health – FNNNewsHindi https://fnnnewshindi.com Thu, 19 Mar 2026 09:28:37 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 https://fnnnewshindi.com/wp-content/uploads/2023/08/favicon-150x150.png health – FNNNewsHindi https://fnnnewshindi.com 32 32 224877080 ज़ायडस ने अस्थमा और सीओपीडी मरीजों के लिए इनहेलर उपयोग को आसान बनाने हेतु एयरोलाइफ मिनी™ लॉन्च किया https://fnnnewshindi.com/zydus-launches-aerolife-mini-to-simplify-inhaler-use-for-asthma-and-copd-patients/ https://fnnnewshindi.com/zydus-launches-aerolife-mini-to-simplify-inhaler-use-for-asthma-and-copd-patients/#comments Thu, 19 Mar 2026 09:28:27 +0000 https://fnnnewshindi.com/?p=10975
  • एयरोलाइफ मिनी™ एक अभिनव ड्रग-डिवाइस आधारित इनहेलर, को एयरोडेल टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के साथ विशेष लाइसेंसिंग समझौते के तहत लॉन्च किया गया है।
  • यह लॉन्च भारत के पहले फोल्डेबल नेक्स्ट-जनरेशन प्रेशराइज़्ड मीटर्ड-डोज़ इनहेलर एन्हांसर की शुरुआत को दर्शाता है।

नई दिल्ली 19 मार्च 2026: ज़ायडस लाइफ साइंसेज लिमिटेड (“ज़ायडस”), एक नवाचार-प्रेरित लाइफ-साइंसेज़ कंपनी, ने एयरोलाइफ मिनी™ लॉन्च किया है।जो अगली पीढ़ी का प्रेशराइज़्ड मीटर्ड-डोज़ इनहेलर है। यह लॉन्च श्वसन देखभाल में ड्रग-डिवाइस आधारित नवाचार को आगे बढ़ाने की कंपनी की रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है। एयरोलाइफ मिनी™ भारत का पहला पोर्टेबल और फोल्डेबल एन्हांसर है, जो इसे उपयोग में बेहद सुविधाजनक बनाता है। ज़ायडस ने इस डिवाइस को एयरोडेल टेक्नोलॉजी इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक एक्सक्लूसिव लाइसेंसिंग व्यवस्था के तहत पेश किया है।

भारत में अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ और ब्रोंकिएक्टेसिस जैसी क्रॉनिक श्वसन बीमारियों का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। इसके प्रमुख कारणों में बढ़ता वायु प्रदूषण, धूम्रपान, बार-बार संक्रमण और देर से निदान शामिल हैं। लाखों मरीज लक्षणों को नियंत्रित करने, बीमारी के बढ़ने को रोकने और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए लंबे समय तक इनहेल्ड थेरेपी पर निर्भर रहते हैं।
हालांकि, इनहेल्ड दवाएं उपचार का मुख्य आधार हैं, लेकिन दवा को फेफड़ों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। वास्तविक जीवन के अध्ययनों से पता चलता है कि लगभग 94% मरीज इनहेलर के उपयोग में कम से कम एक गंभीर गलती करते हैं, जिससे दवा की हानि होती है और उपचार का लाभ कम हो जाता है। स्पेसर डिवाइस,प्रेशराइज़्ड मीटर्ड-डोज़ इनहेलर के माध्यम से दी जाने वाली दवाओं की फेफड़ों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने में मदद करते हैं, क्योंकि वे कोऑर्डिनेशन की गलतियों को कम करते हैं। हालांकि, स्पेसर डिवाइस का वर्तमान बाजार काफी हद तक समान (undifferentiated) है, जहां अधिकांश उत्पाद भारी और बड़े आकार के होते हैं, जिससे उन्हें रोज़ाना साथ ले जाना मुश्किल होता है। इसके अलावा, बार-बार असेंबली की आवश्यकता गलत उपयोग और कम अनुपालन का जोखिम बढ़ाती है, खासकर घर से बाहर। एयरोलाइफ मिनी™ एक कॉम्पैक्ट, फोल्डेबल और रेडी-टू-यूज़ डिज़ाइन के साथ आता है, जो स्पेसर के उपयोग को पूरी तरह से नया रूप देता है। यह डिवाइस बेहतर दवा डिलीवरी, मरीजों की अनुपालन दर में सुधार, आत्मविश्वास बढ़ाने और अधिक सुविधा प्रदान करने की उम्मीद रखता है। यह पहल ज़ायडस की दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य मरीज-केंद्रित ड्रग-डिवाइस नवाचार के माध्यम से टिकाऊ और अलग पहचान वाले रेस्पिरेटरी पोर्टफोलियो का निर्माण करना है।

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निपाह वायरस: कारण, लक्षण, बचाव और क्यों यह आज भी एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य खतरा है https://fnnnewshindi.com/nipah-virus/ https://fnnnewshindi.com/nipah-virus/#comments Thu, 29 Jan 2026 06:18:51 +0000 https://fnnnewshindi.com/?p=10410

निपाह वायरस (Nipah Virus – NiV) एक अत्यंत खतरनाक और जानलेवा ज़ूनोटिक वायरस है, जिसने विशेष रूप से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में कई बार सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता पैदा की है। इसकी पहली पहचान वर्ष 1998 में मलेशिया में सूअर पालकों के बीच हुए एक प्रकोप के दौरान हुई थी। इसके बाद भारत, बांग्लादेश और सिंगापुर जैसे देशों में इसके कई मामले सामने आए, जिनमें मृत्यु दर काफी अधिक रही।

जानवरों से इंसानों में और इंसानों के बीच फैलने की क्षमता के कारण निपाह वायरस को वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां अत्यंत गंभीर खतरे के रूप में देखती हैं।

निपाह वायरस क्या है?

निपाह वायरस पैरामिक्सोविरिडी (Paramyxoviridae) परिवार के हेनिपावायरस (Henipavirus) वंश से संबंधित है। इसका प्राकृतिक वाहक फल खाने वाली चमगादड़ (Pteropus प्रजाति) हैं, जिन्हें आमतौर पर फ्लाइंग फॉक्स कहा जाता है। ये चमगादड़ स्वयं बीमार नहीं होतीं, लेकिन वायरस को मनुष्यों तक पहुंचा सकती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने निपाह वायरस को प्राथमिकता वाले रोगजनकों की सूची में शामिल किया है, क्योंकि इसकी मृत्यु दर बहुत अधिक है और इसका कोई निश्चित इलाज या टीका उपलब्ध नहीं है।

निपाह वायरस कैसे फैलता है?

