फ्रेओ ने शुरू की अनोखी पहल — बीमा खरीदने से पहले भारतवासियों को हेल्थ इंश्योरेंस को समझाने की मुहिम

पटना, 27 जून 2025: 8 जून है इंश्योरेंस अवेयरनेस डे — एक ज़रूरी याद दिलाने वाला दिन कि भारत में बीमा कवरेज भले ही बढ़ रहा हो, लेकिन इसे समझने की रफ़्तार अभी भी धीमी है।
हर 10 में से 8 पॉलिसीधारकों को यह तक नहीं पता होता कि उनकी बीमा पॉलिसी क्या कवर करती है, क्या नहीं करती — और दावा कैसे किया जाता है।
यही वजह है कि Freo ने बीमा को बेचने से पहले समझाने की पहल की है।
3.5 करोड़ से अधिक यूज़र्स के लिए क्रेडिट को सरल बनाने के बाद, अब फ्रेओ एक नए मिशन पर है: हर भारतीय के लिए हेल्थ इंश्योरेंस को समझना आसान बनाना। हाल ही में फ्रेओ ने इरडा (आईआरडीएआई) से कॉर्पोरेट एजेंसी लाइसेंस प्राप्त किया है और अब उसने एक व्यापक पहल की शुरुआत की है, जिससे स्वास्थ्य बीमा को सरल, स्पष्ट और तनावमुक्त बनाया जा सके — ताकि लोग आत्मविश्वास के साथ बेहतर और समझदारी से फैसले ले सकें।
भारत में लाखों लोग बीमा खरीदने से इसलिए हिचकिचाते हैं, क्योंकि वे इसे समझ नहीं पाते — यह समस्या कीमत की नहीं, जटिलता की है। भाषा की कठिनाई, बिक्री के जाल का डर और कवरेज को लेकर असमंजस अक्सर लोगों को बीमा से दूर कर देता है।
भारत में इंश्योरेंस की पहुंच मात्र 3.7% है, जो कि वैश्विक औसत 7% से काफी कम है। इसे लेकर फ्रेओ के देशभर में किए गए सर्वे में सामने आया कि हर 100 में से 96 लोग बीमा से इसलिए दूर रहते हैं क्योंकि उन्हें यह बहुत जटिल या अप्रासंगिक लगता है।
फ्रेओ आज डिजिटल फाइनेंस में एक भरोसेमंद नाम बन चुका है — 1,200+ शहरों और 19,000+ पिनकोड्स में 3.5 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं को समझदारी से कर्ज लेने, सही खर्च करने और पैसे बढ़ाने में मदद करके। इंस्टेंट क्रेडिट, यूपीआई पेमेंट्स, फिक्स्ड डिपॉज़िट और डिजिटल गोल्ड जैसे उत्पादों के साथ, फ्रेओ ने वित्तीय नियंत्रण को सरल बनाया है। अब वही स्पष्टता वह बीमा की दुनिया में भी ला रहा है।
फ्रेओ का नया प्लेटफॉर्म — [learn.freo.money] — आपकी भाषा में, आपकी समझ में
यह प्लेटफॉर्म बीमा को इस तरह से समझाता है कि वह सादा, सरल और स्पष्ट हो। यह अंग्रेज़ी और हिंदी में उपलब्ध है, और जल्द ही कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी पेश किया जाएगा।
इस पहल की खास बातें:
● स्पष्ट सामग्री:
बीमा को आसान भाषा में समझाया गया है — हिंदी और अंग्रेज़ी में; जल्द ही अन्य भाषाओं में भी।
● इंटरऐक्टिव लर्निंग:
वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरण, सामान्य सवाल-जवाब और व्यावहारिक टूल्स जो समझ को गहराई देते हैं।
● व्यक्तिगत मार्गदर्शन:
फ्रेओ ऐप और learn.freo.money के ज़रिए आपको मिलेगी खास आपकी ज़रूरत के अनुसार जानकारी।
जल्द आ रहा है:
● 50+ शहरों में बीमा जागरूकता अभियान
● समुदायों, एनजीओ और स्कूलों के साथ साझेदारी, जिससे ज़मीनी स्तर पर जागरूकता फैलाई जा सके
फ्रेओ के सीईओ व सह-संस्थापक कुणाल वर्मा ने कहा, “भारत में अधिकांश बीमा प्लेटफ़ॉर्म और ब्रांड केवल बीमा बेचने की होड़ में हैं। जबकि कवरेज बढ़ाना ज़रूरी है, उससे कहीं ज्यादा ज़रूरी है कि लोग स्वास्थ्य बीमा की जटिलताओं को पहले समझें। बीमा को आसान बनाया जाना चाहिए — ताकि यह लोगों को सशक्त बनाए, भ्रमित न करे। इस पहल के माध्यम से हमारा लक्ष्य है — हर भारतीय को आसान और भरोसेमंद ढंग से सही निर्णय लेने में मदद करना।”
कोविड के बाद बीमा की मांग बढ़ी है — इस वर्ष बीमा प्रीमियम ₹1 लाख करोड़ तक पहुंचा, जो पिछले साल से 10% अधिक है।
लेकिन यह केवल पैसों की बात नहीं है — समझ की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
भारत “2047 तक सभी के लिए बीमा” के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। फ्रेओ इस दिशा में अपना योगदान दे रहा है — आसान, स्पष्ट और स्थानीय भाषा में बीमा जानकारी देकर। फ्रेओ का मानना है कि सरलता ही है व्यापक अपनाने की कुंजी — और यही हर परिवार को सशक्त बनाएगी अपने स्वास्थ्य और पैसों को लेकर सही फैसले लेने में।

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