सीएफए इंस्टीट्यूट ने फिन्फ्लुएंसर रिपोर्ट जारी की, जिसमें रिटेल निवेश पर फाईनेंशल इन्फ्लुएंसर के प्रभाव और भूमिका को उजागर किया गया है

भारत – इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के वैश्विक संगठन, सीएफए ने आज अपनी फिन्फ्लुएंसर रिपोर्ट ‘क्लिक्स एंड क्रेडिबिलिटीः अंडरस्टैंडिंग फिन्फ्लुएंसर्स रोल इन इन्वेस्टमेंट डिसीज़ंस’ जारी की, जिसमें भारत में रिटेल निवेश के परिदृश्य में निवेश के निर्णयों को प्रभावित करने वाले फाईनेंशल इन्फ्लुएंसर्स या फिन्फ्लुएंसर्स की विकसित होती हुई भूमिका का विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन में 1,600 से अधिक निवेशकों का सर्वे किया गया। 51 प्रभावशाली फाईनेंशल इन्फ्लुएंसर्स का गहन विश्लेषण किया गया। जिससे इस विकसित होते हुए परिदृश्य में संभावनाओं और कमियों का खुलासा हुआ।
इस रिपोर्ट में शामिल केवल 2 प्रतिशत फाईनेंशल इन्फ्लुएंसर्स ही सेबी पर रजिस्टर्ड हैं, उसके बाद भी 33 प्रतिशत खरीदने और बेचने संबंधी परामर्श देते हैं, जिससे इस मामले में दिए जाने वाले परामर्शों की विश्वसनीयता और जवाबदेही पर सवाल खड़ा होता है।
पिछले पाँच सालों में भारत में ईक्विटी बाजार में रिटेल निवेश करने वालों की संख्या में बहुत तेजी से वृद्धि हुई है। ये आँकड़े ईक्विटी की लोकप्रियता का उत्साहजनक परिदृश्य पेश करते हैं। वहीं, कैपिटल मार्केट रैगुलेटर, सेबी के अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि इनमें से कई निवेशक सट्टेबाज ज्यादा हैं, जो लाभ के लालच में पैसा लगाते हैं, लेकिन भारी नुकसान उठाते हैं। गैरजिम्मेदार व्यवहार को रोकने के लिए सेबी द्वारा ठोस उपाय किए जा रहे हैं। मासूम रिटेल निवेशकों को गुमराह करके अवैध लाभ कमाने वाले फिन्फ्लुएंसर्स पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है, लेकिन फिर भी भारत में फिन्फ्लुएंसर के परिदृश्य को नियमित बनाने के लिए अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है निवेशकों द्वारा निवेश के व्यवहार को समझना और फिन्फ्लुएंसर्स द्वारा निर्मित कंटेंट की समीक्षा करना।
इस रिपोर्ट में निवेशकों के ऊपर फिन्फ्लुएंसर्स के महत्वपूर्ण प्रभाव को उजागर किया गया है। 82 प्रतिशत फौलोअर्स ने बताया कि उन्होंने फिन्फ्लुएंसर के परामर्श के अनुसार निवेश किया था। इनमें से 72 प्रतिशत को वित्तीय लाभ हुआ। हालाँकि इस रिपोर्ट में शामिल जोखिमों को भी उजागर किया गया। 14 प्रतिशत बुजुर्ग निवेशकों, जिनकी उम्र 40 साल और उससे अधिक थी, ने बताया कि वो गुमराह हुए और धोखे की सलाह में फँस गए, जिससे सतर्क रहने और नियामक निगरानी करते रहने की जरूरत को बल मिलता है।
सीएफए इंस्टीट्यूट – इंडिया की कंट्री हेड, आरती पोरवाल ने कहा, ‘‘भारत में फाईनेंशल इन्फ्लुएंसर के परिवेश में जागरुकता लाने और वित्तीय ज्ञान को जनसमूह तक पहुँचाने की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन इस रिपोर्ट में जिम्मेदार व्यवहार और सूचित निर्णय लेने के महत्व पर जोर दिया गया है। निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत हैं और उन्हें केवल सेबी पर रजिस्टर्ड इन्फ्लुएंसर्स से ही परामर्श लेना चाहिए। वो जिन इन्फ्लुएंसर्स का कहना मान रहे हैं, उनके क्रेडेंशियल्स की जाँच कर लेनी चाहिए। सीएफए इंस्टीट्यूट में हम रैगुलेटर्स, प्लेटफॉर्म्स, और इन्फ्लुएंसर्स के बीच ज्यादा पारदर्शिता और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि एक भरोसेमंद वित्तीय परिवेश स्थापित हो सके।’’
इस रिपोर्ट में भारत में रिटेल निवेश के व्यवहार के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की गई है। इसमें खुलासा हुआ है कि 21 साल से 25 साल के युवा निवेशक अनियमित निवेश करते हैं। वो बचत के इकट्ठा होने का इंतजार करते हैं। वहीं बुजुर्ग निवेशक स्थिर रूप से मासिक निवेश करते हैं। किस प्लेटफॉर्म पर निवेश करना है, यह निर्णय लेने में विश्वास और उपयोग के आसान होने की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। युवा निवेशक लो-ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करते हैं, वहीं बुजुर्ग निवेशक फुल-सर्विस ब्रोकरेज और व्यक्तिगत परामर्श का सहारा लेते हैं। लोगों के लिए फाईनेंस को समझना आसान बनाने में इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पर इस रिपोर्ट में स्पष्ट विवरण देने के मामले में चिंताजनक कमी उजागर हुई है। 63 प्रतिशत इन्फ्लुएंसर्स स्पॉन्सरशिप और फाईनेंशल एफिलिएशन के बारे में साफ-साफ नहीं बताते हैं।
सीएफए इंस्टीट्यूट ने रैगुलेशन और जागरुकता की कमी को दूर करने के महत्व पर जोर दिया है। इस रिपोर्ट में सर्टिफिकेशन के लिए कठोर मानकों की मांग की गई है, तथा सरकार से आग्रह किया गया है कि वित्तीय परामर्श देने वाले सभी इन्फ्लुएंसर्स के लिए सेबी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया जाए और उनकी समीक्षा सख्ती से हो। इसके अलावा, सीएफए इंस्टीट्यूट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा पारदर्शिता लाए जाने का सुझाव दिया है। स्पॉन्सर्ड कंटेंट की स्पष्ट लेबलिंग होनी चाहिए और विश्वसनीय फाईनेंशल इन्फ्लुएंसर के लिए सत्यापन की प्रणाली स्थापित होनी चाहिए। इन उपायों और निवेशक शिक्षा अभियानों की मदद से रिटेल निवेशकों की सुरक्षा हो सकेगी तथा एक जवाबदेह एवं विकासशील वित्तीय परामर्श परिवेश स्थापित हो सकेगा।
भारत में विकसित होते हुए निवेश के परिवेश में यह रिपोर्ट फाईनेंशल इन्फ्लुएंसर्स द्वारा निर्मित अवसरों और उत्पन्न चुनौतियों का विस्तृत रोडमैप प्रदान करती है। शिक्षा, पारदर्शिता और सहयोग पर केंद्रित रहते हुए सीएफए इंस्टीट्यूट का उद्देश्य निवेशकों को सशक्त बनाना और आवश्यक सुधार लेकर आना है ताकि भारत में वित्तीय परामर्श की निष्पक्षता बरकरार रहे।

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