अदिवासी गांव से ग्लोबल ट्रैक तक: अनिमेष कुजूर भारत के सबसे तेज़ धावक बने

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के आदिवासी गांव घुइटांगर (Oraon समुदाय) से निकलकर अनिमेष कुजूर ने अपनी मेहनत, समर्पण और अनुशासन के दम पर भारत के सबसे तेज स्प्रिंटर के रूप में खुद को स्थापित किया है। 22 वर्ष की आयु में यह युवा एथलीट 100m और 200m दोनों इवेंट्स में राष्ट्रीय रिकॉर्ड्स अपने नाम किए हैं — एक ऐसे मुकाम पर जहाँ तक पहुँचना बहुत ही चुनौतिपूर्ण था।
शुरुआती जीवन और प्रशिक्षण
अनिमेष का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ उनके माता-पिता दोनों पुलिस अधिकारी (DSP) हैं; पिता अमृत और माता रिना कुजूर दोनों ही खेल व अनुशासन में विश्वास रखते थे । उन्होंने सैैनिक स्कूल अंबिकापुर में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जहाँ शारीरिक क्षमता और खेल गतिविधियों पर जोर था। कोविड-19 अवधि के दौरान, उन्होंने सेना के उम्मीदवारों के साथ दौड़ने का अभ्यास किया, जिससे उनकी फिटनेस और मानसिक दृढ़ता को बहुत बल मिला ।
इसके बाद उन्हें ओडिशा स्थित Reliance Foundation Athletics High Performance Centre (HPC) में चुना गया, जहाँ उनके ट्रेनर इंग्लिश कोच मार्टिन ओवेन्स बने। कोच ओवेन्स ने उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण, गति सुधार और मानसिक अनुशासन की ट्रेनिंग दी ।
राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ना: 100m और 200m
100 मीटर रेस में अनिमेष ने 5 जुलाई 2025 को ग्रीस के वरी में आयोजित Dromia International Sprint and Relays Meeting में 10.18 सेकंड का समय दर्ज कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने इस प्रदर्शन के साथ 10.20s का रिकॉर्ड भी तोड़ा, और भारत के पहले ऐसे धावक बने जिन्होंने 10.20 सेकंड से कम समय में 100m पूरी की ।
200 मीटर रेस में भी उन्होंने अपना स्थान मजबूत किया: अप्रैल 2025 में फेडरेशन कप (कोची) में उन्होंने 20.40 सेकंड में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया, जिसे मई में वे एसियाई चैम्पियनशिप (गुमी, दक्षिण कोरिया) में 20.32 सेकंड से और बेहतर करते हुए राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज कराया और ब्रॉन्ज मेडल जीत कर इतिहास रच दिया ।
इसके अलावा, उन्होंने 4×100 मीटर रिले टीम के रूप में 38.69 सेकंड के समय के साथ एक और राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज कराया ।
अंतर्राष्ट्रीय मंच पर यात्रा: मोनाको और स्विट्ज़रलैंड
मोनाको डायमंड लीग (200m, U‑23)
जुलाई 2025 में मोनाको डायमंड लीग के U‑23 200m फाइनल में भाग लेते हुए अनिमेष ने 20.55 सेकंड समय लेकर चौथा स्थान प्राप्त किया। ये समय व्यक्तिगत शीर्ष प्रदर्शन (PB 20.32s) से थोड़ी दूरी पर था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के युवा धावक Gout Gout (20.10s), बोत्सवाना के और South Africa के Jack Naeem (20.42s) जैसे धावकों के साथ प्रतिस्पर्धा उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण अनुभव साबित हुआ ।
स्विट्ज़रलैंड (Lucerne) में की भागीदारी
इसके बाद स्विट्ज़रलैंड के Lucerne में आयोजित Spitzen Leichtathletik Luzern मीट में अनिमेष ने Heat C में 10.28 सेकंड की दौड़ के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। यह उनकी व्यक्तिगत तीसरी सर्वश्रेष्ठ टाइमिंग थी, और उन्होंने इस प्रदर्शन से यह दिखाया कि वे निरंतर वृद्धि कर रहे हैं ।
उनका कोच ओवेन्स इस प्रगति से संतुष्ट हैं लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सुधार एक धीमी प्रक्रिया है: ट्रेनिंग, ट्रैक की परिस्थितियाँ और हवा का प्रभाव समय-वक्त पर अहम भूमिका निभाते हैं ।
लक्ष्य: विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप 2025
अगला लक्ष्य 2025 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप, टोक्यो (सितंबर) में क्वालिफाई करना है। अनिमेष ने मज़ाकिया अंदाज़ में अपने कोच मार्टिन से कहा, “मैं क्वालीफाई कर लूंगा, आप चिंता मत करो!” । उनकी नजर 200 मीटर की क्वालिफाइंग टाइम 20.16 सेकंड पर लगी है, और वे इस चुनौती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
100m में उनका अगला लक्ष्य 10 सेकंड का बैरियर तोड़ना है, जो ऐतिहासिक छलांग होगी। कोच ओवेन्स का उद्देश्य एक योजना-निष्ठ तरीके से इस सुधार को धीरे-धीरे हासिल करना है ।
चुनौतियाँ और प्रेरणा का स्रोत
अनिमेष की कहानी कड़ी मेहनत के साथ-साथ जज्बातों और समाज के समर्थन की भी कहानी है। कोविड‑19 समय में स्वास्थ्य की चुनौतियाँ, घर से दूर ट्रेनिंग, सुविधाओं की कमी — सभी मुश्किलों के बावजूद उन्होंने टिक कर रखा।
कोच मार्टिन ओवेन्स कहते हैं कि उनकी विनम्रता और सीखने का जज़्बा सबसे खास है, जो किसी भी प्रशिक्षित एथलीट में होना चाहिए। यह वह गुण है जिसने उन्हें प्रतिस्पर्धा की दुनिया में तेज़ी से आगे बढ़ने में मदद की ।
निष्कर्ष: भारत के लिए एक नई सुबह
अनिमेष कुजूर की कहानी ये बताती है कि अगर सही मार्गदर्शन, सही दृष्टिकोण और दृढ़ संकल्प होना हो तो सीमित संसाधनों के बावजूद भी सफलता के उच्चतम शिखर को छूना संभव है। वह सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धियाँ हासिल नहीं कर रहे—वे भारतीय एथलेटिक्स में नए युग की शुरुआत कर रहे हैं।
भारत के युवा एथलीटों के लिए अनिमेष का सफर प्रेरणा का स्रोत है: यह याद दिलाता है कि गाँवों से ग्लोबल स्टेज तक, मेहनत और दृढ़ता से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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