शॉर्ट-टर्म में स्थिरता: नौकरी के इच्छुक त्योहारों के दौरान हो रही नियुक्तियों पर पुनः विचार कर रहे हैं, इनडीड हायरिंग ट्रैकर की रिपोर्ट

नियोक्ता नियुक्तियों में तेजी दर्ज कर रहे हैं
बेंगलुरु, 23 सितंबर 2025: इनडीड की नई हायरिंग ट्रैकर रिपोर्ट के अनुसार, हर तीन में से दो नौकरी के
इच्छुक पूर्णकालिक नौकरियाँ तलाश रहे हैं। त्योहारों के दौरान मिलने वाली नौकरियों को वो बड़ी उपलब्धि
की ओर बढ़ते कदम के रूप में देख रहे हैं। दूसरी तरफ, आधे से अधिक नियोक्ताओं (53%) ने बताया कि
त्योहारों के दौरान की गई हर चार में से तीन नियुक्तियाँ अस्थायी हैं, जो पिछले साल के मुक़ाबले 7% अधिक
हैं। 16% नियोक्ताओं ने बताया कि त्योहारों के दौरान सभी नियुक्तियाँ शॉर्ट-टर्म कांट्रैक्ट पर की गई हैं।
इनडीड इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर, शशि कुमार ने कहा, “भारत में त्योहारों का मौसम हमेशा से जश्न के
साथ नौकरियों का मौसम भी होता है। लेकिन आज के कर्मचारी अलग सोच रखते हैं। वो केवल तुरंत कमाई
नहीं, बल्कि स्थिरता के साथ बेहतर भविष्य भी चाहते हैं। कर्मचारियों की इच्छा और नियोक्ताओं की पेशकश के
बीच इसी अंतर के लिए बदलाव जरूरी है। हम इन अवसरों की विज़िबिलिटी और उपलब्धता बढ़ाना चाहते हैं,
ताकि लोगों को ना केवल अच्छी नौकरी मिले, बल्कि वो अपने लिए सही रास्ता भी पा सकें।”
अप्रैल 2025 से सितंबर 2025 के बीच इनडीड की नई हायरिंग ट्रैकर रिपोर्ट में सामने आया है कि त्योहारों के
दौरान नियोक्ता 75% कार्यबल अस्थायी रूप से रख रहे हैं।
कर्मचारी क्या चाहते हैं
प्राथमिकताओं के बारे में पूछे जाने पर नौकरी के इच्छुकों ने अपना रुख स्पष्ट किया:
69% लोग वित्तीय स्थिरता और स्थिर वेतन चाहते हैं।
61% लोग जॉब-सिक्योरिटी को सबसे अधिक महत्व देते हैं।
37% लोग प्रॉविडेंट फंड दीर्घकालिक लाभ चाहते हैं।
त्योहारों पर मिलने वाले बोनस के प्रति केवल 7% लोगों और पेड लीव के प्रति 5% लोगों का झुकाव
रहा।
इससे त्योहारों के दौरान मिलने वाली नौकरियों को अतिरिक्त कमाई के रूप में देखने की पुरानी धारणा में एक
बड़ा बदलाव प्रदर्शित होता है। अब कर्मचारी यह उम्मीद करते हैं कि इन नौकरियों से उन्हें स्थायी करियर के
मार्ग मिलेंगे। यदि उन्हें इसकी संभावना दिखाई नहीं देती है, तो वो नौकरी छोड़ देते हैं। इसीलिए रिटेल,
हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल जैसे क्षेत्रों में जहाँ त्योहारों पर नियुक्तियों की माँग बढ़ी है, वहीं इस साल उन्हें
कर्मचारी ही नहीं मिल रहे हैं और जो मिल रहे हैं, वो जल्दी नौकरी छोड़कर जा रहे हैं।”
नियोक्ता क्या चाहते हैं
भले ही कांट्रैक्ट शॉर्ट-टर्म हों, पर नियोक्ता दीर्घकालिक कौशल चाहते हैं। उनमें से लगभग आधे नियोक्ताओं ने
कहा कि टेक्निकल और डोमेन का ज्ञान मिलना सबसे कठिन है। वो ये गुण भी चाहते हैं:
41% नियोक्ता लीडरशिप और मैनेजेरियल स्किल्स चाहते हैं।
29% सहयोग और टीमवर्क चाहते हैं।
26% बेहतर संचार कौशल चाहते हैं।
13% डिजिटल साक्षरता चाहते हैं।
इससे प्रदर्शित होता है कि त्योहारों के दौरान की जाने नियुक्तियां केवल फ्रंटलाइन भूमिकाओं के लिए नहीं होती
हैं। नियोक्ता ऐसे कर्मचारी चाहते हैं जो “करियर के लिए तैयार” हों। इससे प्रदर्शित होता है कि मौसमी
नौकरियों के लिए कौशल की मांग बढ़ रही है।
बाज़ार का आउटलुक
अच्छी खबर: 43% नियोक्ताओं ने बताया कि वो पिछले साल के मुकाबले इस बार त्योहारों पर अधिक
नियुक्तियां कर रहे हैं। ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्र इस मामले में अग्रणी भूमिका
निभा रहे हैं। नियोक्ता रेफ़रल बोनस और प्रति घंटा अधिक वेतन पेश कर रहे हैं। लेकिन ये कर्मचारियों की
नौकरी में स्थिरता पाने की उम्मीदों के अनुरूप नहीं हैं। इन त्योहारों पर नियोक्ता मार्केटिंग प्रोफेशनल्स,
डिलीवरी ड्राइवर और स्टोर मैनेजर के पदों पर नियुक्तियाँ कर रहे हैं।
विधि:
यह सर्वे वैल्यूवॉक्स द्वारा इनडीड के लिए किया गया। इसमें 1,261 नियोक्ताओं और 2,533 कर्मचारियों ने
हिस्सा लिया। यह डेटा इनडीड की त्रैमासिक हायरिंग ट्रैकर रिपोर्ट के लिए 14 सेक्टर्स से लिया गया। इसमें उस
अवधि में नियुक्ति की गतिविधि तय करने वाले आर्थिक तत्वों के आधार पर बाजार के रुझानों का अध्ययन
किया गया। इस रिपोर्ट में त्योहारों के दौरान भारत में रोजगार परिदृश्य में हो रहे परिवर्तन का अध्ययन किया
गया है।

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