वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत के रक्षा निर्माण क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी की मांग की।

नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2026: वेदांत के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें बदलती वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि घरेलू निर्माण क्षमता हमेशा से किसी भी देश की ताकत का आधार रही है और भारत को अपने रक्षा उत्पादन क्षेत्र की पूरी क्षमता को हासिल करने के लिए आधुनिकीकरण और निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी बढ़ानी चाहिए। अपने पोस्ट में उन्होंने भारत की रक्षा तैयारी की मजबूत परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास में मजबूत स्वदेशी रक्षा क्षमताएँ ही सुरक्षित और समृद्ध देशों की नींव रही हैं। उन्होंने भारत के व्यापक रक्षा उत्पादन नेटवर्क को उजागर किया और मौजूदा ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति बताया, जो रक्षा उपकरणों में आत्मनिर्भरता हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
जबलपुर और भुसावल स्थित ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के अपने दौरे के अनुभव साझा करते हुए, अनिल अग्रवाल ने उनकी वृहद क्षमता, तकनीकी अपनाने और कुशल कार्यबल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह का बुनियादी ढांचा जल्दी से तैयार करना आसान नहीं होता, इसलिए इसे आधुनिकीकरण और नवाचार-आधारित विकास के जरिए बेहतर तरीके से उपयोग में लाना जरूरी है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा:
“आज की भू-राजनीतिक परिस्थितियों में रक्षा उपकरणों में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर फिर से जोर दिया जा रहा है। अगर हम भारत के इतिहास को देखें, तो हमारे राजाओं और शासकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज उनके रक्षा उपकरण थे—चाहे वह तलवारें हों, घोड़े हों या तोपें। वे शांति-प्रिय होने के बावजूद, यही उनकी ताकत की असली नींव थे।
आज भारत भर में रक्षा उत्पादन फैक्ट्रियों का एक बहुत ही अनोखा और मजबूत नेटवर्क मौजूद है। देश में कुल 41 आयुध फैक्ट्रियां हैं, जो हथियार और गोला-बारूद बनाती हैं। इनमें से मैंने दो फैक्ट्रियों जबलपुर और भुसावल का दौरा किया है। इनके बड़े स्तर और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को देखकर मैं बहुत प्रभावित हुआ। इन फैक्ट्रियों का प्रबंधन काफी सक्षम और कुशल लोगों के हाथ में है। ऐसी फैक्ट्रियां मैंने और कहीं बहुत कम देखी हैं।
ऐसी इंफ्रास्ट्रक्चर को जल्दी तैयार करना लगभग असंभव होता है, इसलिए ये मौजूदा फैक्ट्रियां ही रक्षा उपकरणों में आत्मनिर्भरता हासिल करने की कुंजी हैं। हमें इन फैक्ट्रियों को बेहतर तरीके से आधुनिक बनाना होगा, ताकि ये नए-नए नवाचार कर सकें और अपना उत्पादन 10 गुना तक बढ़ा सकें। निजी क्षेत्र की भागीदारी से इस क्षमता को पूरी तरह से उपयोग में लाया जा सकता है।
भारत को अपनी सुरक्षा के लिए जमीन, आसमान और समुद्र—तीनों क्षेत्रों के लिए बेहतरीन उपकरण देश में ही बनाने की जरूरत है। हम न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं, बल्कि एक्सपोर्ट भी बढ़ा सकते हैं और इस क्षेत्र को जीडीपी और रोजगार का एक बड़ा स्रोत बना सकते हैं। इन फैक्ट्रियों का इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से मौजूद है। ये फैक्ट्रियां अपने आप में छोटे-छोटे शहरों जैसी हैं। हमारे प्रधानमंत्री का स्पष्ट विज़न है, अब जरूरत सिर्फ उसे सही तरीके से लागू करने की है। सरकार के साथ साझेदारी में निजी क्षेत्र भी आगे आकर देश के लिए काम करने को तैयार है। इनका निजीकरण एयर इंडिया की तरह आसान और सुचारु होना चाहिए, क्योंकि समय बहुत महत्वपूर्ण है।
