इनडीड हायरिंग ट्रैकर रिपोर्ट के मुताबिक हर 10 में से लगभग 6 प्रोफेशनल्स का मानना है कि उनका वेतन उनके जॉब टाईटल से मेल नहीं खाता है

भारत, 18 अगस्त, 2026: इनडीड के लेटेस्ट क्वाटर्ली हायरिंग ट्रैकर के मुताबिक हर 10 में से लगभग 6 प्रोफेशनल्स का कहना है कि उनका वेतन उनके जॉब टाईटल से मेल नहीं खाता है। इससे भारत में ऑफिसों में पदों और उनके लिए दिए जाने वाले वेतन के बीच बढ़ती विसंगति प्रदर्शित होती है। सर्वे में सामने आया कि लगभग 80 प्रतिशत प्रोफेशनल्स का मानना है कि उद्योगों में ज्यादा बड़े टाईटल देना आम हो गया है, जहाँ लोगों को सीनियर पद तो दे दिए जाते हैं, पर उस पद के मुताबिक वेतन उन्हें नहीं मिलता है।

इस बारे में शशि कुमार, मैनेजिंग डायरेक्टर, इनडीड इंडिया ने कहा, ‘‘एक जॉब टाईटल से व्यक्ति की प्रोफेशनल पहचान होती है। लेकिन ये सबसे प्रभावशाली तब होते हैं, जब वो करियर की स्थिर प्रगति को प्रदर्शित करें, न कि दिखावटी पदोन्नति। अगर संगठनों को प्रतिस्पर्धी बाजार में प्रतिभाओं को आकर्षित करना और उन्हें बनाए रखना है, तो यह तालमेल बनाना बहुत जरूरी होगा।’’

करियर के विकास को केवल जॉब टाईटल के आधार पर नहीं मापा जा सकता है

जिन प्रोफेशनल्स का पिछले दो सालों में जॉब टाईटल बदला है, उनमें से हर तीन में से एक प्रोफेशनल का कहना है कि उनका वेतन उनके जॉब टाईटल के अनुरूप नहीं बढ़ा, उनका वेतन या तो स्थिर रहा या फिर उसमें 5 प्रतिशत से भी कम बढ़ोत्तरी हुई। इसके अलावा, 52 प्रतिशत प्रोफेशनल्स ने कहा कि वो नए अवसर तलाशने के लिए बेहतर जॉब टाईटल की बजाय बेहतर वेतन को चुनेंगे। इससे प्रदर्शित होता है कि जॉब टाईटल से करियर के नए अवसर तो मिल सकते हैं, पर करियर का मूल्य वेतन से ही तय होता है।

सर्वे में यह दिलचस्प बात भी सामने आई कि प्रोफेशनल्स जॉब टाईटल को नकार नहीं रहे हैं। लगभग 70 प्रतिशत का मानना है कि जॉब टाईटल भविष्य के करियर को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं, लगभग 73 प्रतिशत का मानना है कि ज्यादा बड़ा जॉब टाईटल संभावित एम्प्लॉयर्स के सामने उनकी छवि को बेहतर बनाता है। 57 प्रतिशत ने कहा कि उनके जॉब टाईटल का उनके जॉब सैटिस्फैक्शन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ये नतीजे प्रदर्शित करते हैं कि जहाँ कर्मचारी जॉब टाईटल को ज्यादा महत्व देते हैं, वहीं, वो यह भी चाहते हैं कि उनका वेतन उनके जॉब टाईटल के अनुरूप हो और उन्हें करियर में विकास के वास्तविक अवसर मिलें।

एम्प्लॉयर जॉब टाईटल को महत्वपूर्ण टेलेंट टूल के रूप में इस्तेमाल करते हैं

एम्प्लॉयर्स का दृष्टिकोण इस परिवर्तन की महत्वपूर्ण समझ प्रदान करता है। 57 प्रतिशत एम्प्लॉयर्स का कहना है कि उनके संगठन प्रतिभाओं को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए ज्यादा सीनियर या बड़े जॉब टाईटल प्रदान करते हैं। इससे प्रदर्शित होता है कि प्रतिभाओं को आकर्षित करने के महत्वपूर्ण टूल के रूप में वेतन के साथ-साथ जॉब टाईटल्स का भी इस्तेमाल किया जाता है। कई संगठनों में तो जब वेतन का बजट सीमित हो, तब जॉब टाईटल कैंडिडेट्स को आकर्षित करने, बेहतर परफॉर्मेंस देने वाले कर्मचारियों को बनाए रखने और उनके करियर की प्रगति को प्रदर्शित करने के लिए महत्वपूर्ण टूल बन गए हैं। एम्प्लॉयर्स ज्यादा सीनियर टाईटल्स के लिए बाजार की विकसित होती हुई अपेक्षाओं और बदलती संगठनात्मक संरचनाओं को जिम्मेदार मानते हैं।

इस सर्वे में यह भी सामने आया कि एम्प्लॉयर और कर्मचारी एक ही प्रमोशन को अक्सर अलग-अलग नजरिए से देखते हैं। जहाँ संगठन जॉब टाईटल को प्रतिभाओं को सम्मानित करने के तरीकों में से एक मानते हैं, वहीं, कर्मचारी करियर की प्रगति को बढ़ते वेतन के साथ जोड़कर देखते हैं। अपेक्षाओं में इस अंतर से प्रदर्शित होता है कि प्रोफेशनल्स आज के श्रम बाजार में अवसरों का मूल्यांकन, सफलता का निर्धारण और विकास को परिभाषित किस प्रकार करते हैं।

करियर में विकास को भविष्य में ज्यादा तालमेल बनाने की जरूरत होगी। भारत में श्रम बाजार का जैसे-जैसे विकास हो रहा है, वैसे-वैसे यह सर्वे एक बड़े परिवर्तन की ओर इशारा करता है कि प्रोफेशनल्स करियर में सफलता को किस प्रकार परिभाषित करते हैं। बेहतर जॉब टाईटल का महत्व आज भी है, लेकिन केवल बेहतर जॉब टाईटल ही पर्याप्त नहीं है। आज के कर्मचारियों के लिए सबसे बेहतर प्रमोशन वह है, जिसमें जॉब टाईटल, जिम्मेदारी और वेतन एक साथ बढ़ें।

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