स्काईस्कैनर की नई रिपोर्ट के मुताबिक कल्चर पर आधारित ट्रैवल की मांग बढ़ी; 67 प्रतिशत भारतीय हैरिटेज, फेस्टिवल्स और फूड के लिए होलिडे प्लान कर रहे हैं

84 प्रतिशत भारतीयों ने बताया कि पिछले कुछ सालों में भारत में कल्चर पर आधारित ट्रैवल की ओर उनकी रुचि बढ़ी है
नई दिल्ली, 30 जुलाई, 2026: कल्चर भारतीयों के होलिडे की योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारतीय ट्रैवलर पारंपरिक साईटसींग की बजाय अब ज्यादा गहरे और प्रामाणिक अनुभवों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो उन्हें पारंपरिक हैरिटेज, ट्रेडिशंस, क्वीजीन, फेस्टिवल्स और समुदायों से जोड़ें। प्रमुख ग्लोबल ट्रैवल ऐप, स्काईस्कैनर ने अपनी नई रिपोर्ट, द इंडिया कल्चर ट्रैवल इंडेक्स में खुलासा किया है कि कल्चर पर आधारित ट्रैवल के लिए भारतीयों की मांग लगातार बढ़ रही है।
इंडिया कल्चर ट्रैवल इंडेक्स में स्काईस्कैनर ने भारत में कल्चर पर आधारित ट्रैवल की ओर लोगों के बढ़ते रूझान का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट में पाँच मुख्य ट्रेंड्स सामने आए हैं, जो भारत में कल्चर पर आधारित ट्रैवल की ओर बढ़ती रुचि के कारण (आर.ओ.ओ.टी.एस यानी रूट्स) को प्रदर्शित करते हैंः
आर – रिडिस्कवरिंग हैरिटेज यानी हैरिटेज की पुनः खोज
कल्चर पर आधारित ट्रैवल में हैरिटेज की सबसे अहम भूमिका है। भारतीय ट्रैवलर्स को सबसे अधिक प्रेरणा हैरिटेज से मिलती है। 47 प्रतिशत का कहना है कि वो हैरिटेज और हिस्टोरिकल साईट्स की ट्रैवल करेंगे। केरला, राजस्थान और उत्तराखंड देश में कल्चर पर आधारित मुख्य केंद्र हैं। इन जगहों पर ट्रैवलर्स भारत के आर्किटेक्चर, ऐतिहासिक समुदायों और जीवित परंपराओं को देखने के लिए जाना चाहते हैं।
ओ – ओपन डिस्कवरी
भारतीय कल्चर द्वारा नए स्थानों को खोजने के लिए उत्सुक हैं। वो पांरपरिक साईटसींग के मुकाबले ज्यादा दिलचस्प अनुभवों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब (42 प्रतिशत) तथा फूड, क्राफ्ट एवं हैरिटेज ट्रेल्स की बढ़ती लोकप्रियता (41 प्रतिशत) कल्चर पर आधारित ट्रैवल की सबसे अधिक प्रेरणा देते हैं।
डोमेस्टिक ट्रैवल के अलावा, 46 प्रतिशत भारतीय ट्रैवलर कल्चरल ईवेंट, फेस्टिवल या हैरिटेज ट्रेल के लिए विदेशों की यात्रा भी कर चुके हैं। वहीं 43 प्रतिशत ट्रैवलर ऐसा करना चाहते हैं। इससे भारत एवं विश्व, दोनों जगह के कल्चर को देखने की बढ़ती उत्सुकता प्रदर्शित होती है। भारत के अंदर भी यह रूझान साफ दिखाई दे रहा है। हर चार में से एक भारतीय ट्रैवलर (25 प्रतिशत) कल्चरल अनुभव के लिए मेट्रो शहरों की बजाय टियर 2 और टियर 3 शहरों की ओर जा रहा है।
ओ – वंस इन ए ईयर अनुभव
