वेतन की पारदर्शिता: भारतीय नौकरी की पोस्टिंग में वेतन का खुलासा बढ़ रहा है

बेंगलुरु – इनडीड की नई रिपोर्ट के अनुसार अब विभिन्न पदों के विज्ञापनों में सैलरी की जानकारी दी जा रही है। लेकिन भले ही यह पारदर्शिता लगातार बढ़ रही हो, फिर भी कुछ सेक्टर्स और पदों के लिए सैलरी की जानकारी अभी भी पूरी तरह नहीं दी जाती।

भारत में नौकरियों के विज्ञापनों में सैलरी की जानकारी अब एक अहम हिस्सा बनती जा रही है। वर्ष 2025 की शुरुआत में इनडीड इंडिया पर सैलरी दिखाने वाली जॉब पोस्टिंग की संख्या 50% से ज़्यादा हो गई है, जो मार्च 2022 में सिर्फ 26% थी और 2023 के अंत तक 47% तक पहुंची थी। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह है नौकरी चाहने वाले, जो साफ़ जानकारी, बराबरी और समझदारी से फैसला लेना पसंद करते हैं।

इनडीड इंडिया के सेल्स प्रमुख शशि कुमार ने बताया कि, “जल्दी सैलरी बताना अब टैलेंट को आकर्षित करने का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है, लेकिन सैलरी को पारदर्शी बनाने के लिए अभी और काम करना बाकी है। पहले सैलरी बताना सिर्फ एक अच्छी बात मानी जाती थी, लेकिन अब यह मॉडर्न कंपनियों की पहचान बनती जा रही है। आज की इस प्रतिस्पर्धा वाली दुनिया में पारदर्शिता ही टैलेंट को आकर्षित करने का नया और बेहतर तरीका है।”

रिमोट जॉब्स और जूनियर से मिड-लेवल की नौकरियां सबसे ज्यादा सैलरी की जानकारी देने वाली होती हैं।

इनडीड पर हुए एक हाल के सर्वे के अनुसार, रिमोट और हाइब्रिड नौकरियों में सैलरी की जानकारी देना आम बात हो गई है। आंकड़े बताते हैं कि अब इन नौकरियों के ज्यादातर विज्ञापनों में सैलरी की जानकारी दी जाती है।

क्योंकि रिमोट और हाइब्रिड नौकरियों के लिए अलग-अलग जगहों के लोग आवेदन करते हैं, इसलिए सैलरी की पहले से दी गई जानकारी कंपनियों के लिए बहुत जरूरी है। इससे वे अलग-अलग इलाकों से अच्छे और योग्य लोगों तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

सैलरी की पारदर्शिता नौकरी के स्तर के हिसाब से भी काफी अलग-अलग होती है। सीनियर लीडरशिप की नौकरियों में सबसे कम सैलरी बताई जाती है। सिर्फ 13% पोस्टिंग में ही सैलरी की जानकारी होती है। वहीं जूनियर और मिड-लेवल की नौकरियों में सबसे ज्यादा पारदर्शिता होती है, जिनमें 32% पोस्टिंग में सैलरी बताई जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन पदों के लिए ज़्यादा लोग आवेदन करते हैं, और पहले से सैलरी बताने से कंपनियों को सही उम्मीदवारों को जल्दी चुनने में मदद मिलती है। इसके बाद एंट्री-लेवल की नौकरियां आती हैं, जिनमें 28% पोस्टिंग में सैलरी बताई जाती है। यह दिखाता है कि कंपनियां अब ऐसे युवाओं को ध्यान में रखकर काम कर रही हैं, जो पारदर्शिता को ज़्यादा पसंद करते हैं।

सैलरी की पारदर्शिता में आगे रहने वाले सेक्टर

अब कई सेक्टर सैलरी की पारदर्शिता को अपनाने लगे हैं, खासकर आईटी प्रोडक्ट्स और सर्विसेज, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (बीएफएसआई), कंसल्टिंग, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और फार्मा, और कंज्यूमर गुड्स व रिटेल जैसे क्षेत्र। इन सेक्टर में अब 35% से ज्यादा नौकरी के विज्ञापनों में सैलरी की जानकारी दी जाती है। कंपनियों के नजरिए से देखें तो यह बदलाव उन्हें जल्दी भर्ती करने, बेहतर उम्मीदवार चुनने और आज के कठिन लेबर मार्केट में आगे बने रहने में मदद कर रहा है।

इनडीड के डेटा के मुताबिक, 62% नौकरी चाहने वाले उन्हीं जॉब लिस्टिंग को पसंद करते हैं, जिनमें सैलरी की जानकारी होती है। जिन विज्ञापनों में सैलरी बताई जाती है, उन्हें ज़्यादा क्लिक, सेव किया जाता है, साथ ही उन्हें अच्छे उम्मीदवार मिलते हैं, जिससे यह साफ होता है कि टैलेंट को आकर्षित करने में पारदर्शिता अब बहुत जरूरी बन गई है।

विधि

यह विश्लेषण मार्च 2022 से जून 2025 के बीच इनडीड इंडिया पर प्रकाशित नौकरियों की पोस्टिंग पर आधारित है। यह सर्वे वैल्यूवॉक्स द्वारा 1,157 नियोक्ताओं और 2,559 नौकरी के इच्छुकों और कर्मचारियों के बीच किया गया।

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