10,000 लगाते ही लौटे 13,000—व्हाट्सएप ग्रुप की फर्जी निवेश योजना से प्रोफेसर को 2 करोड़ रुपये से बेदखल!

व्हाट्सएप ग्रुप से शुरू हुई साइबर ठगी: आंध्र प्रदेश के प्रोफेसर से 2 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी

आज के डिजिटल युग में जहां तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं इसके दुरुपयोग से साइबर अपराधों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। ताजा मामला आंध्र प्रदेश के एक रिटायर्ड प्रोफेसर का है, जिनसे ठगों ने एक फर्जी निवेश योजना के नाम पर करीब 2 करोड़ रुपये की ठगी कर ली।

कैसे शुरू हुई ठगी?

ठगी की शुरुआत एक साधारण से व्हाट्सएप मैसेज से हुई। प्रोफेसर को एक ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जिसका नाम “H-10 Nuvama Health Group” था। यह नाम एक प्रतिष्ठित निवेश कंपनी Nuvama Wealth Management से मिलता-जुलता था। ग्रुप में मौजूद सदस्य खुद को विशेषज्ञ निवेश सलाहकार बताते थे और बड़े मुनाफे का दावा कर रहे थे।

शुरुआती लालच: ₹10,000 लगाए, ₹13,000 मिले

प्रोफेसर ने पहले सिर्फ ₹10,000 का निवेश किया। चौंकाने वाली बात यह थी कि कुछ ही समय में उनके खाते में ₹13,000 वापस आ गए। यह एक पूर्व-योजना के तहत किया गया विश्वास बनाने का प्रयास था। प्रोफेसर को लगा कि यह निवेश वैध है और उन्होंने विश्वास करना शुरू कर दिया।

फिर हुआ असली हमला: एक महीने में 1.9 करोड़ का निवेश

इसके बाद प्रोफेसर ने अगले कुछ हफ्तों में लगभग ₹1.9 करोड़ तक का निवेश कर दिया। उन्हें एक वेबसाइट पर लॉगइन कराया गया, जो देखने में बिल्कुल असली कंपनी की वेबसाइट जैसी थी। इस वेबसाइट पर प्रोफेसर को दिखाया गया कि उनका खाता बैलेंस ₹35 करोड़ तक पहुंच चुका है।

पैसे निकालने की कोशिश, और धोखाधड़ी का खुलासा

जब प्रोफेसर ने ₹5 करोड़ की निकासी की कोशिश की, तो उन्हें ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर ₹32 लाख देने को कहा गया। कुछ मोलभाव के बाद यह राशि ₹7.9 लाख तक कम की गई। प्रोफेसर ने वह भी दे दिया, लेकिन पैसा कभी उनके बैंक खाते में नहीं आया। इसके बाद ठगों ने बातचीत बंद कर दी और प्रोफेसर को धोखाधड़ी का एहसास हुआ।

साइबर अपराधियों की चालाकी

इस पूरे घटनाक्रम में ठगों ने जो तरीका अपनाया, वह बेहद योजनाबद्ध और पेशेवर था। उन्होंने एक महिला “कंगना” को प्रोफेसर से व्यक्तिगत रूप से चैट के लिए लगाया, जिसने न केवल विश्वास अर्जित किया बल्कि उन्हें तकनीकी सहायता भी दी। साथ ही, नकली वेबसाइट और नकली अकाउंट बैलेंस जैसे हथकंडों का प्रयोग किया गया।

शिकायत दर्ज और जांच

इस गंभीर ठगी के बाद, प्रोफेसर ने 18 जून को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में शिकायत दर्ज करवाई है। CBI ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच से पता चला है कि ठगी के पीछे संगठित साइबर गिरोह हैं, जिनके तार देश और विदेश में फैले हो सकते हैं।

सबक और सतर्कता

यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। ऐसे मामलों से बचने के लिए जरूरी है कि:

  1. अनजान व्हाट्सएप ग्रुप्स से सावधान रहें।
  2. किसी भी निवेश से पहले कंपनी की प्रामाणिकता जांचें।
  3. असली वेबसाइट का URL हमेशा ध्यान से देखें।
  4. लालच में आकर कभी बड़ा निवेश न करें।
  5. शक होने पर तुरंत 1930 पर साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

निष्कर्ष

डिजिटल युग में जहां लाभ के अपार अवसर हैं, वहीं खतरे भी कम नहीं हैं। यह जरूरी है कि हम जागरूक बनें, तकनीकी जानकारी रखें और किसी भी ‘जल्द अमीर बनने वाली’ योजना से सतर्क रहें। आंध्र प्रदेश के इस प्रोफेसर की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए सबक है, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निवेश करने की सोच रहा है।

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *