आरबीआई ने सहमति को सेल्फ-रैगुलेटरी संगठन के रूप में मान्यता दी; भारत में एकाउंट एग्रीगेटर ईकोसिस्टम में नए दौर की हुई शुरुआत
यह मान्यता यूज़र की सहमति और विश्वास की बुनियाद पर पूरी आबादी के लिए डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में भारत का नेतृत्व प्रदर्शित करती है
भारत, 08 जून, 2026 – रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने सहमति को देश के एकाउंट एग्रीगेटर (ए.ए) ईकोसिस्टम में सेल्फ-रैगुलेटरी ऑर्गेनाईज़ेशन (एसआरओ) के रूप में आधिकारिक मान्यता दी है। यह भारत के डिजिटल फाईनेंशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर में हुई एक बड़ी प्रगति है। सहमति भारत के एकाउंट एग्रीगेटर (ए.ए) फ्रेमवर्क में इंडस्ट्री अलायंस और ईकोसिस्टम को-ऑर्डिनेटर के रूप में काम करती है। आरबीआई द्वारा दी गई इस मान्यता से गवर्नेंस को मजबूत बनाने, संचालन में अनुशासन लाने, तथा पूरे ईकोसिस्टम में तालमेल बनाने के लिए औपचारिक उद्योग-आधारित प्रणाली स्थापित होगी। गौरतलब है कि देश में सहमति पर आधारित फाईनेंशियल डेटा शेयरिंग में तेजी से वृद्धि हो रही है।
भारत का एकाउंट एग्रीगेटर ईकोसिस्टम दुनिया के सबसे बड़े सहमति पर आधारित फाईनेंशियल डेटा शेयरिंग नेटवर्क्स में से एक के रूप में उभरा है। आज इस ईकोसिस्टम में 1120 से अधिक लाईव रैगुलेटेड फाईनेंशियल संस्थाएं, 176 फाईनेंशियल इन्फॉर्मेशन प्रोवाईडर (एफ.आई.पी), 1020 फाईनेंशियल इन्फॉर्मेशन यूज़र (एफ.आई.यू) और 17 ऑपरेशनल एकाउंट एग्रीगेटर (AA) हैं। इस फ्रेमवर्क द्वारा 450 मिलियन से अधिक मर्जी से दिए जाने वाले निवेदनों को पूरा किया जा चुका है। यह 294 मिलियन से अधिक एकाउंट्स को लिंक कर चुका है। आज इसके द्वारा लेंडिंग, इंश्योरेंस, वैल्थ मैनेजमेंट और पर्सनल फाईनेंस के क्षेत्र में 290 मिलियन से अधिक मासिक डेटा शेयर संभव बनाए जाते हैं।
एकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क भारत के डेटा एम्पॉवरमेंट एंड प्रोटेक्शन आर्किटेक्चर (DEPA) का मुख्य स्तंभ है। यह लोगों और व्यवसायों को उनकी मर्जी और सुरक्षित रूप से फाईनेंशल डेटा एक्सेस करने और शेयर करने में समर्थ बनाता है। RBI, SEBI, IRDAI और PFRDA सहित वित्तीय क्षेत्र के नियामकों के सहयोग से तैयार यह फ्रेमवर्क, अब वैश्विक स्तर पर सहमति-आधारित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के एक भरोसेमंद और प्रभावी मॉडल के रूप में पहचाना जा रहा है।
एकाउंट एग्रीगेटर ईकोसिस्टम विभिन्न सेक्टरों में फाईनेंशियल डेटा शेयरिंग का फ्रेमवर्क है, जो बैंकिंग, सिक्योरिटीज़, इंश्योरेंस, टैक्सेशन और पेंशन के क्षेत्र में काम करने वाली रैगुलेटेड संस्थाओं को एक सहमति आधारित आर्किटेक्चर से जोड़ता है। सहमति भारत में अपनी तरह की पहली एस.आर.ओ है, जो विभिन्न फाईनेंशियल रैगुलेटर्स के साथ एक क्रॉस-सेक्टोरल ईकोसिस्टम का प्रतिनिधित्व करती है। यह एकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क में एक अद्वितीय सहयोगपूर्ण आर्किटेक्चर को प्रदर्शित करती है।
एसआरओ-ए.ए, सहमति एक तटस्थ, उद्योग पर आधारित संस्था के रूप में काम करेगी। इस पर ऑपरेशनल और टेक्निकल मानकों के विकास, विवाद समाधान में सहायता करने, इंटरऑपरेबिलिटी को सपोर्ट करने, ईकोसिस्टम में अनुशासन को मजबूत करने और विभिन्न प्रतिभागियों के बीच तालमेल बनाने की जिम्मेदारी होगी।