निपाह वायरस निम्नलिखित तरीकों से फैल सकता है:

  1. जानवरों से मनुष्यों में संक्रमण
    संक्रमित चमगादड़ों, सूअरों या अन्य जानवरों के सीधे संपर्क से संक्रमण हो सकता है। चमगादड़ों की लार या मूत्र से दूषित फल या कच्चा खजूर का रस पीने से भी संक्रमण का खतरा रहता है।
  2. मानव से मानव में संक्रमण
    संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से, विशेष रूप से उसकी लार, श्वसन बूंदों, रक्त या मूत्र के संपर्क से वायरस फैल सकता है। भारत और बांग्लादेश में कई मामलों में अस्पतालों के भीतर संक्रमण फैलने के प्रमाण मिले हैं।
  3. दूषित खाद्य पदार्थ
    बिना धोए फल या ऐसे पेय पदार्थ जो चमगादड़ों के संपर्क में आए हों, संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

निपाह वायरस के लक्षण

निपाह वायरस का संक्रमण हल्के लक्षणों से लेकर गंभीर और जानलेवा बीमारी तक हो सकता है। इसके लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 4 से 14 दिन बाद दिखाई देते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • बुखार
  • सिरदर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • उल्टी
  • गले में खराश

गंभीर मामलों में स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है और निम्न समस्याएं हो सकती हैं:

  • तीव्र श्वसन संकट
  • एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क में सूजन)
  • भ्रम और मानसिक असंतुलन
  • दौरे पड़ना
  • कोमा

निपाह वायरस की मृत्यु दर 40% से 75% तक हो सकती है, जो प्रकोप और इलाज की व्यवस्था पर निर्भर करती है।

जांच और इलाज

निपाह वायरस की पुष्टि के लिए RT-PCR, ELISA और वायरस आइसोलेशन जैसी प्रयोगशाला जांच की जाती है। इसकी जांच केवल उच्च सुरक्षा वाली प्रयोगशालाओं में ही की जाती है।

फिलहाल निपाह वायरस का कोई विशेष इलाज या स्वीकृत टीका उपलब्ध नहीं है। इलाज मुख्य रूप से सहायक उपचार पर आधारित होता है, जिसमें शामिल हैं:

  • आईसीयू में निगरानी
  • श्वसन सहायता
  • तंत्रिका तंत्र से जुड़े लक्षणों का उपचार

समय पर पहचान और संक्रमित व्यक्ति को अलग रखना संक्रमण को फैलने से रोकने में बेहद महत्वपूर्ण है।

बचाव और नियंत्रण के उपाय

चूंकि इसका कोई टीका नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। मुख्य सावधानियां इस प्रकार हैं:

  • कच्चा या बिना प्रोसेस किया हुआ खजूर का रस न पीएं
  • फलों को अच्छी तरह धोकर ही सेवन करें
  • बीमार जानवरों से दूरी बनाए रखें
  • संक्रमित व्यक्ति की देखभाल करते समय सुरक्षा उपकरण (PPE) का उपयोग करें
  • अस्पतालों में सख्त संक्रमण नियंत्रण नियम अपनाएं

जन जागरूकता और तेज़ सरकारी कार्रवाई से प्रकोप को नियंत्रित किया जा सकता है।

भारत में निपाह वायरस

भारत में निपाह वायरस के कई मामले सामने आए हैं, विशेष रूप से केरल में। यहां मजबूत निगरानी प्रणाली और त्वरित स्वास्थ्य प्रतिक्रिया के कारण संक्रमण को फैलने से रोका गया। यह दिखाता है कि तैयारी और समुदाय का सहयोग कितना जरूरी है।

निपाह वायरस क्यों है वैश्विक चिंता?

निपाह वायरस की सबसे बड़ी चिंता इसकी महामारी बनने की क्षमता है। यह वायरस सांस के जरिए फैल सकता है, इसमें बदलाव (म्यूटेशन) की संभावना रहती है और इसका कोई पुख्ता इलाज नहीं है। बढ़ता शहरीकरण, जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन इंसानों और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ा रहे हैं, जिससे ऐसे वायरस फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है।

निष्कर्ष

निपाह वायरस हमें प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन की अहमियत याद दिलाता है। भले ही इसके प्रकोप सीमित रहे हों, लेकिन इसकी गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मजबूत निगरानी, वैज्ञानिक शोध में निवेश और लोगों को जागरूक करना भविष्य में ऐसे खतरों से निपटने के लिए बेहद जरूरी है।

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इंदौर जल प्रदूषण त्रासदी: मौतें और बीमारियां नागरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर रही हैं। https://fnnnewshindi.com/indore-water-contamination-tragedy-deaths-and-illness-spark-serious-concerns-over-civic-safety/ https://fnnnewshindi.com/indore-water-contamination-tragedy-deaths-and-illness-spark-serious-concerns-over-civic-safety/#comments Fri, 02 Jan 2026 07:35:25 +0000 https://fnnnewshindi.com/?p=9946

इंदौर, एक ऐसा शहर जिसे अक्सर अपनी साफ़-सफ़ाई और शहरी मैनेजमेंट के लिए सराहा जाता है, अभी दूषित पीने के पानी की वजह से एक गंभीर पब्लिक हेल्थ संकट से जूझ रहा है, जिससे कई मौतें हुई हैं और बड़ी संख्या में लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। यह घटना, जो मुख्य रूप से भागीरथपुरा इलाके से सामने आई है, ने बड़े पैमाने पर डर, गुस्सा और नागरिक जवाबदेही और पानी की सुरक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में ज़रूरी सवाल खड़े कर दिए हैं।

महामारी ने शहर को चौंका दिया

यह संकट तब सामने आया जब भागीरथपुरा और आस-पास के इलाकों के निवासियों ने गंभीर दस्त, उल्टी, बुखार, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षणों की शिकायत करना शुरू किया। बहुत कम समय में, इंदौर के अस्पतालों में इसी तरह की शिकायतों वाले मरीज़ों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी गई।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आठ लोगों की जान चली गई है, जबकि 149 से ज़्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई अन्य लोगों को अधिकारियों द्वारा लगाए गए अस्थायी स्वास्थ्य शिविरों में आउटपेशेंट इलाज या मेडिकल देखभाल मिली। मेडिकल प्रोफेशनल्स ने पुष्टि की कि कई मरीज़ों को गंभीर डिहाइड्रेशन के कारण तुरंत इंट्रावेनस फ्लूइड्स की ज़रूरत थी।

कारण: पीने के पानी में सीवेज का मिलना

शुरुआती जांच में पता चला कि यह बीमारी नगर निगम के पीने के पानी की सप्लाई में सीवेज के दूषित होने के कारण फैली थी। अधिकारियों को शक है कि एक भूमिगत पाइपलाइन में लीकेज के कारण नाले का पानी पीने के पानी में मिल गया, जिससे हज़ारों निवासी खतरनाक बैक्टीरिया के संपर्क में आ गए।

कुछ इलाकों में, निवासियों ने बताया कि लोगों के बीमार पड़ने से कुछ दिन पहले ही नल का पानी बदरंग, बदबूदार और स्वाद में अजीब लग रहा था। शुरुआती शिकायतों के बावजूद, कथित तौर पर सुधार के लिए कार्रवाई में देरी हुई, जिससे प्रदूषण और फैल गया।

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने पुष्टि की कि पानी के नमूनों में हानिकारक बैक्टीरिया पाए गए हैं जो आमतौर पर पानी से होने वाली बीमारियों से जुड़े होते हैं।

