आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा खेल सुधार : संसद में पास हुआ नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस और एंटी-डोपिंग संशोधन बिल, 2025

भारत के खेल प्रशासन और खिलाड़ियों के हितों में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के उद्देश्य से मंगलवार को नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल, 2025 और नेशनल एंटी-डोपिंग (संशोधन) बिल, 2025 राज्यसभा में भी पास हो गए। इससे पहले सोमवार को ये बिल लोकसभा से पारित हुए थे। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इन बिलों को “आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा खेल सुधार” बताया।


नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल : पारदर्शी और जवाबदेह खेल प्रशासन की ओर

1975 से चली आ रही कोशिश अब हुई पूरी

नेशनल स्पोर्ट्स बिल को लाने की पहल पहली बार 1975 में हुई थी, लेकिन राजनीतिक कारणों के चलते यह कभी संसद तक नहीं पहुंच सका। 2011 में नेशनल स्पोर्ट्स कोड लागू किया गया, जिसे बाद में बिल में बदलने की कोशिश की गई, लेकिन वह भी अधर में लटक गया।
अब 2036 ओलंपिक की बोली लगाने की तैयारी के बीच, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खेल प्रशासन में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए इसे लाया गया है।

क्या हैं बिल के मुख्य प्रावधान?

  • नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बॉडी का गठन
  • नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड की स्थापना
  • नेशनल खेल इलेक्शन पैनल का गठन, जो खेल संगठनों के चुनाव की निगरानी करेगा
  • नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल का निर्माण, जो खिलाड़ियों और संघों के बीच विवादों का समाधान करेगा

खेल मंत्री का कहना है कि इस बिल से खेल संघों में जवाबदेही, न्याय और बेहतर गवर्नेंस सुनिश्चित होगी।


BCCI पर क्यों नहीं लागू होगा RTI

बिल में यह स्पष्ट किया गया है कि केवल वही खेल संगठन RTI (सूचना का अधिकार) के दायरे में आएंगे, जो सरकारी अनुदान या सहायता लेते हैं।

  • BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) सरकारी अनुदान नहीं लेता, इसलिए वह RTI के दायरे से बाहर रहेगा।
  • कई संगठनों ने समय-समय पर BCCI को RTI के तहत लाने की मांग की है, लेकिन खेल मंत्रालय ने मौजूदा प्रावधान बरकरार रखा है।

नेशनल एंटी-डोपिंग (संशोधन) बिल : खिलाड़ियों को मिलेगा निष्पक्ष माहौल

पृष्ठभूमि

भारत में डोपिंग रोकने के लिए 2022 में नेशनल एंटी-डोपिंग एक्ट लागू किया गया था। हालांकि, वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) ने इस कानून में कुछ आपत्तियां जताईं।
WADA की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि नेशनल बोर्ड फॉर एंटी-डोपिंग इन स्पोर्ट्स को NADA (नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी) पर निगरानी और निर्देश देने का अधिकार था, जिसे “सरकारी हस्तक्षेप” माना गया।

अगर WADA के नियमों का पालन नहीं किया जाता, तो भारत को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता था।


2025 में किए गए प्रमुख बदलाव

  • बोर्ड (नेशनल बोर्ड फॉर एंटी-डोपिंग) बना रहेगा, लेकिन अब उसके पास NADA पर कोई निर्देश या नियंत्रण का अधिकार नहीं होगा।
  • NADA को ऑपरेशनल इंडिपेंडेंस यानी संचालन की पूरी स्वतंत्रता दी गई है।
  • डोपिंग से जुड़े फैसले अब केवल NADA के विशेषज्ञों और अधिकारियों द्वारा लिए जाएंगे, न कि किसी सरकारी या राजनीतिक नियुक्त व्यक्ति द्वारा।

बदलावों से होने वाले फायदे

  • भारत का एंटी-डोपिंग सिस्टम अब पूरी तरह WADA के नियमों के अनुरूप होगा।
  • खिलाड़ियों को डोपिंग मामलों में निष्पक्ष जांच और सुनवाई मिलेगी।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख बनी रहेगी और किसी तरह का बैन या सस्पेंशन नहीं होगा।

विपक्ष की अनुपस्थिति पर खेल मंत्री की नाराज़गी

बिल पास होने के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा—

“यह आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा खेल सुधार है। यह बिल खेल संघों में जवाबदेही, न्याय और बेहतर गवर्नेंस सुनिश्चित करेगा।”
उन्होंने अफसोस जताया कि इतने महत्वपूर्ण बिल के पारित होने में विपक्ष शामिल नहीं हुआ


भारत के खेल भविष्य के लिए नया अध्याय

नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल और नेशनल एंटी-डोपिंग संशोधन बिल, दोनों ही भारत के खेल तंत्र में संरचनात्मक बदलाव लाने वाले कदम हैं।

  • पहला बिल खेल संघों के कामकाज में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा।
  • दूसरा बिल खिलाड़ियों के लिए निष्पक्ष और स्वच्छ खेल माहौल तैयार करेगा।

इन सुधारों से न सिर्फ खिलाड़ियों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि भारत के अंतरराष्ट्रीय खेल प्रदर्शन और छवि को भी मजबूती मिलेगी।

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