औपचारिक नियुक्तियाँ स्थिर हैं क्योंकि रिमोट वर्क की मांग बढ़ रही हैः इनडीड हायरिंग लैब
सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं
बैंगलुरू, 31 जुलाई, 2025: इनडीड पर भारत के औपचारिक क्षेत्र में नौकरियों का सृजन जून, 2025 में स्थिर बना रहा, जबकि मई में मजबूत वृद्धि के बाद नौकरियों के विज्ञापनों में मामूली 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। साल-दर-साल 4.8 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद नौकरियों के विज्ञापन महामारी से पहले के स्तर से 80 प्रतिशत अधिक हैं, जिससे औपचारिक नौकरियों के लिए नियुक्तियों की मजबूती प्रदर्शित होती है।
इनडीड का हायरिंग लैब डेटा औपचारिक अर्थव्यवस्था में रोजगारप्रदाताओं द्वारा नियुक्तियाँ प्रदर्शित करता है, जिससे भारत में हो रहे आर्थिक परिवर्तन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। दूसरी ओर, अनौपचारिक नौकरियों की व्यापकता अभी भी बहुत ज्यादा है, जिसके आँकड़े अक्सर नहीं लिए जाते हैं।
इनडीड के एशिया पैसिफिक सीनियर इकॉनॉमिस्ट, कैलम पिकरिंग ने कहा, ‘‘भारतीय कार्यबल हर माह धीरे-धीरे औपचारिक ढांचे की ओर बढ़ रहा है। देश में चल रहे इस परिवर्तन के साथ औपचारिक क्षेत्र में होता नौकरियों का सृजन पूरे देश में हो रही रोजगार वृद्धि को पीछे छोड़ देगा। यह ट्रेंड पिछले कुछ सालों से लगातार देखने में आ रहा है।’’
नौकरी के इच्छुक रिमोट वर्क को पसंद कर रहे हैं।
रोजगारप्रदाताओं द्वारा कर्मचारियों को ऑफिस की दिनचर्या में वापस लाने की कोशिशों के बाद भी रिमोट वर्क नौकरी के इच्छुकों को आकर्षित कर रहा है। जून, 2025 में नौकरी के 8.7 प्रतिशत विज्ञापनों में ‘‘वर्क फ्रॉम होम’’ या ‘‘हाईब्रिड वर्क’’ जैसे की-वर्ड देखने को मिले, जो पिछले साल के मुकाबले 1 प्रतिशत ज्यादा हैं, पर साल 2020 में 11.3 प्रतिशत के मुकाबले अभी भी काफी कम हैं।
रिमोट वर्क के अवसर पहले ज्यादा रहे हैं, पर नौकरी के इच्छुकों की रुचि इन नौकरियों में इससे अधिक पहले कभी नहीं थी। भारत में हर नौ में से लगभग एक नौकरी का इच्छुक रिमोट वर्क के अवसर चाहता है और यह आँकड़ा पिछले एक साल में 1.5 प्रतिशत पॉईंट बढ़ा है।
रिमोर्ट वर्क आकर्षक होने के कारणों में शामिल हैं, शहरी क्षेत्रों में काम पर जाने के लिए लंबी दूरी तय करना, ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी और ग्लोबल नौकरियों के अवसर उपलब्ध होना, तथा पूरे विश्व में महामारी के बाद बेहतर डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का स्थापित होना।
व्यवसायिक नियुक्तियों का ट्रेंड व्यापक गति प्रदर्शित कर रहा है।
नौकरियों के विज्ञापन पिछले तीन महीनों में लगभग सभी मुख्य व्यवसायिक श्रेणियों में बढ़े हैं। कृषि और वानिकी में 59 प्रतिशत के साथ सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद पशु चिकित्सा (44 प्रतिशत), थेरेपी (36 प्रतिशत) और सेहत एवं सौंदर्य (34 प्रतिशत) रहे। विभिन्न तरह के व्यवसायों के लिए विज्ञापन हाल ही में बढ़े हैं, जिससे पूरे भारत में नियुक्तियों की व्यापक क्षमता का संकेत मिलता है।
पिछले तीन महीनों में नौकरियों के विज्ञापन केवल दो सेक्टर में कम हुए। सामुदायिक और सामाजिक सेवाओं में 8.5 प्रतिशत तथा फार्मेसी में 6.8 प्रतिशत की कमी आई। अन्य क्षेत्र, जिनमें नौकरियों के विज्ञापनों की स्थिति कमजोर रही, उनमें ह्यूमन रिसोर्स (2.6 प्रतिशत वृद्धि), मेडिकल इन्फॉर्मेशन (4.2 प्रतिशत वृद्धि) तथा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट (5.2 प्रतिशत वृद्धि) हैं।
दूसरी ओर, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट ने सबसे मजबूत प्रदर्शन तो नहीं किया, पर इस क्षेत्र में नौकरी के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं, जो पिछले तीन महीनों में 7 प्रतिशत अधिक हो गए हैं। यह सेक्टर भारत में लगातार नौकरियों के सबसे अधिक अवसर पेश कर रहा है और हर पाँच नौकरी के विज्ञापनों में से एक विज्ञापन इसी सेक्टर के लिए होता है।
भारत में श्रम बाजारः ज्यादा उत्पादकता की ओर अग्रसर
भारत का श्रम बाजार बहुत विशाल और जटिल है, लेकिन औपचारिक क्षेत्र देश में लगातार ज्यादा उत्पादकता वाले रोजगार की ओर परिवर्तन को प्रदर्शित कर रहा है। हालाँकि इस क्षेत्र में चुनौतियाँ भी हैं, जिनमें खासकर विशेष सेक्टर्स के लिए कौशल का मेल न खाना तथा प्रतिभाओं की कमी शामिल हैं।
पिकरिंग ने कहा, ‘‘भारत में नौकरी के इच्छुकों की कोई कमी नहीं है। लेकिन उनका कौशल रोजगारप्रदाताओं के बदलती जरूरतों के अनुरूप नहीं है। इसकी वजह से नौकरियाँ उपलब्ध होने के बाद भी उच्च कौशल वाली भूमिकाओं में लगातार कार्यबल की कमी बनी रहती है।
निष्कर्ष
जून में भारत के औपचारिक क्षेत्र में नौकरियों के सृजन ने मई में हुई वृद्धि को मजबूत किया। इससे अनौपचारिक क्षेत्र में कम उत्पादकता वाले काम की बजाय उच्च उत्पादकता वाले अवसरों की ओर भारत के परिवर्तन में लगातार मदद मिल रही है।
भारत में काम करने वालों की कोई कमी नहीं है, लेकिन नौकरी के इच्छुकों के पास जो कौशल होता है, और जो कौशल रोजगारप्रदाता चाहते हैं, उसमें अक्सर काफी अंतर होता है। इसलिए भारत में खासकर उच्च कौशल वाले क्षेत्रों में कौशल की कमी आम बनी हुई है।
भूराजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता भी चिंता का विषय है, लेकिन नौकरियों के सृजन पर अभी तक इसका प्रभाव पड़ता प्रतीत नहीं हो रहा है। रोजगारप्रदाता स्वाभाविक रूप से ज्यादा स्थिरता पसंद करेंगे, ताकि वो निवेश करके आत्मविश्वास के साथ कर्मचारियों का निर्धारण कर सकें, पर यह अभी संभव नहीं है।

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