स्किल इंडिया के तहत ‘डिब्बर इंटरनेशनल एजुकेटर ट्रेनिंग प्रोग्राम’ शुरू करने के लिए डिब्बर इंडिया और एमईपीएससी ने ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारत प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के एक नए युग की दहलीज पर है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर द फाउंडेशनल स्टेज भारत में बच्चे के शुरुआती और सबसे रचनात्मक वर्षों को देखने के नजरिए को बदल रहे हैं। अब खेल, अन्वेषण, अनुभव और विकास के अनुकूल सीखने की प्रक्रिया शिक्षा के केंद्र में हैं।

बच्चों के सीखने के इस नए दृष्टिकोण के लिए उन शिक्षकों के नजरिए में भी बदलाव की आवश्यकता है जो इस शिक्षा को आकार देते हैं।

भारत में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा की अगली छलांग केवल इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि इन नन्हें बच्चों को क्या पढ़ाया जाता है, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगी कि शिक्षक उनके पहले सवालों को कैसे प्रेरित करते हैं, उनकी जिज्ञासा को कैसे पोषित करते हैं और उनके सीखने के शुरुआती अनुभवों को आकार देकर उन्हें जीवन भर सीखने की यात्रा के लिए कैसे तैयार करते हैं। इसके लिए ऐसे शिक्षकों की एक नई पीढ़ी की आवश्यकता है जो पेशेवर रूप से तैयार, कक्षा के लिए सक्षम, आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार हों। ये शिक्षक बाल विकास के केवल सैद्धांतिक ज्ञान से आगे बढ़कर सार्थक अनुभवों, उद्देश्यपूर्ण बातचीत, खेल, अन्वेषण और उत्तरदायी शिक्षण के माध्यम से इसे व्यवहार में लाना जानते हों।

डिब्बर इंडिया की हेड ऑफ एकेडमिक्स, दीपा पिल्लई ने कहा, “एक सुसज्जित प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षक की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि वह क्या जानता है, बल्कि इस बात से होती है कि वह उस ज्ञान को कक्षा में कितनी समझदारी से लागू करता है। DIETP के माध्यम से, एमईपीएससी के साथ हमारा सहयोग हमें प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा की मजबूत नींव को संरचित कौशल विकास और व्यावहारिक उपयोग के साथ जोड़ने की अनुमति देता है। हम चाहते हैं कि शिक्षक इस कार्यक्रम से केवल एक योग्यता लेकर न निकलें, बल्कि आत्मविश्वास, पेशेवर निर्णय लेने की क्षमता और एक ऐसी सोच लेकर जाएं जिससे वे अपने पूरे करियर में सीखते, ढलते और आगे बढ़ते रहें।”

क्योंकि प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा में बदलाव की शुरुआत शिक्षक में बदलाव से ही होती है।

डिब्बर का वैश्विक नेतृत्व एक प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का अनावरण करने के लिए भारत में एकत्रित हुआ है। यह कार्यक्रम शिक्षकों की तैयारी में वैश्विक विशेषज्ञता लेकर आएगा, जिसमें इंटर्नशिप और भविष्योन्मुखी उन्नत पाठ्यक्रम शामिल हैं।

भारत में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए, डिब्बर इंडिया और मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप एंड प्रोफेशनल स्किल्स काउंसिल (एमईपीएससी) ने आज भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन के तत्वावधान में “डिब्बर इंटरनेशनल एजुकेटर ट्रेनिंग प्रोग्राम” शुरू करने के लिए आधिकारिक तौर पर अपनी साझेदारी की घोषणा की। इस कार्यक्रम का शुभारंभ डिब्बर समूह के संस्थापक हंस जैकब सुंडबी और रैंडी लौवलैंड सुंडबी, मुख्य शिक्षाशास्त्र और गुणवत्ता अधिकारी ट्रूड मोएन सिडटैंगेन, डिब्बर नॉर्वे के कंट्री हेड एडम डार्नेमिर, स्वीडन से जोहान्स स्टीघ और फिनलैंड से अनु-एलीना हिंटसा, डिब्बर इंडिया के सीईओ लग्नजीत मोहंती और एमईपीएससी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कर्नल अनिल कुमार पोखरियाल (सेवानिवृत्त) की उपस्थिति में किया गया।

इस समारोह में शिक्षा और कार्यबल विकास क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय और घरेलू नेतृत्व एक साथ आए। यह कार्यक्रम डिब्बर की प्रारंभिक बाल्यावस्था विशेषज्ञता और व्यावहारिक उद्योग अनुभव को भारत के कौशल विकास इकोसिस्टम में एमईपीएससी की संरचित विशेषज्ञता के साथ जोड़ता है। प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा में डिब्बर के 40 से अधिक वर्षों के वैश्विक अनुभव का लाभ उठाते हुए, प्रतिभागियों को डिब्बर की वैश्विक टीम द्वारा संचालित चुनिंदा सत्रों, उद्योग विशेषज्ञों द्वारा निर्देशित कार्यशालाओं और व्यावहारिक कक्षा अनुभव के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से अवगत कराया जाएगा।

