कैप्सी (CAPSI) ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से वेतन संहिता अधिनियम, 2019 के तहत भुगतान की जिम्मेदारी में असमानता को दूर करने का आग्रह किया

नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2025: सरकार जहां श्रमिक कल्याण और समय पर वेतन भुगतान को प्राथमिकता दे रही है, वहीं सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री कैप्सी (CAPSI) ने वेतन संहिता अधिनियम, 2019 (Code on Wages Act, 2019) की धारा 54(क) और संबंधित वेतन संहिता (केंद्रीय) नियम, 2020 के कार्यान्वयन को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
यह मुद्दा मुख्य रूप से ठेकेदारों—जैसे कि प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों (PSAs)—के माध्यम से नियोजित कर्मचारियों को समय पर वेतन भुगतान से जुड़ा है, और इसके तहत ठेकेदार तथा सेवा प्राप्तकर्ता (क्लाइंट/संस्थान) के बीच साझा उत्तरदायित्व तय करने की आवश्यकता बताई गई है।
वेतन संहिता अधिनियम, 2019 की धारा 54(क) के अनुसार:
“कोई भी नियोक्ता जो—(क) किसी कर्मचारी को इस कोड के प्रावधानों के अंतर्गत देय राशि से कम वेतन देता है, उस पर प्रत्येक उल्लंघन के लिए ₹50,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।”
हालाँकि इस प्रावधान की मंशा स्पष्ट रूप से श्रमिकों के हित में है, कैप्सी (CAPSI) का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में भी ठेकेदारों पर दंड लगाए जाने की आशंका है, जब सेवा प्राप्तकर्ता (क्लाइंट) द्वारा भुगतान समय पर नहीं किया गया होता। इससे ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, जहाँ ठेकेदारों को उन विलंबों के लिए उत्तरदायी ठहराया जा रहा है, जिन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं होता।
कैप्सी (CAPSI) ने सुझाव दिया है कि वेतन संहिता (केंद्रीय) नियमों, 2020 में निम्नलिखित स्पष्टीकरण जोड़ा जाए:
“वेतन का समय पर भुगतान – जहाँ कर्मचारी किसी प्रतिष्ठान में ठेकेदार के माध्यम से नियोजित हैं, वहाँ प्रतिष्ठान का स्वामी (कंपनी, फर्म, संगठन या कोई अन्य व्यक्ति) ठेकेदार को वेतन की राशि वेतन भुगतान की नियत तिथि से पहले उपलब्ध कराएगा, ताकि कर्मचारियों को धारा 17 के तहत वेतन समय पर मिल सके, बशर्ते ठेकेदार को सेवा प्राप्तकर्ता से पिछले माह का भुगतान निर्धारित तिथि (7 तारीख) तक प्राप्त हो चुका हो। यदि ठेकेदार समय पर भुगतान प्राप्त करने के बावजूद वेतन देने में विफल रहता है, तो उस पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।”
यह प्रस्तावित संशोधन एक न्यायसंगत और व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर उत्तरदायित्व तय किया जा सकेगा। यह प्रावधान ठेकेदारों और क्लाइंट्स के बीच आपसी निर्भरता को भी मान्यता देता है, और सेवा प्राप्तकर्ताओं को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करता है।
कैप्सी (CAPSI) अध्यक्ष श्री कुंवर विक्रम सिंह ने इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “यदि इस प्रावधान को जल्द संशोधित नहीं किया गया, तो इसका प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इससे हजारों एजेंसियों के संचालन पर संकट आ सकता है और लाखों संविदा श्रमिकों का भविष्य दांव पर लग सकता है, जिससे ‘विक्सित और सुरक्षित भारत’ के लक्ष्य को भी झटका लगेगा।”
उन्होंने सभी संबंधित सरकारी विभागों और अधिकारियों से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक स्पष्टीकरण जोड़ने की अपील की है, ताकि सभी हितधारकों के हित सुरक्षित रह सकें और संविदा आधारित श्रमशक्ति पर निर्भर प्राइवेट सिक्योरिटी सेक्टर का भविष्य मजबूत बना रहे।

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