अस्पताल भरे हुए, इमरजेंसी रिस्पॉन्स एक्टिवेट किया गया

जैसे-जैसे स्थिति बिगड़ी, सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया। इमरजेंसी वार्ड बढ़ाए गए, अतिरिक्त डॉक्टरों को तैनात किया गया, और मेडिकल टीमें मरीज़ों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही थीं।

प्रभावित इलाकों में ORS पैकेट, एंटीबायोटिक्स और शुरुआती जांच के लिए अस्थायी मेडिकल कैंप लगाए गए। गंभीर मरीज़ों को तेज़ी से अस्पताल पहुंचाने के लिए संवेदनशील इलाकों में एम्बुलेंस तैनात रहीं।

अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में पानी की सप्लाई भी बंद कर दी और टैंकरों के ज़रिए वैकल्पिक पीने के पानी की व्यवस्था की। आगे प्रदूषण को रोकने के लिए पाइपलाइन की सफ़ाई और कीटाणुशोधन अभियान शुरू किए गए।

मौतों ने लापरवाही पर सवाल उठाए

बच्चों और बुज़ुर्गों जैसे कमज़ोर लोगों सहित जानमाल के नुकसान ने जनता के गुस्से को और बढ़ा दिया है। पीड़ितों के परिवारों का आरोप है कि पानी की गुणवत्ता के बारे में बार-बार की गई शिकायतों को नज़रअंदाज़ किया गया, जिससे प्रशासनिक लापरवाही के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं।

कई घरों ने बताया कि एक ही समय में परिवार के कई सदस्य बीमार पड़ गए, जिससे भावनात्मक और आर्थिक बोझ और बढ़ गया। भागीरथपुरा की सड़कें सुनसान लग रही थीं, क्योंकि निवासी या तो मेडिकल मदद ले रहे थे या आगे संक्रमण के डर से घरों के अंदर रह रहे थे।

सरकारी कार्रवाई और मुआवज़ा

इस दुखद घटना के जवाब में, मध्य प्रदेश सरकार ने मरने वालों के परिवारों के लिए ₹2 लाख के वित्तीय मुआवज़े की घोषणा की। राज्य ने सभी प्रभावित लोगों के लिए मुफ्त मेडिकल इलाज का भी आश्वासन दिया।

इंदौर नगर निगम ने प्रभावित इलाके में पानी की सप्लाई के रखरखाव के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों, जिसमें एक ज़ोनल अधिकारी और एक असिस्टेंट इंजीनियर शामिल थे, को सस्पेंड करके और हटाकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की।

घटना की जांच करने, कमियों की पहचान करने और सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करने के लिए एक उच्च-स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि लापरवाही के दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

NHRC ने दखल दिया

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया है और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने उन रिपोर्टों पर प्रकाश डाला है जिनमें कहा गया है कि निवासियों ने प्रकोप से काफी पहले दूषित पानी के बारे में शिकायत की थी, लेकिन उन्हें समय पर कोई जवाब नहीं मिला।

NHRC ने घटना पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें दोबारा ऐसी घटना न हो इसके लिए उठाए गए कदम और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उपाय शामिल हैं।

राजनीतिक और सार्वजनिक प्रतिक्रिया

इस दुखद घटना ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिसमें विपक्षी नेताओं ने प्रशासन पर बुनियादी नागरिक सुविधाओं की सुरक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। कुछ इलाकों में विरोध प्रदर्शन और धरने की खबरें आईं, जिसमें निवासियों ने अस्थायी राहत के बजाय स्थायी समाधान की मांग की।

नगर निगम प्रणालियों में जनता का विश्वास कम हुआ है, खासकर ऐसे शहर में जो राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता रैंकिंग के लिए जाना जाता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो और पोस्ट की बाढ़ आ गई है जो निवासियों के गुस्से और डर को उजागर करते हैं।

स्वास्थ्य सलाह जारी

स्वास्थ्य अधिकारियों ने निवासियों से अगली सूचना तक नल का पानी पीने से बचने का आग्रह किया है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे पानी को उबालकर इस्तेमाल करें, जहां संभव हो पैकेट बंद पानी पर निर्भर रहें और सख्त स्वच्छता बनाए रखें।

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लगातार दस्त, उल्टी, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए और इसके लिए तुरंत मेडिकल मदद की ज़रूरत है।

शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक वेक-अप कॉल

इंदौर पानी में मिलावट की त्रासदी इस बात की कड़ी याद दिलाती है कि शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर की विफलताएं तेज़ी से जानलेवा इमरजेंसी में बदल सकती हैं। एक्सपर्ट्स रेगुलर पाइपलाइन इंस्पेक्शन, रियल-टाइम पानी की क्वालिटी की निगरानी और नागरिकों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हैं।

जैसे-जैसे जांच जारी है, निवासियों को उम्मीद है कि जवाबदेही, पारदर्शिता और स्ट्रक्चरल सुधार होंगे – यह सुनिश्चित करते हुए कि ऐसी त्रासदी दोबारा कभी न हो।

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ताहिरा कश्‍यप खुराना ने दिल्‍ली में एम | ओ | सी के पहले नेबरहुड कैंसर केयर एंड रिसर्च सेंटर का उद्घाटन किया https://fnnnewshindi.com/tahira-kashyap-khurana-inaugurates-m-o-cs-first-neighbourhood-cancer-treatment-facility-in-delhi/ https://fnnnewshindi.com/tahira-kashyap-khurana-inaugurates-m-o-cs-first-neighbourhood-cancer-treatment-facility-in-delhi/#comments Mon, 08 Dec 2025 06:52:54 +0000 https://fnnnewshindi.com/?p=9560

भारत की सबसे बड़ी नेबरहुड कैंसर-केयर चेन ने राजधानी में किफायती और सुलभ ऑन्कोलॉजी सेवाओं की शुरुआत की

नई दिल्ली, 7 दिसंबर 2025:
एम | ओ | सी कैंसर केयर एंड रिसर्च सेंटर — जिसे देश भर में सबसे बड़े नेबरहुड कैंसर-केयर नेटवर्क के रूप में जाना जाता है — ने दिल्ली के लाजपत नगर में अपना पहला सेंटर शुरू कर दिया है। इस मौके पर लेखिका और फिल्म निर्माता ताहिरा कश्यप खुराना मौजूद रहीं। दिल्ली-एनसीआर के नामी ऑन्कोलॉजिस्ट, हेल्थकेयर विशेषज्ञ और कई समुदाय प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

इस लॉन्च के साथ एम | ओ | सी अब अस्पतालों की भागदौड़ और लंबी दूरी की दिक्कतों से जूझ रहे मरीज़ों को घर के पास, आसान और भरोसेमंद कैंसर इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। यह सेंटर पूरे भारत में संगठन के 25 सफल केंद्रों के बाद दिल्ली में प्रवेश का प्रतीक है।

