल हो गया है।
इनडीड के टैलेंट स्ट्रैटेजी एडवाइजर रोहन सिल्वेस्टर ने कहा, “आजकल नौकरी की भर्ती का काम तेजी से ऑनलाइन हो रहा है। ऐसे में भरोसा सबसे ज़्यादा ज़रूरी हो गया है। नौकरी तलाशने वाले लोग यह जानना चाहते हैं कि जिस नौकरी के लिए वे आवेदन कर रहे हैं, वह सच में सही है या नहीं। वहीं कंपनियों को भी ध्यान रखना चाहिए कि अगर उनके नाम पर कोई ठगी करता है, तो इससे उनकी छवि खराब हो सकती है। इसलिए कंपनियों को हमेशा अपने आधिकारिक माध्यमों से ही भर्ती की जानकारी देनी चाहिए, रिक्रूटर की पहचान पक्की करनी चाहिए और फर्जी भर्ती पर रोक लगाने के लिए कदम उठाने चाहिए। इससे नौकरी की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगी।”
नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी का नुकसान सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी का सबसे बड़ा नुकसान सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे का होता है। 31% लोगों ने कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद उनका रिक्रूटर्स और कंपनियों पर भरोसा कम हो गया। 19% लोगों ने बताया कि नौकरी ढूंढते समय उन्हें डर, तनाव और चिंता होने लगी। वहीं 14% लोगों ने कहा कि ठगी के डर से उन्होंने अच्छी और असली नौकरी के मौके भी छोड़ दिए। सिर्फ 3% लोगों ने बताया कि उनका पैसों का नुकसान हुआ। यानी नौकरी की ठगी लोगों का भरोसा तोड़ती है और उन्हें आगे भी नौकरी के लिए आवेदन करने से डराती है।
नौकरी की ठगी का सबसे ज़्यादा शिकार युवा पेशेवर लोग हो रहे हैं।
नौकरी की तलाश शुरू करने वाले युवाओं के साथ भर्ती के नाम पर ठगी होने का खतरा सबसे ज़्यादा है। खासकर जेन ज़ी और 0 से 2 साल का काम का अनुभव रखने वाले लोगों को फर्जी नौकरी के ऑफर ज़्यादा मिलते हैं। इससे पता चलता है कि ऑनलाइन नौकरी ढूंढते समय नए युवाओं को सबसे ज़्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अब लोग नौकरी के विज्ञापन या रिक्रूटर के पहले मैसेज से ही यह परखने लगते हैं कि नौकरी असली है या फर्जी। यानी इंटरव्यू से पहले ही उनके मन में शक होने लगता है।
उम्मीदवार अब भरोसे के पक्के सबूत चाहते हैं।
जैसे-जैसे नौकरी के नाम पर ठगी बढ़ रही है, वैसे-वैसे लोग यह पक्का करना चाहते हैं कि रिक्रूटर और कंपनी असली हैं। आधे लोगों का कहना है कि अगर रिक्रूटर की पहचान आसानी से जांची जा सके, तो उन पर सबसे ज़्यादा भरोसा होता है। इसके बाद कंपनी की आधिकारिक ईमेल आईडी से आया संदेश भरोसे की सबसे बड़ी निशानी माना जाता है। इससे साफ है कि भर्ती प्रक्रिया में खुलापन और सही पहचान बताना लोगों का भरोसा जीतने के लिए बहुत ज़रूरी हो गया है।
रोहन सिल्वेस्टर ने कहा, “आज नौकरी ढूंढने वाले लोग हर नौकरी की अच्छी तरह जांच करते हैं। इसलिए कंपनियों को साफ और सही जानकारी देनी चाहिए, ताकि लोगों को भरोसा हो कि नौकरी का ऑफर असली है। इनडीड का मकसद भर्ती की प्रक्रिया को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है। छोटे-छोटे कदम भी लोगों का भरोसा बढ़ाने में मदद करते हैं।”
रिपोर्ट की मुख्य बातें:
• 93% लोगों को फर्जी या शक वाली नौकरी के ऑफर मिले हैं।
• 51% लोगों को समझ नहीं आता कि नौकरी देने वाला असली है या ठग।
• 75% लोग कई बार नौकरी के ऑफर को इसलिए छोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वह फर्जी हो सकती है।
• 31% लोगों का कहना है कि नौकरी के फर्जीवाड़े की वजह से उनका रिक्रूटर्स और कंपनियों पर भरोसा कम हो गया है।
• 19% लोगों ने कहा कि ऐसे फर्जी नौकरी के मामलों के बाद उन्हें तनाव और चिंता होने लगी।
• 14% लोगों का कहना है कि पहले ठगी का शिकार होने के डर से उन्होंने बाद में कई असली नौकरी के मौके भी छोड़ दिए।
• 50% लोगों का कहना है कि अगर नौकरी देने वाले की पहचान आसानी से जांची जा सके, तो उन पर भरोसा बढ़ता है।
• 47% लोग कंपनी की आधिकारिक ईमेल आईडी से आए संदेश पर भरोसा करते हैं।
• जेन ज़ी नौकरी तलाशने वालों में:
* 52% युवाओं का कहना है कि फर्जी नौकरी के ऑफर की वजह से वे असली नौकरी का मौका भी खो चुके हैं।
* 51% युवाओं ने कहा कि नौकरी की ठगी के कारण उन्हें तनाव और चिंता हुई।
* 46% युवाओं का कहना है कि फर्जी नौकरी के मामलों के बाद उनका भरोसा कम हो गया।
* 46% युवाओं ने बताया कि नौकरी की ठगी में उनके पैसे भी चले गए।
