40 साल पुराने प्लेन उड़ रहे हैं, लेकिन 10 साल पुरानी कारों पर ईंधन प्रतिबंध?’ — पूर्व एयर मार्शल संजीव कपूर ने दिल्ली सरकार की नीति पर उठाए सवाल

दिल्ली में पुरानी गाड़ियों के लिए ईंधन पर रोक: पूर्व एयर मार्शल संजीव कपूर की तीखी प्रतिक्रिया
दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई 2025 से एक नई और सख्त नीति लागू की है, जिसके तहत 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों को राज्य के किसी भी पेट्रोल पंप से ईंधन नहीं मिलेगा। यह कदम राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, इस नीति को लेकर आलोचना भी सामने आ रही है। विशेष रूप से भारतीय वायुसेना के पूर्व अधिकारी और पायलट संजीव कपूर ने इस नियम पर कड़ी आपत्ति जताई है।
क्या है यह नई नीति?
दिल्ली सरकार की “नो फ्यूल फॉर ओल्ड व्हीकल्स” पॉलिसी के अनुसार:
- 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं दिया जाएगा।
- ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों की मदद से इन वाहनों की पहचान की जा रही है।
- जो वाहन इस नियम का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उन पर ₹5,000 से ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और उनका वाहन जब्त कर स्क्रैपिंग के लिए भेजा जा सकता है।
- यह नियम CNG वाहनों पर लागू नहीं होता।
सरकार का तर्क है कि पुरानी गाड़ियां दिल्ली के वायु प्रदूषण में अहम योगदान देती हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप यह कदम उठाया गया है।
पूर्व पायलट संजीव कपूर का विरोध
पूर्व एयरफोर्स अधिकारी संजीव कपूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा, “हम अभी भी 40 साल से पुराने लड़ाकू विमान उड़ा रहे हैं, लेकिन दिल्ली में 10 साल पुरानी कार को पेट्रोल नहीं मिलेगा!” उनका यह तंज सरकार की नीति पर सवाल उठाने के लिए था।
उनका कहना है कि केवल निजी गाड़ियों को ही निशाना बनाना तर्कसंगत नहीं है, जबकि सार्वजनिक परिवहन और सरकारी तंत्र में उपयोग हो रही पुरानी गाड़ियों पर कोई रोक नहीं है। कपूर ने यह भी चेतावनी दी कि इस नीति के कारण “काले बाजार” की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, जहां लोग गैर-कानूनी तरीके से ईंधन प्राप्त करने की कोशिश करेंगे।
नीति का उद्देश्य बनाम व्यावहारिक चुनौतियाँ
दिल्ली की हवा दुनिया की सबसे प्रदूषित हवाओं में से एक मानी जाती है। खासकर सर्दियों के मौसम में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। इस पृष्ठभूमि में दिल्ली सरकार की यह नीति निश्चित रूप से पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह नीति संतुलित और व्यवहारिक भी है?
कई विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन प्रतिबंध का यह कदम उन नागरिकों के लिए कठिनाइयाँ पैदा करेगा जो पुरानी गाड़ियां उपयोग करते हैं, लेकिन उनके पास नई गाड़ी खरीदने की आर्थिक क्षमता नहीं है। खासकर निम्न और मध्यम वर्ग के लिए यह एक बड़ा झटका हो सकता है।
तकनीकी पहलू और क्रियान्वयन की चुनौती
ANPR कैमरों के माध्यम से गाड़ियों की पहचान करना तकनीकी रूप से उन्नत प्रणाली है, लेकिन इसके सही क्रियान्वयन पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या सभी पंपों पर यह प्रणाली प्रभावी ढंग से लागू हो पाएगी? क्या गलत पहचान के मामले सामने नहीं आएंगे?
इसके अतिरिक्त, दिल्ली सरकार ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि ऐसे वाहन मालिक जो नियम का उल्लंघन नहीं करना चाहते, उनके लिए विकल्प क्या हैं? स्क्रैपिंग के लिए कोई प्रोत्साहन योजना? या पुरानी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक वाहन में परिवर्तित करने की सुविधा?
निष्कर्ष
दिल्ली सरकार की यह नीति निस्संदेह पर्यावरण के लिहाज से सकारात्मक दिशा में एक कदम है, लेकिन इसका क्रियान्वयन और प्रभाव दोनों पर गहन विचार की आवश्यकता है। पूर्व एयर मार्शल संजीव कपूर जैसे जानकारों की प्रतिक्रियाएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि नीति निर्धारण में तकनीकी, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं का संतुलन अत्यंत आवश्यक है।
यदि सरकार इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना चाहती है, तो उसे जनता को जागरूक करने के साथ-साथ व्यावहारिक विकल्प भी उपलब्ध कराने होंगे। नहीं तो यह नीति असंतोष और अव्यवस्था को जन्म दे सकती है।

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