लाजपत नगर III में रिंग रोड पर स्थित, यह सेंटर मरीज़ों को एक आरामदायक डे-केयर माहौल में कीमोथैरेपी, इम्यूनोथैरेपी, डायग्‍नोस्टिक्‍स, परामर्श और कैशलेस बीमा सुविधाएं जैसी सेवाएं प्रदान करता है। इस मॉडल की खासियत है कि मरीज़ों को लंबी हॉस्पिटल भर्ती की ज़रूरत नहीं पड़ती, जिससे समय, पैसा और मानसिक तनाव—तीनों में ही राहत मिलती है।

आईसीएमआर-एनसीआरपी 2024 के मुताबिक, साल 2024 में देश में 15.3 लाख से ज़्यादा नए कैंसर मामले दर्ज हुए थे और 2030 तक यह संख्या बढ़कर 18 लाख तक पहुँच सकती है। दिल्ली जैसे बड़े शहरों में प्रदूषण, जीवनशैली, तंबाकू सेवन और समय पर स्क्रीनिंग न होने की वजह से ब्रेस्ट, फेफड़े, मौखिक, कोलोरेक्टल और सर्वाइकल कैंसर ज्यादा पाए जाते हैं। ऐसे में पड़ोस-स्तर पर कैंसर केयर की व्यवस्था अब ज़रूरी हो गई है

पारंपरिक तौर पर बड़े अस्पतालों में भीड़, लंबा इंतज़ार और इंफेक्शन का खतरा ज़्यादा रहता है। ऐसे में एम | ओ | सी जैसे नेबरहुड ऑन्कोलॉजी सेंटर लोगों को घर के पास ही एक सुरक्षित, तेज और मरीज़-केंद्रित इलाज का बेहतर विकल्प देते हैं। इससे मरीजों को बिना झंझट के उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल आसानी से मिल जाती है।

आदित्य बहादुर, चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर– नॉर्थ इंडिया, एम | ओ | सी कैंसर केयर एंड रिसर्च सेंटर, ने कहा, “दिल्ली में कैंसर के बहुत ज़्यादा मामले हैं। अक्सर मरीज़ों को इलाज के लिए लंबी यात्रा करनी पड़ती है या बड़े और उलझे हुए अस्पतालों में समय बर्बाद करना पड़ता है। लाजपत नगर में हमारा यह नया सेंटर दिखाता है कि हम कैंसर के इलाज को आसान, सस्ता और मरीज़ों के लिए सुविधाजनक बनाना चाहते हैं। हम नई तकनीक वाले इन छोटे, पड़ोस के केंद्रों के ज़रिए इलाज को लोगों के करीब ला रहे हैं। इससे हमारा लक्ष्य है कि मरीज़ों को सही समय पर इलाज मिले, बड़े अस्पतालों पर भीड़ कम हो, और उनका अनुभव बेहतर हो। यह शुरुआत उत्तर भारत में एक मजबूत नेटवर्क बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।”

डॉ. रमन नारंग, ऑन्कोलॉजिस्ट, एम | ओ | सी दिल्ली, ने कहा, “हमारा लक्ष्य कैंसर के उपचार को न केवल चिकित्सकीय रूप से प्रभावी बनाना है, बल्कि भावनात्मक रूप से सहायक भी बनाना है। इस केंद्र के साथ, मरीजों को अब भीड़-भाड़ वाले अस्पतालों में भटकने या नियमित उपचार के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं है। वे अब अपने पड़ोस में ही — पूरी तरह से ऑन्कोलॉजी को समर्पित एक सुविधा में — सुरक्षित, उच्च-गुणवत्ता वाली देखभाल प्राप्त कर सकते हैं।”

डॉ. निखिल हिमथानी, ऑन्कोलॉजिस्ट, एम | ओ | सी दिल्ली, ने कहा: “कैंसर केयर समय पर, सटीक और सहानुभूति में होनी चाहिए। ऑन्कोलॉजी पर हमारा विशेष ध्यान यह सुनिश्चित करता है कि हमारी क्लिनिकल टीम का प्रत्येक सदस्य कैंसर रोगियों की अनूठी जरूरतों के अनुरूप है। यह केंद्र परिवारों पर पड़ने वाले बोझ को काफी कम करेगा और राजधानी भर में उपचार के परिणामों में सुधार करेगा।”

उद्घाटन करने वाले मुख्य कैंसर डॉक्टरों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह सेंटर सिर्फ कैंसर के इलाज के लिए बना है, इसलिए इसका बहुत खास महत्व है। यहाँ डॉक्टर, नर्स और सहायक कर्मचारी खास तौर पर प्रशिक्षित हैं। वे कैंसर की बीमारी से जुड़ी दिक्कतों के साथ-साथ मरीज़ों की भावनात्मक ज़रूरतों को भी अच्छे से समझते हैं और संभालते हैं। कीमोथैरेपी और इम्यूनोथैरेपी जैसे इलाज अब अस्पताल में भर्ती हुए बिना भी सुरक्षित रूप से दिए जा सकते हैं। इससे मरीज़ों को शांत माहौल मिलता है और उनकी देखभाल ज़्यादा व्यक्तिगत तरीके से हो पाती है।

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अमृता हॉस्पिटल में चल रहे ए.एम.आर नैक्स्ट 2025 में नेशनल और ग्लोबल एक्सपर्ट्स ने बढ़ते ड्रग रज़िस्टैंस के खतरे से निपटने का आह्वान किया https://fnnnewshindi.com/national-and-global-experts-call-for-tackling-the-threat-of-increasing-drug-resistance-in-amr-next-2025-ongoing-at-amrita-hospital/ https://fnnnewshindi.com/national-and-global-experts-call-for-tackling-the-threat-of-increasing-drug-resistance-in-amr-next-2025-ongoing-at-amrita-hospital/#comments Mon, 01 Dec 2025 02:42:36 +0000 https://fnnnewshindi.com/?p=9449

भारत में ए.एम.आर से निपटने की तैयारी के लिए इस दो दिवसीय सम्मेलन में ग्लोबल हैल्थ लीडर्स, नीतिनिर्माताओं, वैज्ञानिकों और इनोवेटर्स ने हिस्सा लिया है

दिल्ली एनसीआर, 29 नवंबर, 2025 – अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद में ए.एम.आर नैक्स्ट 2025 – ‘‘ट्रांसफॉर्मेटिव स्ट्रेट्जीज़ टू टैकल एंटीमाईक्रोबियल रज़िस्टैंस फॉर ए सेफर टुमॉरो’’ (सुरक्षित भविष्य के लिए एंटीमाईक्रोबियल रज़िस्टैंस से निपटने की रणनीति) विषय पर एक दो दिवसीय सम्मेलन चल रहा है। तेजी से बढ़ते एंटीमाईक्रोबियल रज़िस्टैंस (ए.एम.आर) द्वारा दशकों की मेडिकल प्रगति को उत्पन्न हो रहे खतरे से निपटने के लिए इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन 29 और 30 नवंबर, 2025 को किया गया है, जिसमें सरकार, जनस्वास्थ्य, शिक्षा जगत, बायोटेक्नोलॉजी और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के दिग्गज हिस्सा ले रहे हैं। इस सम्मेलन का उद्देश्य मनुष्यों, जीव-जंतुओं और पर्यावरण को स्वस्थ रखने के लिए भारत में नीति निर्माण, निगरानी और इनोवेशन में तेजी लाना है।