फेस्टिवल टूरिज्म भी ट्रैवल को बढ़ा रहा है। 72 प्रतिशत भारतीयों ने बताया कि वो खासकर किसी बड़ी कल्चरल ईवेंट या रिलीजियस फेस्टिवल में शामिल होने के लिए ट्रिप प्लान करेंगे। भारत में मुख्य फेस्टिवल ट्रैवल के लिए एक बड़ी प्रेरणा हैं। दुर्गा पूजा सबसे बड़ा फेस्टिवल बनकर उभरा, जिसमें 58 प्रतिशत ट्रैवलर शामिल होना चाहते हैं। इसके बाद गणेश चतुर्थी में 52 प्रतिशत और नवरात्रि गरबा में 47 प्रतिशत ट्रैवलर शामिल होना चाहते हैं।
ये नतीजे प्रदर्शित करते हैं कि ट्रैवलर्स किसी स्थान पर पहुँचकर केवल गतिविधियों का आनंद लेने की बजाय बड़े फेस्टिवल्स को लिमिटेड-टाईम अनुभवों के रूप में देखते हैं और इनके लिए अपनी पूरी होलिडे ट्रिप की योजना बनाते हैं।
टी – ट्रेडिशंस एवं टेस्ट
कल्चर पर आधारित ट्रैवल में फूड, क्राफ्ट और लोकल ट्रेडिशन लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रीजनल फूड के अनुभव ट्रैवल के सबसे मुख्य कारणों में से एक हैं। 43 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि वो इन अनुभवों के लिए ट्रिप प्लान करेंगे। इन अनुभवों की बढ़ती लोकप्रियता से ऐसे अनुभवों की मांग प्रदर्शित होती है, जो ट्रैवलर्स को किसी जगह की लोकल ट्रेडिशन, फ्लेवर और जीवन के तरीके से जोड़ते हों।
एस – स्मार्ट प्लानिंग
जैसे-जैसे कल्चरल अनुभव ट्रैवल के मुख्य कारण बनते जा रहे हैं, वैसे-वैसे ट्रैवलर ट्रैवल प्लानिंग को लेकर ज्यादा स्पष्ट होते जा रहे हैं। ज्यादातर भारतीय ट्रैवलर्स कल्चर पर आधारित ट्रिप की योजना काफी पहले बना लेते हैं। इनमें से 40 प्रतिशत ट्रैवलर छः महीने पहले तथा 36 प्रतिशत ट्रैवलर एक से तीन महीने पहले ही ट्रिप की पूरी योजना बना लेते हैं।
फेस्टिवल की टाईमिंग भी ट्रैवल बुकिंग में काफी अहमियत रखती है। 36 प्रतिशत ट्रैवलर्स ने बताया कि मुख्य फेस्टिवल्स या ईवेंट की तारीखों पर बुकिंग उपलब्ध होना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। 32 प्रतिशत ने ट्रांसपोर्ट और एकोमोडेशन के लिए किफायती मूल्यों को ज्यादा महत्व दिया।
कई सारे कल्चरल अनुभव साल में एक विशेष समय पर होते हैं। इसलिए स्काईस्कैनर का प्राईस अलर्ट ट्रैवलर्स को बार-बार सर्च किए बिना ही बदलते किरायों पर नजर रखने में समर्थ बनाता है। होल मंथ सर्च की मदद से वो अलग-अलग ट्रैवल डेट्स के लिए कीमतों की तुलना कर सकते हैं। इससे उन्हें फेस्टिवल्स, हैरिटेज ट्रेल्स एवं अन्य कल्चरल अनुभवों के लिए सबसे अच्छी कीमतें पाने में मदद मिलती है।