ए.ए ईकोसिस्टम के लिए एसआरओ को मान्यता देने के आरबीआई फ्रेमवर्क से ऐसी मजबूत संस्थागत प्रणालियों की जरूरत को बल मिलता है, जो जवाबदेह इनोवेशन को सपोर्ट कर सकें, पारदर्शिता बढ़ा सकें, ग्राहकों का विश्वास मजबूत बना सकें और भारत में सहमति पर आधारित डेटा शेयरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का क्रमबद्ध और सस्टेनेबल विकास सुनिश्चित कर सकें।
आरबीआई द्वारा यह मान्यता ऐसे समय में दी गई है, जब ए.ए ईकोसिस्टम एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। यह इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण से ईकोसिस्टम के विकास की ओर बढ़ रहा है, तथा बैंकिंग, लेंडिंग, इंश्योरेंस, वैल्थ मैनेजमेंट और उभरते हुए डिजिटल फाईनेंस में इसका एडॉप्शन बढ़ रहा है।
आर. गांधी, पूर्व डिप्टी गवर्नर, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया एवं चेयरमैन, सहमति ने कहा, ‘‘एकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क डिजिटल अर्थव्यवस्था में फाईनेंशियल जानकारी एक्सेस करने और शेयर करने के तरीके में एक बुनियादी परिवर्तन लेकर आया है। वित्तीय भागीदारी में डेटा का महत्व बढ़ने के साथ ऐसे फ्रेमवर्क बहुत जरूरी होते जा रहे हैं, जो इनोवेशन और जवाबदेही में तालमेल बनाकर रखें।
एसआरओ का गठन इस ईकोसिस्टम में संस्थागत विश्वास की एक महत्वपूर्ण परत जोड़ रहा है। इससे एक ऐसी प्रणाली का विकास हुआ है, जिसके माध्यम से औद्योगिक प्रतिभागी मानक बनाकर रख सकेंगे, बाजार में जवाबदेह आचरण मजबूत होगा और यह सुनिश्चित हो सकेगा कि यह ईकोसिस्टम एक सुरक्षित, इंटरऑपरेबल एवं ग्राहक केंद्रित तरीके से आगे बढ़े।’’
बी.जी महेश, सी.ई.ओ, सहमति ने कहा, ‘‘भारत में एकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम दुनिया में इस बात के सबसे शुरुआती उदाहरणों में से एक है कि डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर किस प्रकार बड़े पैमाने पर सहमति पर आधारित डेटा मोबिलिटी को संभव बना सकता है। यह क्षण इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि इसे बड़े पैमाने पर अपनाया गया है, बल्कि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके लिए एक गवर्नेंस मॉडल सामने आया है, जो इस ईकोसिस्टम को जवाबदेह तरीके से विकास करने तथा खुलापन एवं इनोवेशन बनाए रखने में मदद करेगा।’’
भारत में डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर केवल व्यापक उपयोग का माध्यम तैयार नहीं कर रहा है, बल्कि यह विश्वास स्थापित करने वाली संस्थाओं को भी तैयार कर रहा है। एक फाईनेंशियल ईकोसिस्टम जैसे-जैसे ज्यादा इंटरकनेक्टेड होता जाता है, वैसे-वैसे एसआरओ के रूप में हमारा दायित्व बढ़ता चला जाता है। हम पर सभी प्रतिभागियों के बीच एक साझा जवाबदेही स्थापित करने की जिम्मेदारी होती है। हमें सुनिश्चित करना होता है कि भारत में ओपन फाईनेंस का सफर समावेशी और इंटरऑपरेबल बना रहे, जो पूरे विश्व के लिए उपयोगी हो।’’ एकाउंट एग्रीगेटर ईकोसिस्टम का विस्तार विभिन्न सेक्टरों और उपयोगों के लिए हो रहा है। ऐसे में भारत में ओपन फाईनेंस के विकास में एसआरओ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में है। आरबीआई द्वारा दी गई इस मान्यता से व्यापक आबादी के लिए डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने के क्षेत्र में भारत की ग्लोबल लीडरशिप मजबूत होगी। इस इन्फ्रास्ट्रक्चर में इनोवेशन, रैगुलेटरी एलाईनमेंट और ग्राहक-केंद्रित डेटा गवर्नेंस शामिल हैं।