भारत बैक्टीरियल संक्रमण के सबसे अधिक भार वाले देशों में शामिल है। नेशनल ए.एम.आर सर्वियलेंस के आँकड़ों में ई.कोली, क्लेबसियेला निमोनिए, स्टेफीलोकोकस ऑरियस और एसिनेटोबैक्टर बॉमानी जैसे पैथोजंस में चिंताजनक रज़िस्टैंस देखने में आया है।

आईसीएमआर के नए आँकड़ों के मुताबिक ई.कोली के खिलाफ सेफ्टाज़िडाईम की प्रभावशीलता में कुछ सुधार (साल 2023 में 19.2 प्रतिशत से साल 2024 में 27.5 प्रतिशत) हुआ है, लेकिन कार्बापेनेम्स और कोलिस्टिन के प्रति बढ़ता रज़िस्टैंस खतरे का संकेत है, जिसके कारण इलाज के विकल्प घट रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में बढ़ते ए.एम.आर के अनेक कारण हैंः

• संक्रामक बीमारियों का अत्यधिक भार
• मनुष्यों और जानवरों को अत्यधिक और अनुचित रूप से एंटीबायोटिक दिया जाना।
• एंटीबायोटिक ओटीसी काउंटर पर उपलब्ध होना।
• डायग्नोस्टिक का अपर्याप्त सुपरविज़न।
• फार्मास्युटिकल कचरे और हॉस्पिटल के कचरे से जल स्रोतों का गंदा होना।

अगर ए.एम.आर ऐसे ही बढ़ता रहा, तो मरीजों को लंबे समय तक हॉस्पिटल में रुकना पड़ेगा, इलाज की लागत बढ़ जाएगी और उत्पादकता का नुकसान होगा, जिससे अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ेगा।

इस सम्मेलन में वरिष्ठ नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, ग्लोबल ए.एम.आर एक्सपर्ट्स और इनोवेटर्स ने हिस्सा लिया है, जो वन हैल्थ फ्रेमवर्क पर आधारित समाधानों पर बातचीत करेंगे। मुख्य सत्रों में निम्नलिखित विषयों पर बात होनी है:

• डायग्नोस्टिक और एंटीमाईक्रोबियल सुपरविज़न में अत्याधुनिक प्रगति
• नए थेरेपिक्टिस के लिए इनोवेशन की पाईपलाईन
• पर्यावरण और कृषि के पहलू से ए.एम.आर
• लैबोरेटरी नेटवर्क को मजबूत बनाना
• नीतियों में तालमेल और क्रॉस-बॉर्डर सहयोग

यहाँ पर विकसित होती हुई टेक्नोलॉजी के साथ डिजिटल हैल्थ, तीव्र डायग्नोस्टिक, एंटीमाईक्रोबियल ऑप्टिमाईज़ेशन और संक्रमण से बचाव की रणनीतियों का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

भारत सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने कहा, ‘‘भारत में एंटीमाईक्रोबियल रज़िस्टैंस से निपटना कितना जरूरी है, इसका हमें एहसास है, इसीलिए हमने वन हैल्थ के सिद्धांतों के साथ एक नेशनल एक्शन प्लान बनाया है। हमने लैबोरेटरी की क्षमता बढ़ाई है, परीक्षण की विधियों को मानक बनाया है और मानव, जीवजंतुओं एवं पर्यावरण की निगरानी के प्लेटफॉर्म्स को आपस में जोड़ा है। इसके माध्यम से हमें ट्रेंड्स को पहचानने और तीव्र प्रतिक्रिया देने में मदद मिली है, तथा हम डब्लूएचओ के ग्लोबल सर्वियलेंस सिस्टम में डेटा का योगदान देने में समर्थ बने हैं।’’

डॉ. संजीव सिंह, मेडिकल डायरेक्टर, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने कहा, ‘‘एंटीमाईक्रोबियल रज़िस्टैंस का हैल्थ सिस्टम पर गहरा असर हो रहा है। मरीजों की मृत्युदर बढ़ रही है, उन्हें लंबे समय तक हॉस्पिटल में रुकना पड़ रहा है और उनके इलाज की लागत बढ़ रही है। इस चुनौती का सामना कोई भी संस्थान या देश अकेले नहीं कर सकता है। इससे निपटने के लिए हमें मनुष्यों, जानवरों और पर्यावरण के स्वास्थ्य को साथ रखकर सहयोग, क्रॉस-बॉर्डर अनुसंधान और तालमेल के साथ कार्रवाई करने की गंभीर जरूरत है।

प्रोफेसर एलिसन होम्स ओबीई, सेंटर्स फॉर एंटीमाइक्रोबियल ऑप्टिमाइजेशन नेटवर्क की लीड और इंपीरियल कॉलेज लंदन में फ्लेमिंग इनिशिएटिव की डायरेक्टर ने कहा कि, “एंटीमाईक्रोबियल रज़िस्टैंस हम सभी के लिए बहुत बड़ा खतरा है, फिर चाहे हमारी सीमाएं या आर्थिक स्थिति कोई भी क्यों न हो। ए.एम.आर के खिलाफ लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत, तालमेलपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय प्रयास बहुत आवश्यक है।”

यूनिवर्सिटी ऑफ़ लिवरपूल में इन्फेक्शियस डिज़ीज़ और ग्लोबल हेल्थ के इवांस चेयर, डेविड प्राइस ने कहा, “यह केवल सहयोग के माध्यम से हो सकता है। हमें खुशी है कि एंटीमाईक्रोबियल रज़िस्टैंस से निपटने के प्रयासों में हमें अमृता विश्व विद्यापीठम के साथ मिलकर काम करने का अवसर मिला है। हम एंटीमाईक्रोबियल उपयोग में सुधार लाने और इनोवेटिव रणनीतियों के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

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छाती में जिगर और किडनी लेकर जन्मे पाँच नवजातों को अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने दिया जीवन का दूसरा अवसर https://fnnnewshindi.com/amrita-hospital-faridabad-gave-second-chance-of-life-to-five-newborns-born-with-liver-and-kidney-in-their-chest/ https://fnnnewshindi.com/amrita-hospital-faridabad-gave-second-chance-of-life-to-five-newborns-born-with-liver-and-kidney-in-their-chest/#comments Thu, 13 Nov 2025 05:47:10 +0000 https://fnnnewshindi.com/?p=9179

दुर्लभ जन्मजात विकार कंजेनिटल डायफ्रामेटिक हर्निया के अत्यंत जटिल मामलों में टीम ने की सफल सर्जरी और लंबी NICU देखभाल — सभी बच्चे अब स्वस्थ और घर पर