यह कार्यक्रम सीखने को अभ्यास से जोड़ता है, जिससे प्रतिभागियों को प्रीस्कूल और डेकेयर परिवेश में प्रभावी ढंग से काम करने के लिए आवश्यक ज्ञान, दक्षताओं और पेशेवर क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिलती है।

नया अनावरित कार्यक्रम देश में प्रमाणित और उच्च क्षमता वाले अर्ली इयर्स एजुकेटर्स की बढ़ती मांग को सीधे तौर पर पूरा करता है।

आज उद्घाटित प्रशिक्षण मॉडल के प्रमुख स्तंभों में शामिल हैं:

• भविष्य के लिए तैयार शिक्षा और एआई एकीकरण : योजना दस्तावेज़ीकरण, संचार, रचनात्मक शिक्षा और सीखने के व्यक्तिगत रास्तों सहित कक्षा प्रशासन को सुव्यवस्थित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण।
• नेतृत्व और व्यावसायिक विकास: कक्षा प्रबंधन, संस्थागत नेतृत्व और स्टेकहोल्डर्स के साथ प्रभावी संचार पर समर्पित प्रशिक्षण।
• सिद्धांत के साथ व्यावहारिक इंटर्नशिप: अकादमिक पाठ्यक्रम के साथ संरचित इंटर्नशिप के माध्यम से वास्तविक कक्षा के माहौल का सीधा अनुभव।
• कमाते हुए सीखें वित्तीय सहायता: सभी को समान अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से नामांकित उम्मीदवारों को उनके प्रशिक्षण कार्यकाल के दौरान स्टाइपेंड प्राप्त करने के अवसर।
• उद्योग-मान्यता प्राप्त प्रमाणन: एमईपीएससीद्वारा NSQF स्तर 4 का प्रमाणन, जो अर्ली इयर्स सेटिंग्स में प्रीस्कूल शिक्षकों के लिए स्किल इंडिया कार्यबल मानकों के अनुरूप है।
• महिलाओं की रोजगार क्षमता और कौशल को बढ़ावा देना: कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्यों में आर्थिक सक्षमता और महिला सशक्तिकरण शामिल है। यह पहल प्रत्यक्ष और उच्च-मूल्य वाले रोजगार के अवसर पैदा करती है, जो कार्यबल में प्रवेश करने या वापसी करने वाली महिलाओं के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा को एक पेशेवर करियर इकोसिस्टम में बदल देती है।

डिब्बर समूह के संस्थापक हंस जैकब सुंडबी ने कहा, “शिक्षा की गुणवत्ता उन लोगों की गुणवत्ता से शुरू होती है जो बच्चों को हर दिन प्रेरित करते हैं। अपने शिक्षकों में निवेश करके, हम हर बच्चे के भविष्य में निवेश कर रहे हैं। DIETP के माध्यम से, हम शिक्षकों को ज्ञान, आत्मविश्वास और मूल्यों के साथ सशक्त बनाना चाहते हैं ताकि वे अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच सकें और उनके जीवन में एक स्थायी बदलाव ला सकें।”

डिब्बर इंडिया के सीईओ लग्नजीत मोहंती ने कहा, “आज का दिन भारत में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के लिए एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर है। स्किल इंडिया इकोसिस्टम के तहत एमईपीएससी के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर करना प्रारंभिक बाल्यावस्था कार्यबल की पेशेवर क्षमताओं को मजबूत करने और अच्छी तरह से तैयार शिक्षकों को भारतीय कक्षाओं में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महत्वाकांक्षी शिक्षकों को एआई क्षमताओं, नेतृत्व कौशल, व्यावहारिक इंटर्नशिप और स्टाइपेंड सहायता से लैस करके हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हम ऐसे आत्मविश्वासी पेशेवरों का एक कैडर तैयार करें जो हमारे बच्चों को विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान कर सकें।”

इस अवसर पर बोलते हुए, एमईपीएससी के सीईओ कर्नल अनिल कुमार पोखरियाल ने कहा, “बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्ष मूलभूत होते हैं। इन रचनात्मक वर्षों के दौरान बच्चे जो अनुभव करते हैं, वह उनके संज्ञानात्मक, भावनात्मक, सामाजिक और शारीरिक विकास को प्रभावित करता है। इसलिए, प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा की गुणवत्ता केवल बुनियादी ढांचे पर ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की कॉम्पिटेंस, प्रोफेशनलिज्म और कंटीन्यूअस विकास पर भी समान रूप से निर्भर करती है। यह सहयोग प्री-स्कूल शिक्षकों के बीच नए जमाने के कौशल की आवश्यकता को मजबूती प्रदान करेगा।”

समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर के दौरान उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में एमईपीएससी के एवीपी श्री संतोष कुमार साहा और डिब्बर इंडिया की हेड ऑफ एकेडमिक्स सुश्री दीपा पिल्लई शामिल थे।

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