कैंब्रिज ने शिक्षा में इनोवेशन और उत्कृष्टता लाते हुए दक्षिण एशिया के 1,000 स्कूलों में अपना विस्तार किया

भारत में 800 से अधिक कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूलों ने फ्यूचर-रेडी लर्निंग की ओर मजबूत परिवर्तन प्रदर्शित किया
23 जुलाई, 2025, नेशनलः कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस एंड एसेसमेंट (कैंब्रिज) में इंटरनेशनल एजुकेशन ग्रुप ने आज दक्षिण एशिया में 1,000 से अधिक कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूल का आँकड़ा पार करने की घोषणा की। इनमें से 800 स्कूल भारत में कैंब्रिज प्रोग्राम पेश कर रहे हैं। क्षेत्र में कैंब्रिज स्कूलों की संख्या पिछले एक साल में 16 प्रतिशत बढ़ी है। 2023-24 में जहाँ इस क्षेत्र में 894 कैंब्रिज स्कूल थे, वहीं 2024-25 में कैंब्रिज स्कूल बढ़कर 1034 हो गए हैं। नए स्कूलों में भारत का योगदान 81 प्रतिशत से अधिक है। दक्षिण एशिया में 75 प्रतिशत से अधिक कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूल भारत में स्थित हैं, तथा इसके बाद 12 प्रतिशत बांग्लादेश में स्थित हैं।
पुणे का ब्रह्मप्रिया वर्ल्ड स्कूल 1000 वाँ कैंब्रिज स्कूल बना। 53 प्रतिशत कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूल टियर 1 शहरों में हैं, जो दर्शाता है कि अधिकांश स्कूल शहरों में स्थित हैं। दक्षिण भारत में छोटे शहरों में कैंब्रिज स्कूलों की संख्या सबसे अधिक बढ़ी है। 47 प्रतिशत कैंब्रिज स्कूल टियर 2 और टियर 3 शहरों में हैं। इससे प्रदर्शित होता है कि नॉन-मेट्रो शहरों में अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा का विस्तार हुआ है।
दक्षिण एशिया में कैंब्रिज का विस्तार अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा की ओर होता वैश्विक परिवर्तन प्रदर्शित करता है। 2024 में पिछले सालों के मुकाबले ज्यादा विद्यार्थियों ने कैंब्रिज परीक्षाएं दीं। क्षेत्र में अपने स्कूलों के आग्रह पर कैंब्रिज द्वारा मार्च, 2026 से तीसरी कैंब्रिज चेकपॉईंट टेस्ट सीरीज़ शुरू की जा रही है, जिससे स्कूलों को अपने शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप मूल्यांकन करने का अधिक लचीलापन मिलेगा।
कैंब्रिज के विद्यार्थी एएस एंड ए लेवल के लिए 50 से अधिक विषय और कैंब्रिज आईजीसीएसई के लिए 70 से अधिक विषय चुन सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को अपनी सुविधा के अनुसार विषय चुनने का विकल्प और लचीलापन मिलता है। 3 से 19 साल के विद्यार्थियों के लिए कैंब्रिज का कोर्स इस तरह से डिज़ाईन किया गया है, जिससे उनमें एनालिटिकल थिंकिंग और स्वतंत्र शोध कौशलों का विकास होता है, वो कम्युनिकेशन और लीडरशिप के कौशल का विकास करते हैं। कैंब्रिज ने पिछले साल भारत में कैंब्रिज क्लाईमेट क्वेस्ट का लॉन्च किया था। यह अपनी तरह का पहला क्लाईमेट लिटरेसी प्रोग्राम है, जो विद्यार्थियों को क्लाईमेट और सस्टेनेबिलिटी के बारे में शिक्षित करता है। विषय के गहरे ज्ञान के साथ ये कौशल विद्यार्थियों को वास्तविक दुनिया में आगे बढ़ने में मदद करते हैं।
दक्षिण एशिया में इंटरनेशनल एजुकेशन के लिए सीनियर वाईस प्रेसिडेंट, विनय शर्मा ने कहा, ‘‘दक्षिण एशिया में 1,000 स्कूलों का आँकड़ा पार करना विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यह शिक्षा लर्नर्स और एजुकेटर्स, दोनों को सशक्त बनाती है। भारत में 800 से अधिक कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूलों के साथ हमें इस क्षेत्र में इनोवेशन, समावेशन और उत्कृष्टता लाने में अग्रणी भूमिका निभाने पर गर्व है। हमारे प्रोग्राम केवल शैक्षणिक उपलब्धि तक सीमित नहीं, वो लर्नर्स को वैश्विक चुनौतियों का सामना करने का कौशल, मानसिकता और आत्मविश्वास प्रदान करते हैं, ताकि वो जलवायु परिवर्तन से लेकर एआई तक, हर क्षेत्र में नेतृत्व कर सकें। हम अपने स्कूलों के साथ शिक्षा के भविष्य को आकार दे रहे हैं।’’
कैंब्रिज दक्षिण एशिया में अपने कदमों का विस्तार कर रहा है। यह व्यवहारिक विकास, आजीवन लर्निंग, और विद्यार्थियों को विश्व के लिए तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। अपने इनोवेटिव प्रोग्राम्स, कठोर मूल्यांकन और अनुकूलित संसाधनों के माध्यम से कैंब्रिज शिक्षा में नए मानक स्थापित कर रहा है और क्षेत्र में लोगों का जीवन बदलने के लिए स्कूलों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

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