भविष्य में भी कल्चर पर आधारित ट्रैवल की ओर भारतीयों की रुचि में कोई कमी के संकेत नहीं मिल रहे हैं। 41 प्रतिशत भारतीय ट्रैवलर अगले एक साल में कल्चर पर आधारित दो ट्रिप्स करने की योजना बना रहे हैं, वहीं 32 प्रतिशत तीन से चार ऐसी ट्रिप करेंगे। जहाँ ट्रैवलर्स के बीच उत्साह काफी अधिक है, वहीं 49 प्रतिशत के लिए सुरक्षा चिंताएं और 37 प्रतिशत के लिए ट्रैवल का ऊँचा खर्च कल्चर पर आधारित ट्रैवल की सबसे बड़ी बाधाएं हैं।
नील घोष, ट्रैवल ट्रेंड्स एवं डेस्टिनेशंस एक्सपर्ट, स्काईस्कैनर इंडिया ने कहा, ‘‘लंबे समय से लोग पहले जगह चुनते थे और उसके कल्चर को वहाँ पहुँचने के बाद देखते थे। अब ट्रैवल का तरीका पलट चुका है। अब ऐसे ट्रैवलर देखने को मिल रहे हैं, जो पहले यह तय करते हैं कि वो दुर्गा पूजा देखना चाहते हैं, हैरिटेज ट्रेल पर जाना चाहते हैं या किसी जगह के फूड का आनंद लेना चाहते हैं। इसके बाद वो ट्रिप की योजना बनाते हैं। यह बदलाव केवल लोगों के ट्रैवल करने के तरीके में नहीं हो रहा है, बल्कि उनकी प्लानिंग के तरीके में भी हो रहा है।’’
जब फेस्टिवल की तारीखें तय होती हैं और डिमांड काफी ज्यादा होती है, तब अलग-अलग ट्रैवल डेट्स, एयरलाईन, एयरपोर्ट और रूट्स की तुलना करके ट्रैवलर्स को बेहतर ऑफर पाने में मदद मिलती है। उदाहरण के लिए, जब आप फ्लाईट सर्च करते हैं, तब एयरलाईन या एयरपोर्ट की मिक्सिंग और मैचिंग करें और स्काईस्कैनर के प्राईस अलर्ट जैसे टूल्स का उपयोग करें। इससे आपको ट्रैवल के लिए बेहतर ऑफर मिलेगा।
डॉ. नवीना जाफा, एक्सपर्ट, हैरिटेज टूरिज्म, सस्टेनेबिलिटी, कल्चरल स्ट्रेट्जी एवं कथक डांस ने कहा, ‘‘भारत में कल्चरल हैरिटेज केवल स्मारकों तक सीमित नहीं है। यहाँ पर हैरिटेज लैंडस्केप का एक पूरा ईकोसिस्टम है, जिसमें क्रिएटिव स्किल वाले समुदाय, कल्चरल ट्रेडिशन और जीवित प्रैक्टिस शामिल हैं। स्टडीज में सामने आया है कि भारतीय ट्रैवलर्स की दिलचस्प हैरिटेज अनुभवों में रुचि बढ़ रही है। इससे भारत की विशाल भौगोलिक विविधता और मल्टी-लेयर वाली कल्चरल लीगेसी में इन्वेस्टमेंट की जरूरत प्रदर्शित होती है। यह तेजी से बढ़ता हुआ सेक्टर संरक्षण, आर्थिक विकास और देश एवं विश्व में हैरिटेज टूरिज्म को मजबूत करने के बड़े अवसर प्रदान कर रहा है।’’
भारत में कल्चर पर आधारित ट्रैवल में लगातार वृद्धि हो रही है। इसलिए स्काईस्कैनर ट्रैवलर्स को हर सफर के कारण (आर.ओ.ओ.टी.एस यानी रूट्स) को समझने में मदद कर रहा है, ताकि वो हैरिटेज की पुनः खोज, ओपन डिस्कवरी, साल के सबसे बेहतर अनुभवों, परंपराओं और स्वाद के लिए स्मार्ट प्लानिंग कर सकें।
आपकी रूट्स के साथ जुड़ने के लिए सबसे बेहतर स्थान
स्काईस्कैनर ने भारत में कल्चरल स्थानों की एक सूची तैयार की है, जो ट्रैवलर्स को अपने अगले सफर की योजना बनाने में मदद करेगी। यह गाईड यहाँ पर देखें।