फरीदाबाद, 12 नवंबर , 2025: अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने एक अत्यंत दुर्लभ और जीवन-घातक जन्मजात स्थिति से जूझ रहे पाँच नवजात शिशुओं को सफलतापूर्वक उपचार कर जीवनदान दिया है। इन बच्चों का जन्म ऐसे हुआ था कि उनका जिगर, किडनियाँ, आंतें और पेट का हिस्सा छाती की गुहा में मौजूद थे, जिससे उनके फेफड़ों को विकसित होने का पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाया। इस स्थिति को कंजेनिटल डायफ्रामेटिक हर्निया (CDH) कहा जाता है और यह हर 5,000 जन्मों में लगभग एक बार देखने को मिलती है। पिछले तीन महीनों में किए गए इन मामलों में सर्जरी और गहन नवजात देखभाल की लंबी प्रक्रिया शामिल रही, जिसके बाद पाँचों शिशु अब स्वस्थ हैं और अपने परिवारों के साथ घर लौट चुके हैं।

इनमें से चार मामलों में हर्निया बाईं ओर था, जहाँ उपचार की जटिलता अपेक्षाकृत नियंत्रित रही, जबकि एक मामला दाईं ओर का था, जो शिशु शल्य-चिकित्सा में सबसे कठिन श्रेणी में आता है। इस गंभीर मामले में बच्चे का जिगर लगभग पूरी तरह छाती में खिसक गया था और फेफड़ों का विकास अत्यंत सीमित रह गया था। जन्म के तुरंत बाद बच्चे को गंभीर श्वसन संकट में वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने अत्यंत सटीकता के साथ जिगर और आंतों को उनकी प्राकृतिक स्थिति में वापस स्थापित किया और डायफ्राम का पुनर्निर्माण स्थानीय ऊतकों की मदद से किया। सर्जरी के बाद की स्थिति भी उतनी ही चुनौतीपूर्ण रही, जहाँ नवजात को लंबे समय तक उच्च स्तरीय वेंटिलेशन, नियंत्रित दवाओं, पोषण प्रबंधन और निरंतर निगरानी की आवश्यकता पड़ी।

डॉ. नितिन जैन, सीनियर कंसल्टेंट और हेड, पीडियाट्रिक सर्जरी, ने कहा कि कंजेनिटल डायफ्रामेटिक हर्निया केवल जन्म के समय ही चुनौती नहीं पेश करता, बल्कि यह गर्भ के दौरान ही फेफड़ों के विकास को रोक देता है। उन्होंने बताया कि दाईं ओर के CDH, जहाँ जिगर छाती में होता है, शल्य-चिकित्सकों के लिए सबसे कठिन स्थिति मानी जाती है। ऐसे मामलों में हर मिनट और हर निर्णय बच्चे की जान से जुड़ा होता है। टीम ने इस बच्चे के लिए ‘हार नहीं मानने’ के दृष्टिकोण के साथ काम किया और आज इस शिशु को अपने दम पर साँस लेते देखना वास्तव में ‘दूसरा जन्म’ जैसा लगता है।

नियोनेटोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. हेमंत शर्मा, ने कहा कि ऐसे मामलों में सर्जरी से पहले और बाद में फेफड़ों में रक्त प्रवाह और रक्तचाप के संतुलन की निगरानी अत्यंत सूक्ष्म होती है। पोषण, तरल पदार्थ, औषधियों और वेंटिलेशन के स्तरों में थोड़ी सी चूक भी गंभीर जटिलता का कारण बन सकती है। उन्होंने बताया कि नवजात ICU की योग्य नर्सिंग टीम, डॉक्टरों और तकनीकी सहयोग ने मिलकर यह कठिन कार्य पूरा किया।

एक परिवार ने अपने अनुभव को भावनात्मक रूप से साझा करते हुए कहा कि जब उन्हें पता चला कि उनके बच्चे के अंग छाती में हैं, तो उन्हें लगा जैसे सब कुछ समाप्त हो गया है। ICU में बिताया हर दिन उनके लिए भय और उम्मीद के बीच की लंबी प्रतीक्षा थी। अब अपने बच्चे को सामान्य रूप से सांस लेते, दूध पीते और मुस्कुराते हुए देखना उनके लिए वास्तविक चमत्कार है, और वे इस अनुभव को अपने बच्चे का दूसरा जन्म मानते हैं।

अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद आज देश में जटिल नवजात सर्जरी और दीर्घकालिक NICU देखभाल के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आशा केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहाँ गंभीरतम परिस्थितियों में भी जीवन को दोबारा जीने का अवसर मिलता है।

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दिग्गज क्रिकेटर, राहुल द्रविड़ ने कहा, खेल में जीत की शुरुआत रोजमर्रा की स्वस्थ आदतों, जैसे अच्छी ओरल हैल्थ से होती है https://fnnnewshindi.com/veteran-cricketer-rahul-dravid-said-winning-in-sports-starts-with-healthy-everyday-habits-like-good-oral-health/ https://fnnnewshindi.com/veteran-cricketer-rahul-dravid-said-winning-in-sports-starts-with-healthy-everyday-habits-like-good-oral-health/#comments Wed, 05 Nov 2025 11:45:46 +0000 https://fnnnewshindi.com/?p=9016

नवंबर, 2025: ब्रेकफास्ट विद चैंपियंस के नए एपिसोड में महान क्रिकेटर एवं हेड कोच राहुल द्रविड़ ने खिलाड़ियों का सबसे बेहतर प्रदर्शन बनाए रखने के लिए ओरल हैल्थ की ओर ध्यान खींचा। कड़ी प्रतिस्पर्धा वाले खेल में सबसे ऊपर रहने के अपने अनुभव के साथ द्रविड़ ने बताया कि ‘छोटी-छोटी बातों’ को ध्यान में रखकर किस प्रकार उत्कृष्टता प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि ओरल हैल्थ खेल में बेहतर परफॉरमेंस बनाए रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती जा रही है।

द्रविड़ ने इस बात पर जोर दिया कि आज की कड़ी प्रतिस्पर्धा में बहुत मामूली बढ़त या केवल 1 प्रतिशत मार्जिन भी सफलता प्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि अपने शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए खिलाड़ी को हर छोटे-छोटे पहलू, खासकर ओरल हैल्थ पर ध्यान देना जरूरी है। द्रविड़ ने बताया कि बड़ी स्पोर्ट्स टीमों जैसे एफ.सी. बार्सिलोना के कोच हैंसी फ्लिक ने अपने खिलाड़ियों के लिए शारीरिक फिटनेस के साथ ओरल हेल्थ चेकअप जरूरी कर दिया है। इससे विश्व में यह बढ़ती हुई मान्यता प्रदर्शित होती है कि ओरल केयर खिलाड़ियों के खेल को बेहतर बनाताने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। राहुल द्रविड़ ने कहा, “वैसे इस बात पर ध्यान नहीं जाता है, पर जब मैंने इस बारे में पढ़ा और इस पर हुई शोध को देखा, तो यह बहुत विवेकपूर्ण लगा। अगर आप खुद की देखभाल एक प्रोफेशनल खिलाड़ी के रूप में करते हैं, तो आपको अपनी ओरल हैल्थ का ध्यान भी रखना होगा।

