आईपीएल की गंदी आदतों से पीछा छुड़ाने को भारतीय तेज़ गेंदबाजों का दो‑रंग गेंद वाला यूनिक ड्रिल

इंग्लैंड दौरा: टेस्ट से पहले टीम इंडिया ने बदली रणनीति, दो रंगों की गेंदों से कर रही तैयारी
भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला एजबेस्टन में होने वाला है। इस मुकाबले से पहले टीम इंडिया ने अपने अभ्यास सेशन में एक अनोखी और रणनीतिक चाल चलते हुए दो रंगों की गेंदों का इस्तेमाल किया है। इसका मुख्य उद्देश्य है खिलाड़ियों की सफेद गेंद (टी-20 और वनडे) की आदतों को खत्म कर लाल गेंद (टेस्ट) क्रिकेट के अनुरूप ढलना।
आईपीएल की ‘गंदी आदतों’ से छुटकारा
भारतीय तेज गेंदबाजों ने हाल ही में खत्म हुए आईपीएल में हिस्सा लिया था, जहां गेंदबाजी की लाइन-लेंथ और रणनीति पूरी तरह अलग होती है। सीमित ओवरों की क्रिकेट में यॉर्कर, धीमी गेंदें और विकेट टू-विकेट गेंदबाजी पर ज्यादा जोर दिया जाता है। टेस्ट क्रिकेट इसके विपरीत है — यहां स्विंग, सीम मूवमेंट और ऑफ स्टंप के बाहर गेंदबाजी करना ज़रूरी होता है। इसलिए, भारतीय गेंदबाजों को फिर से टेस्ट मोड में लाने के लिए कोचिंग स्टाफ ने दो रंगों की गेंदों से अभ्यास की योजना बनाई।
दो रंगों की गेंदों का प्रयोग
प्रैक्टिस सेशन की शुरुआत में भारत के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने आधा लाल और आधा सफेद रंग की गेंद से गेंदबाजी की। इसके पीछे मकसद था — गेंद के सीम और स्विंग को बेहतर तरीके से देखना और समझना। इसके बाद मोहम्मद सिराज, मुकेश कुमार और अन्य गेंदबाजों ने भी इसी रंगीन गेंद का इस्तेमाल किया।
कोच टेन डोइशे का बयान
भारत के सहायक कोच रेयान टेन डोइशे ने कहा, “यह तकनीक कोई नई नहीं है। दुनिया भर में कई गेंद निर्माता ऐसी गेंदें बनाते हैं, जिनसे सीम और स्विंग को समझना आसान होता है। हम अपने गेंदबाजों को सफेद गेंद की मानसिकता से बाहर निकालकर, लाल गेंद की रणनीति के अनुरूप ढालना चाहते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारे गेंदबाजों के लिए यह जरूरी है कि वे ऑफ स्टंप के बाहर गेंदबाजी करें और बल्लेबाज को ड्राइव के लिए ललचाएं। यह तभी संभव है जब लाइन-लेंथ सटीक हो। दो रंगों की गेंदों से यह अभ्यास करने में मदद मिलती है।”
बुमराह की फिटनेस पर संशय
टीम इंडिया के प्रमुख गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की फिटनेस को लेकर कुछ संशय बरकरार है। बताया जा रहा है कि वह पूरी तरह फिट नहीं हैं और उन्हें दूसरे टेस्ट में आराम दिया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो वॉशिंगटन सुंदर या नितीश रेड्डी जैसे ऑलराउंडर को मौका मिल सकता है, जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी योगदान दे सकते हैं।
इंग्लैंड की रणनीति
वहीं, इंग्लैंड की टीम भी अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ रही है। एजबेस्टन में इंग्लैंड की टीम का प्रैक्टिस सेशन चल रहा था, जब अचानक इंग्लैंड के पूर्व ऑलराउंडर मोईन अली मैदान में पहुंचे। उन्हें मुख्य कोच ब्रेंडन मैक्कुलम और स्पिन कोच जीतन पटेल के साथ लंबी चर्चा करते देखा गया। यह कयास लगाए जा रहे हैं कि इंग्लैंड टीम मोईन अली को बैकअप के रूप में फिर से टीम में शामिल कर सकती है, खासकर एजबेस्टन की पिच को देखते हुए जो स्पिनरों को मदद देती है।
एजबेस्टन टेस्ट: कड़ी टक्कर की उम्मीद
भारत बनाम इंग्लैंड का दूसरा टेस्ट एजबेस्टन में खेला जाएगा, जो परंपरागत रूप से तेज गेंदबाजों के लिए मददगार रहा है। लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, स्पिनरों को भी टर्न और बाउंस मिलती है। ऐसे में दोनों टीमें गेंदबाजी विभाग में रणनीतिक बदलाव कर रही हैं।
भारतीय टीम की यह कोशिश — दो रंगों की गेंदों से अभ्यास — यह दर्शाता है कि वे इस मैच को लेकर कितनी गंभीर हैं। आईपीएल के शॉर्ट फॉर्मेट की तकनीक को पीछे छोड़कर टेस्ट क्रिकेट की लंबी रणनीति में ढलना एक बड़ी चुनौती होती है, और भारतीय कोचिंग स्टाफ ने इसके लिए एक ठोस कदम उठाया है।

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