बिना ओपन-हार्ट सर्जरी के चार मरीजों का हृदय वाल्व प्रत्यारोपण सफल, सभी को 48 घंटे के भीतर मिली छुट्टी

अमृता अस्पताल, फरीदाबाद ने हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 3 जुलाई को अस्पताल में चार मरीजों को Transcatheter Pulmonary Valve Replacement (TPVR) तकनीक के ज़रिए बिना ओपन-हार्ट सर्जरी के सफल हृदय वाल्व प्रत्यारोपण दिया गया—वह भी एक ही दिन में और बिना छाती पर एक भी चीरा लगाए।
TPVR एक अत्याधुनिक, न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है जिसमें एक लचीली ट्यूब (कैथेटर) के माध्यम से हृदय के दोषग्रस्त पल्मोनरी वाल्व को बदला जाता है। इस प्रक्रिया से पारंपरिक सर्जरी की तुलना में जोखिम, दर्द और अस्पताल में रहने की अवधि काफी कम हो जाती है।
चारों मरीज—दिल्ली के 37 वर्षीय पुरुष, नोएडा के दो किशोर (17 व 15 वर्षीय), और गुरुग्राम के 14 वर्षीय लड़के—सभी ने बचपन में Tetralogy of Fallot (TOF) नामक जन्मजात हृदय रोग के लिए ओपन-हार्ट सर्जरी करवाई थी। वर्षों बाद, इन सभी को पल्मोनरी वाल्व में लीक की समस्या उत्पन्न हुई, जो TOF सर्जरी का एक आम दीर्घकालिक परिणाम है। आमतौर पर ऐसे मामलों में दोबारा ओपन-हार्ट सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है, लेकिन अमृता अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने बिना सर्जरी के इन मरीजों को नया जीवन दिया।
TPVR प्रक्रिया में Harmony™ Valve सिस्टम का उपयोग किया गया, जो जैविक ऊतक से बना एक आधुनिक वाल्व है, जिसे एक विशेष धातु फ्रेम पर माउंट किया जाता है। प्रत्येक प्रक्रिया लगभग 60 से 90 मिनट में पूरी हुई और सभी मरीजों को 48 घंटे के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई—जबकि पारंपरिक सर्जरी में आमतौर पर 10-12 दिन का अस्पताल में ठहराव आवश्यक होता है।
डॉ. एस. राधाकृष्णन, प्रमुख एवं प्रोफेसर, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी व एडल्ट कंजेनिटल हार्ट डिजीज ने कहा:
“विश्व स्तर पर TOF की सर्जरी के बाद 30 वर्षों के भीतर 40% मरीजों को Pulmonary Valve बदलवाने की आवश्यकता होती है। भारत में अभी भी अधिकांश मामलों में पारंपरिक सर्जरी ही की जाती है, जबकि TPVR की वैश्विक सफलता दर 95% से अधिक है। लेकिन इसकी पहुंच और स्वीकार्यता भारत में सीमित है—मुख्यतः लागत और प्रोटोकॉल संबंधी कारणों से।”
डॉ. सुशील आज़ाद, डिप्टी हेड व प्रिंसिपल कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी ने कहा:
“TPVR विशेष रूप से उन मरीजों के लिए जीवनदायक है जो पहले कई बार ओपन-हार्ट सर्जरी करवा चुके हैं या जिनकी सर्जरी जोखिमपूर्ण है। भारत में हर साल 2 लाख बच्चे जन्मजात हृदय रोग के साथ जन्म लेते हैं। यदि TPVR को इलाज के मुख्य मार्ग में शामिल किया जाए, तो हम हज़ारों जानें बचा सकते हैं।”
इन जटिल प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली बहु-विशेषज्ञ टीम में शामिल थे:
डॉ. अंकित गर्ग, कंसल्टेंट, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी
डॉ. सविता कृष्णमूर्ति गुइन, असिस्टेंट प्रोफेसर, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी
डॉ. शशिकपूर डुबर यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी
अमृता अस्पताल वर्तमान में भारत का एकमात्र ऐसा चिकित्सा संस्थान है जिसे Harmony Valve का प्रत्यारोपण अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण के बिना करने की स्वायत्त अनुमति प्राप्त है।
अमृता अस्पताल के बारे में: अमृता अस्पताल भारत का अग्रणी मल्टी-स्पेशलिटी हेल्थकेयर सेंटर है, जिसकी स्थापना 1998 में श्री माता अमृतानंदमयी देवी (अम्मा) के दिव्य मार्गदर्शन में हुई थी। यह संस्थान करुणा, गुणवत्ता और अत्याधुनिक तकनीक के साथ चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए समर्पित है।
फरीदाबाद में स्थित इस अस्पताल में 2,600 बेड्स, 534 क्रिटिकल केयर बेड्स, और 81 स्पेशलिटीज़ हैं। यहाँ 800 से अधिक डॉक्टर कार्यरत हैं जो कैंसर, गैस्ट्रो साइंसेज, न्यूरोलॉजी, और कार्डियक साइंसेज सहित विभिन्न चिकित्सा क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्रदान करते हैं।
अमृता अस्पताल का उद्देश्य है—न केवल जीवन बचाना, बल्कि सम्पूर्ण शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य सुनिश्चित करना।

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