अमृता विश्व विद्यापीठम् और सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बीच समझौता, पूर्वी हिमालय क्षेत्र में सामुदायिक सशक्तिकरण को मिलेगा नया बल

गंगटोक, सिक्किम, 10 मई 2025:
भारत के सबसे अधिक पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में से एक, पूर्वी हिमालय में आपदा प्रबंधन और सामुदायिक सशक्तिकरण को मजबूत करने के उद्देश्य से, अमृता विश्व विद्यापीठम् और सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) के बीच एक महत्त्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु सहनशीलता और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक दीर्घकालिक साझेदारी का विस्तार है।
इस MoU पर 10 मई 2025 को SSDMA के निदेशक श्री प्रभाकर राय और अमृता WNA की प्रोवोस्ट एवं निदेशक डॉ. मनीषा विनोदिनी रमेश ने हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी अमृता स्कूल फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर्स (ASF), अमृता सेंटर फॉर वायरलेस नेटवर्क्स एंड एप्लिकेशंस (Amrita WNA) और यूनेस्को चेयर ऑन एक्सपीरियेंशियल लर्निंग के सहयोग से की गई है।
समझौते के अंतर्गत, अमृता SSDMA के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम, क्षेत्रीय जन-जागरूकता अभियान और जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण की पहलों को कार्यान्वित करेगा। इस दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, बहुभाषी शैक्षणिक उपकरणों और उन्नत वायरलेस सेंसर नेटवर्क्स की मदद से दूरस्थ क्षेत्रों में त्वरित चेतावनी प्रणाली और आपदा संचार प्रणाली को सशक्त किया जाएगा। दोनों संस्थाएं मिलकर प्राकृतिक आपदाओं से निपटने हेतु समावेशी और सामुदायिक दृष्टिकोण पर आधारित रणनीतियां तैयार करेंगी। यह पहल विशेष रूप से सिक्किम जैसे क्षेत्र के लिए महत्त्वपूर्ण है, जो भूकंप, भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी आपदाओं की चपेट में रहता है।
समारोह में सिक्किम सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें भूमि राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव श्री एम.टी. शेर्पा (IAS), SSDMA के निदेशक श्री प्रभाकर राय, अतिरिक्त निदेशक श्री राजीव रोका और प्रशिक्षण अधिकारी श्री केशव कोईराला शामिल थे। अमृता की ओर से श्री रंजीथ मोहन (प्रोग्राम मैनेजर – लाइव-इन-लैब्स®), श्री नितिन एम (प्रोजेक्ट मैनेजर, WNA), श्री अमृतेश, सुश्री हरि चंदना, सुश्री रेशमा ए.एस. (रिसर्च एसोसिएट्स) और श्री बिचु (फील्ड एसोसिएट) उपस्थित रहे।
डॉ. मनीषा वी. रमेश ने कहा, “यह साझेदारी सिक्किम में पिछले एक दशक की निरंतर सहभागिता और विश्वास का परिणाम है। वर्ष 2013 से हम चांडमारी, गंगटोक में भूस्खलन की पूर्व चेतावनी प्रणाली पर कार्य कर रहे हैं। यहां 50 से अधिक सेंसर लगाकर जोखिम की निगरानी की जा रही है। एआई आधारित इस प्रणाली से सबसे पहले स्थानीय समुदाय को और फिर सरकारी व अनुसंधान संस्थानों को सतर्क किया जाता है। छात्रों द्वारा बहु-आपदा ढांचे पर भी कार्य किया जा रहा है। यह साझेदारी उस समर्पित शोध और अनुभव का विस्तार है।”
वहीं SSDMA के निदेशक श्री प्रभाकर राय ने कहा, “यह सहयोग राज्य में आपदा प्रबंधन को नई दिशा देगा। अमृता विश्वविद्यालय ने चांडमारी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जो डेटा संग्रहण व निगरानी प्रणाली विकसित की है, वह हमारे कार्य में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई है। उनके द्वारा 10 प्रमुख स्थानों पर लगाए गए सेंसर और समय-समय पर साझा की गई रिपोर्ट्स से SSDMA को बहुत सहायता मिली है। अब वे फ्लैश फ्लड जैसी अन्य आपदाओं पर भी कार्य करने जा रहे हैं, जो एक समग्र आपदा न्यूनीकरण दृष्टिकोण को दर्शाता है।”
साल 2015 में भी अमृता विश्व विद्यापीठम् ने भारत सरकार के सहयोग से सिक्किम हिमालयी क्षेत्र के लिए एआई-सक्षम IoT आधारित भूस्खलन चेतावनी प्रणाली विकसित की थी। इसमें 200 से अधिक सेंसर लगे हैं जो वर्षा, मृदा नमी और भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी करते हैं। सभी आंकड़ों को रीयल टाइम में फील्ड मैनेजमेंट सेंटर और फिर डेटा मैनेजमेंट सेंटर में विश्लेषित किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, अमृता ने युवाओं, विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए कई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। स्थानीय भाषाओं में डिज़िटल शैक्षणिक सामग्री भी तैयार की गई है जिससे आपदा जागरूकता को जमीनी स्तर तक पहुंचाया गया है। यह एक ऐसा मॉडल बन चुका है, जिसे अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है।

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