यह महत्वपूर्ण बात राहुल द्रविड़ ने अपने करियर का उदाहरण देकर समझाई, “कभी-कभी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर भी आपकी परफॉरमेंस बदली जा सकती है और इससे परफॉरमेंस में काफी सुधार आ सकता है… लोग छोटे-छोटे पहलुओं पर भी बहुत विस्तार से ध्यान दे रहे हैं, फिर चाहे वह ओरल हैल्थ हो, न्यूट्रीशन हो या वो हर चीज, जो परिवर्तन ला सकती है।”

ध्यान भटकने से रोकने और शारीरिक मुश्किलों को दूर करने के लिए ओरल हैल्थ को मजबूत बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलती है, जो वो हमेशा पाना चाहते हैं। उनकी रणनीति स्पष्ट है: समस्याओं को रोकें। बेहतर प्रदर्शन करें।”

राहुल द्रविड़ का यह प्रभावशाली संदेश इस बात का एहसास कराता है कि सबसे बेहतर परफॉरमेंस के लिए खिलाड़ियों की ओरल हैल्थ भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी महत्वपूर्ण उनकी बुनियादी स्वच्छता है। इससे उन्हें प्रतिस्पर्धा में बढ़त प्राप्त करने में मदद मिलती है।

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बिहार के मरीज का दुर्लभ फेफड़ों का ट्यूमर अमृता अस्पताल फरीदाबाद में बिना फेफड़ा निकाले सफलतापूर्वक किया गया इलाज https://fnnnewshindi.com/bihar-patients-rare-lung-tumor-successfully-treated-without-lung-removal-at-amrita-hospital-faridabad/ https://fnnnewshindi.com/bihar-patients-rare-lung-tumor-successfully-treated-without-lung-removal-at-amrita-hospital-faridabad/#comments Tue, 22 Jul 2025 03:31:43 +0000 https://fnnnewshindi.com/?p=7301

पटना / फरीदाबाद, जुलाई 2025: कई अस्पतालों से लौटाए जाने के बाद जब उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी थीं, तब बिहार
के 58 वर्षीय हरि नारायण सिंह को अमृता अस्पताल, फरीदाबाद में जीवन की नई सांस मिली। यहां डॉक्टरों की विशेषज्ञ
टीम ने एक जटिल और दुर्लभ एंडोब्रोंकियल कारसिनॉयड ट्यूमर को ऑपरेशन से हटाया—वो भी बिना फेफड़ा निकाले।


शुरुआती लक्षण जैसे कि सांस फूलना और सीटी चेस्ट में रुकावट, कई अस्पतालों में अस्थमा के रूप में गलत समझे गए।
अंततः एक सीटी स्कैन में उनके एयरवे में ट्यूमर की पुष्टि हुई। यह ट्यूमर फेफड़ों के कुल कैंसर मामलों का सिर्फ 5%
हिस्सा होता है, और अक्सर देर से पहचान में आता है।


“ इस केस की खासियत केवल इसका दुर्लभ ट्यूमर नहीं था, बल्कि यह था कि हम मरीज का पूरा फेफड़ा बचा पाए,” कहा
डॉ. समीर भाटे, सीनियर कंसल्टेंट और प्रमुख, कार्डियोथोरासिक सर्जरी, अमृता अस्पताल। “हमने पारंपरिक ऑपरेशन
(प्लमनॉक्टॉमी) की जगह स्लीव रिसेक्शन तकनीक अपनाई, जिससे ट्यूमर को हटाने के साथ-साथ फेफड़ों की कार्यक्षमता
भी सुरक्षित रही।”


इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में अमृता के पल्मोनोलॉजी विभाग की अहम भूमिका रही, जिसका नेतृत्व डॉ. अर्जुन
खन्ना, डॉ. सौरभ पाहुजा और डॉ. प्रदीप बजाड़ ने किया। मरीज की ब्रोंकोस्कोपी और सटीक निदान ने सर्जरी को संभव
बनाया।


खुले ऑपरेशन तकनीक से की गई यह सर्जरी पूरी तरह सफल रही और मरीज को बिना किसी जटिलता के स्वस्थ होकर
डिस्चार्ज कर दिया गया।
“ मैंने तो कभी इस बीमारी का नाम भी नहीं सुना था,” कहते हैं हरि नारायण सिंह। “लेकिन डॉ. समीर भाटे और डॉ. पाहुजा
ने मुझे बहुत सहजता से पूरी स्थिति समझाई। मुझे लगा मैं सबसे सुरक्षित हाथों में हूं।”

अमृता अस्पताल में यह केस एक मिसाल है—कैसे दुर्लभ बीमारियों का भी समय पर निदान और विशेषज्ञ देखभाल से
जीवन बचाया जा सकता है।
“ अगर यह ट्यूमर समय रहते नहीं पकड़ा जाता, तो मरीज की सांस की नली में भारी रक्तस्राव जानलेवा हो सकता था,” डॉ.
भाटे ने कहा। “हम चाहते हैं कि ऐसे मामलों में ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीजों को भी भरोसा और इलाज मिले।“


अमृता अस्पताल का यह प्रयास न केवल क्लिनिकल उत्कृष्टता का प्रमाण है, बल्कि यह उस भरोसे का भी प्रतीक है, जो हर
मरीज यहां लेकर आता है—एक आखिरी उम्मीद, जो यहां आकर हकीकत बन जाती है।

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CAPSI के अध्यक्ष कुँवर विक्रम सिंह ने पारंपरिक भारतीय स्नैक्स पर स्वास्थ्य चेतावनियों पर चिंता जताई https://fnnnewshindi.com/capsi-president-kunwar-vikram-singh-expresses-concern-over-traditional-indian-chemistry-warnings/ https://fnnnewshindi.com/capsi-president-kunwar-vikram-singh-expresses-concern-over-traditional-indian-chemistry-warnings/#comments Wed, 16 Jul 2025 10:30:54 +0000 https://fnnnewshindi.com/?p=7248

समोसा और जलेबी जैसे लोकप्रिय भारतीय स्नैक्स पर स्वास्थ्य चेतावनी लगाने के हालिया प्रस्ताव ने कड़ी चिंता पैदा कर दी है। यह कदम हलवाई अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है – स्थानीय मिठाई और नाश्ते की दुकानें जो पीढ़ियों से भारत की संस्कृति और छोटे व्यवसाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं।


ये स्नैक्स सिर्फ भोजन से कहीं अधिक हैं। वे हमारे त्योहारों, परंपराओं और दैनिक जीवन का हिस्सा हैं। स्वास्थ्य चेतावनियाँ जोड़ने से लोग डर सकते हैं और इन सदियों पुराने व्यंजनों पर उनका भरोसा कम हो सकता है, जिसका सीधा असर छोटे दुकान मालिकों पर पड़ेगा जो अपनी आजीविका के लिए इन पर निर्भर हैं।


इस बीच, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज़ और पिज्जा जैसे फास्ट फूड आइटम – जो अक्सर अस्वास्थ्यकर सामग्रियों से बनाए जाते हैं और युवाओं में बढ़ते मोटापे से जुड़े होते हैं – बिना किसी चेतावनी के बेचे जा रहे हैं। इससे यह सवाल उठने लगा है कि केवल पारंपरिक भारतीय भोजन को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है।


