जडेजा‑सुंदर की शतकीय बहादुरी ने बनाया टेस्ट ड्रॉ, सीरीज अब भी इंग्लैंड 2‑1 से आगे

मैनचेस्टर मुकाबले की शुरुआत और दबाव
मंगलवार 27 जुलाई 2025 को खेले गए चौथे टेस्ट में इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में 669 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया, जो टेस्ट क्रिकेट में उनका पांचवां सर्वोच्च है । इसके बाद भारत दूसरी पारी में 311 रन की बड़े झटके से पीछे था और विकेट क्रीज पर लगे दोनों विकेट बिना कोई रन बने गिर गए—यानि 0/2 पर शुरुआत हुई । यशस्वी जायसवाल जल्दी आउट हो गए, जिससे भारत की मुश्किल और बढ़ गई थी ।
शुभमन गिल और केएल राहुल की साझेदारी ने सुराग दिखाया
इस बैकफुट स्थिति में कप्तान शुभमन गिल (103) और केएल राहुल (90) ने भारत की पारी को संभाला। चौथे दिन के दूसरे और तीसरे सेशन में इस साझेदारी ने भारतीय टीम को स्थिरता दी और इंग्लैंड की उम्मीदों पर अंकुश लगाया—184 रनों की साझेदारी तीसरे विकेट पर बनी, जिसमें राहुल ने 39.13 की स्ट्राइक रेट से खेला, गिल ने 43.3 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए ।
शुभमन गिल ने इस श्रृंखला में चौथा शतक जड़कर एक रिकॉर्ड स्थापित किया, जो डॉन ब्रैडमैन और सुनील गावस्कर जैसे दिग्गजों की उपलब्धियों के बराबर है । हालांकि Lunch के ठीक पहले Archer की गेंद ने उन्हें आउट कर दिया ।
राहुल भी एक यादगार 90 रन की पारी खेलते हुए आउट हुए, जिससे कि score 222/4 हो गया और भारतीय टीम फिर से दबाव में आ गई ।
जडेजा–सुंदर की वीरता: ड्रॉ की कहानी बदल दी
यहां से रवींद्र जडेजा (107)* और वॉशिंगटन सुंदर (101)* ने क्रीज पर खून-पसीना बहाते हुए 203 रनों की नाबाद साझेदारी कर मैच बचाया । जो रूट का विकेट छोड़ना—अर्थात जडेजा का कैच छोड़ना—फैसला भारतीय टीम को भारी पड़ा, क्योंकि इससे जडेजा को दूसरा मौका मिला और उन्होंने उसे पूरी तरह भुनाया ।
पांचवें दिन दूसरे सेशन में कोई और विकेट नहीं गिरा और टीम 425/4 पर पहुँच गई, जिससे ड्रॉ सुरक्षित हुआ । इंग्लैंड की वापसी की कोशिशें—ताकि वे जीत की दिशा में जा सकें—बिना कामयाब रहीं, क्योंकि लीडिंग भारतीय बल्लेबाजों ने लगातार रनों की बारिश की ।
ड्रॉ से निकल कर एक मानसिक जीत
हालांकि मैच ड्रॉ हुआ, पर यह भारत के लिए मानसिक जीत से कम नहीं थी। इंग्लैंड की जीत की उम्मीदें धरी की धरी रह गईं—भारतीय चौकड़ी ने इंग्लैंड की टक्कर बराबर की, और उन्हें मैदान पर दबाव महसूस कराया ।
इस मुकाबले का ड्रॉ इंग्लैंड के लिए निराशाजनक रहा। मैच की अंतिम घंटों में इंग्लैंड के कप्तान बेनेडिक्ट स्टोक्स ने ड्रॉ के लिए हैंडशेक का ऑफर दिया, लेकिन जडेजा और सुंदर ने अपने शतकों को पूरा करने के लिए बल्लेबाजी जारी रखी—इस निर्णय को लेकर स्टोक्स ने भारी आलोचना की, जबकि गिल ने स्पष्ट किया कि “एक टेस्ट शतक तो टेस्ट शतक होता है” ।
इसके बावजूद अंतिम तक तनाव बना रहा—अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल भावना और व्यक्तिगत उपलब्धियों में संतुलन के इस विकल्प ने दर्शकों का ध्यान खींचा ।
भारत की चार बल्लेबाजों ने जो मिसाल कायम की
शुभमन गिल
- कप्तानी की चुनौती और शारीरिक असुविधा के बीच शानदार 103 रन की पारी।
- यह उनका चौथा शतक था, जो किसी सीरीज में इतनी बार शतक जड़ने की दुर्लभ उपलब्धि है ।
केएल राहुल
- 90 रनों की संयमित पारी, खराब गेंदों पर जोखिम लेकर रन बनाए।
- गिल के साथ तीसरे विकेट पर 188 रन की अहम साझेदारी निभाई ।
रवींद्र जडेजा
- कैच छोड़ने वाले मौके को अपनी ताकत बनाया और 107* रनों की नाबाद पारी खेली।
- इंग्लिश टीम पर धैर्यपूर्वक दबाव बनाए रखा ।
वॉशिंगटन सुंदर
- शांतचित्त पारी खेलते हुए अपना पहला टेस्ट शतक (101)* जड़ा।
- जडेजा के साथ मिलकर 203 रन की साझेदारी से मैच बचाया ।
अब ओवल टेस्ट की बारी: उम्मीदों में जान
इस नतीजे के साथ अब सीरीज 2‑1 से इंग्लैंड की बढ़त पर है, लेकिन भारत आन्दोलन बना हुआ है—अंतिम टेस्ट 31 जुलाई से ओवल, लंदन में शुरू होगा, जहाँ इंडिया के पास इस सीरीज को बराबर करने का मौका है ।
निष्कर्ष: यादगार भारत की चार की चौकड़ी
यह मैच भारतीय क्रिकेट के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गया है।
- गिल, राहुल, जडेजा, सुंदर की जोड़ी ने संयुक्त रूप से भारत की उम्मीदों को बचाया।
- इंग्लिश टीम ने पहले पारी में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन इन चारों की बल्लेबाजी ने इंग्लैंड की जीत की चेष्टा को व्यर्थ कर दिया।
भारतीय टीनएज कप्तान गिल की कप्तानी में यह चौकड़ी न सिर्फ शतकीय पारियों के लिए, बल्कि मानसिक दृढ़ता और संयम के लिए भी याद रखी जाएगी। फैन्स इस उत्साह भरे संघर्ष और स्किल को बहुत समय तक याद रखेंगे—यह टेस्ट ड्रॉ था, लेकिन मानसिक जीत खुद ही जीत से कहीं ऊपर रही।

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