CAPSI (सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री) के चेयरमैन कुंवर विक्रम सिंह ने यह मुद्दा उठाया है और चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि इस तरह की एकतरफा कार्रवाई से हमारी स्थानीय अर्थव्यवस्था और पारंपरिक व्यवसायों को नुकसान हो सकता है, जैसे मॉल और ऑनलाइन शॉपिंग ने पहले ही छोटे किराना स्टोरों को प्रभावित किया है।


पारंपरिक भारतीय स्नैक्स को दोष देने के बजाय, संतुलित भोजन और स्वस्थ जीवनशैली की आदतों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। हर प्रकार के भोजन – चाहे भारतीय हो या पश्चिमी – को समान स्वास्थ्य नियमों का पालन करना चाहिए।


हमारे छोटे व्यवसायों और खाद्य संस्कृति की रक्षा करना बहुत महत्वपूर्ण है। हलवाई की दुकानें सिर्फ विक्रेता नहीं हैं – वे हमारी खाद्य विरासत के रखवाले हैं और भारतीय जीवन का गौरवशाली हिस्सा हैं।

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फ्रेओ ने शुरू की अनोखी पहल — बीमा खरीदने से पहले भारतवासियों को हेल्थ इंश्योरेंस को समझाने की मुहिम https://fnnnewshindi.com/freo-started-a-unique-initiative-a-campaign-to-educate-indians-about-health-insurance-before-purchasing-it/ https://fnnnewshindi.com/freo-started-a-unique-initiative-a-campaign-to-educate-indians-about-health-insurance-before-purchasing-it/#comments Fri, 27 Jun 2025 08:37:23 +0000 https://fnnnewshindi.com/?p=6917

पटना, 27 जून  2025: 8 जून है इंश्योरेंस अवेयरनेस डे — एक ज़रूरी याद दिलाने वाला दिन कि भारत में बीमा कवरेज भले ही बढ़ रहा हो, लेकिन इसे समझने की रफ़्तार अभी भी धीमी है।

हर 10 में से 8 पॉलिसीधारकों को यह तक नहीं पता होता कि उनकी बीमा पॉलिसी क्या कवर करती है, क्या नहीं करती — और दावा कैसे किया जाता है।

यही वजह है कि Freo ने बीमा को बेचने से पहले समझाने की पहल की है।

3.5 करोड़ से अधिक यूज़र्स के लिए क्रेडिट को सरल बनाने के बाद, अब फ्रेओ एक नए मिशन पर है: हर भारतीय के लिए हेल्थ इंश्योरेंस को समझना आसान बनाना। हाल ही में फ्रेओ ने इरडा (आईआरडीएआई) से कॉर्पोरेट एजेंसी लाइसेंस प्राप्त किया है और अब उसने एक व्यापक पहल की शुरुआत की है, जिससे स्वास्थ्य बीमा को सरल, स्पष्ट और तनावमुक्त बनाया जा सके — ताकि लोग आत्मविश्वास के साथ बेहतर और समझदारी से फैसले ले सकें।

भारत में लाखों लोग बीमा खरीदने से इसलिए हिचकिचाते हैं, क्योंकि वे इसे समझ नहीं पाते — यह समस्या कीमत की नहीं, जटिलता की है। भाषा की कठिनाई, बिक्री के जाल का डर और कवरेज को लेकर असमंजस अक्सर लोगों को बीमा से दूर कर देता है।

भारत में इंश्योरेंस की पहुंच मात्र 3.7% है, जो कि वैश्विक औसत 7% से काफी कम है। इसे लेकर फ्रेओ के देशभर में किए गए सर्वे में सामने आया कि हर 100 में से 96 लोग बीमा से इसलिए दूर रहते हैं क्योंकि उन्हें यह बहुत जटिल या अप्रासंगिक लगता है।

फ्रेओ आज डिजिटल फाइनेंस में एक भरोसेमंद नाम बन चुका है — 1,200+ शहरों और 19,000+ पिनकोड्स में 3.5 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं को समझदारी से कर्ज लेने, सही खर्च करने और पैसे बढ़ाने में मदद करके। इंस्टेंट क्रेडिट, यूपीआई पेमेंट्स, फिक्स्ड डिपॉज़िट और डिजिटल गोल्ड जैसे उत्पादों के साथ, फ्रेओ ने वित्तीय नियंत्रण को सरल बनाया है। अब वही स्पष्टता वह बीमा की दुनिया में भी ला रहा है।

फ्रेओ का नया प्लेटफॉर्म — [learn.freo.money] — आपकी भाषा में, आपकी समझ में

यह प्लेटफॉर्म बीमा को इस तरह से समझाता है कि वह सादा, सरल और स्पष्ट हो। यह अंग्रेज़ी और हिंदी में उपलब्ध है, और जल्द ही कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी पेश किया जाएगा।

इस पहल की खास बातें:

●      स्पष्ट सामग्री:
 
बीमा को आसान भाषा में समझाया गया है — हिंदी और अंग्रेज़ी में; जल्द ही अन्य भाषाओं में भी।

●      इंटरऐक्टिव लर्निंग:
 
वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरण, सामान्य सवाल-जवाब और व्यावहारिक टूल्स जो समझ को गहराई देते हैं।

●      व्यक्तिगत मार्गदर्शन:
 
फ्रेओ ऐप और learn.freo.money के ज़रिए आपको मिलेगी खास आपकी ज़रूरत के अनुसार जानकारी।


जल्द आ रहा है:

●      50+ शहरों में बीमा जागरूकता अभियान

●      समुदायों, एनजीओ और स्कूलों के साथ साझेदारी, जिससे ज़मीनी स्तर पर जागरूकता फैलाई जा सके

फ्रेओ के सीईओ व सह-संस्थापक कुणाल वर्मा ने कहा, “भारत में अधिकांश बीमा प्लेटफ़ॉर्म और ब्रांड केवल बीमा बेचने की होड़ में हैं। जबकि कवरेज बढ़ाना ज़रूरी है, उससे कहीं ज्यादा ज़रूरी है कि लोग स्वास्थ्य बीमा की जटिलताओं को पहले समझें। बीमा को आसान बनाया जाना चाहिए — ताकि यह लोगों को सशक्त बनाए, भ्रमित न करे। इस पहल के माध्यम से हमारा लक्ष्य है — हर भारतीय को आसान और भरोसेमंद ढंग से सही निर्णय लेने में मदद करना।”

कोविड के बाद बीमा की मांग बढ़ी है — इस वर्ष बीमा प्रीमियम ₹1 लाख करोड़ तक पहुंचा, जो पिछले साल से 10% अधिक है।

लेकिन यह केवल पैसों की बात नहीं है — समझ की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।

भारत “2047 तक सभी के लिए बीमा” के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। फ्रेओ इस दिशा में अपना योगदान दे रहा है — आसान, स्पष्ट और स्थानीय भाषा में बीमा जानकारी देकर। फ्रेओ का मानना है कि सरलता ही है व्यापक अपनाने की कुंजी — और यही हर परिवार को सशक्त बनाएगी अपने स्वास्थ्य और पैसों को लेकर सही फैसले लेने में।

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