कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025: भारत की नई उड़ान, कोयल बार ने रचा इतिहास – तीन सिल्वर और एक गोल्ड से चमका तिरंगा

कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 में भारत के वेटलिफ्टर्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया। अहमदाबाद में हो रही इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल तीन सिल्वर मेडल और एक गोल्ड मेडल अपने नाम किया। खास बात यह रही कि 17 साल की युवा सनसनी कोयल बार ने अपने दमदार प्रदर्शन से यूथ वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ते हुए गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ा दिया।


कोयल बार – 17 साल की ‘गोल्डन गर्ल’, जिसने दुनिया को चौंका दिया

भारत की नई वेटलिफ्टिंग स्टार कोयल बार ने महिला 53 किलोग्राम युवा वर्ग में शानदार प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया। उन्होंने कुल 192 किग्रा (85 किग्रा स्नैच + 107 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाया और नया वर्ल्ड यूथ रिकॉर्ड बनाया।

  • स्नैच: 85 किग्रा
  • क्लीन एंड जर्क: 107 किग्रा
  • कुल वजन: 192 किग्रा (नया रिकॉर्ड)

यह प्रदर्शन इतना दमदार था कि उन्होंने सीनियर वर्ग में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय वेटलिफ्टर स्नेहा सोरेन से भी ज्यादा वजन उठाया। कोयल ने न सिर्फ यूथ कैटेगरी में बल्कि जूनियर वर्ग में भी गोल्ड अपने नाम किया।

कोयल बार का यह रिकॉर्ड इस बात का सबूत है कि भारत में अब वेटलिफ्टिंग की नई पीढ़ी तैयार हो चुकी है, जो आने वाले ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश का झंडा ऊंचा करेगी।


बिंदिया रानी देवी – अनुभव और दमखम की मिसाल

महिला 58 किग्रा वर्ग में भारत की दिग्गज वेटलिफ्टर बिंदिया रानी देवी ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उन्होंने कुल 206 किग्रा (91 किग्रा स्नैच + 115 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर शानदार प्रदर्शन किया।

  • स्नैच: 91 किग्रा
  • क्लीन एंड जर्क: 115 किग्रा
  • कुल वजन: 206 किग्रा

हालांकि उन्होंने अंतिम प्रयास में 122 किग्रा उठाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाईं। इसके बावजूद उनका यह प्रदर्शन भारत के लिए गौरव का विषय है। इस कैटेगरी में ऑस्ट्रेलिया की कियाना इलियट ने 212 किग्रा (100 + 112) उठाकर गोल्ड मेडल जीता।

बिंदिया रानी पहले भी 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर, 2019 में कॉमनवेल्थ चैंपियन और 2021 में सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। उनका अनुभव भारत की वेटलिफ्टिंग टीम की सबसे बड़ी ताकत है।


मुथुपांडी राजा – बस एक कदम दूर रहे गोल्ड से

मेंस 65 किग्रा वर्ग में भारत के मुथुपांडी राजा ने बेहद रोमांचक मुकाबले में सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने कुल 296 किग्रा (128 किग्रा स्नैच + 168 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाया।

  • स्नैच: 128 किग्रा
  • क्लीन एंड जर्क: 168 किग्रा
  • कुल वजन: 296 किग्रा

गोल्ड मेडल उनसे मात्र 1 किग्रा की दूरी पर रह गया। मलेशिया के मोहम्मद अज्निल बिन बिदिन ने 297 किग्रा (125 + 172) उठाकर गोल्ड जीता। वहीं पापुआ न्यू गिनी के मोरिया बारू ने 292 किग्रा (127 + 165) के साथ ब्रॉन्ज पर कब्जा किया।

हालांकि मुथुपांडी राजा गोल्ड से चूक गए, लेकिन उनका प्रदर्शन यह दर्शाता है कि भारत के पुरुष वेटलिफ्टर्स भी एशियाई और कॉमनवेल्थ स्तर पर किसी से कम नहीं।


स्नेहा सोरेन – लगातार चमक दिखा रही हैं मेहनती खिलाड़ी

महिला 53 किग्रा सीनियर वर्ग में भारत की स्नेहा सोरेन ने 185 किग्रा (81 किग्रा + 104 किग्रा) उठाकर सिल्वर मेडल हासिल किया।

  • स्नैच: 81 किग्रा
  • क्लीन एंड जर्क: 104 किग्रा
  • कुल वजन: 185 किग्रा

इस कैटेगरी में नाइजीरिया की ओमोलोला ओनोमे डिडिह ने 197 किग्रा (90 + 107) उठाकर गोल्ड जीता।

स्नेहा का यह प्रदर्शन भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग की गहराई को दर्शाता है। हालांकि वह गोल्ड से चूक गईं, लेकिन उनकी मेहनत और निरंतरता भविष्य के लिए शुभ संकेत है।


क्यों खास है यह जीत भारत के लिए?

  1. नई पीढ़ी की ताकत – कोयल बार जैसे युवा खिलाड़ी का रिकॉर्ड भविष्य की मजबूत नींव है।
  2. अनुभव और निरंतरता – बिंदिया रानी और स्नेहा सोरेन जैसी खिलाड़ी निरंतर देश को मेडल दिला रही हैं।
  3. करीबी मुकाबले का सबूत – मुथुपांडी राजा का गोल्ड से सिर्फ 1 किग्रा दूर रहना यह दिखाता है कि भारतीय खिलाड़ी अब टॉप इंटरनेशनल लेवल के करीब पहुंच चुके हैं।
  4. भारत की बढ़ती ताकत – चार मेडल, जिनमें तीन सिल्वर और एक गोल्ड शामिल हैं, यह दर्शाता है कि भारत कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग में एक बड़ी ताकत बन चुका है।

कोयल बार का रिकॉर्ड क्यों है मील का पत्थर?

  • 17 साल की उम्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड: इतनी कम उम्र में यह कारनामा करना अपने आप में अनोखा है।
  • सीनियर खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन: उन्होंने स्नेहा सोरेन से भी ज्यादा वजन उठाया, जो यह दिखाता है कि भारत की नई पीढ़ी सीनियर्स से भी आगे निकल रही है।
  • भविष्य की ओलंपिक स्टार: अगर उनकी मेहनत और ट्रेनिंग इसी तरह जारी रही, तो आने वाले ओलंपिक गेम्स में उनसे मेडल की उम्मीद की जा सकती है।

कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 – भारत का गौरव

इस चैंपियनशिप ने साबित किया कि भारत अब सिर्फ पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वेटलिफ्टिंग जैसे पावर स्पोर्ट्स में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

  • कुल मेडल: 4 (1 गोल्ड + 3 सिल्वर)
  • सबसे बड़ा आकर्षण: कोयल बार का यूथ वर्ल्ड रिकॉर्ड
  • अनुभव और युवा जोश का मेल: बिंदिया रानी, स्नेहा सोरेन और मुथुपांडी राजा का प्रदर्शन

आगे की राह – भारत की वेटलिफ्टिंग का भविष्य

  1. ओलंपिक की तैयारी – इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन साफ दिखाता है कि भारत के पास ओलंपिक स्तर पर मेडल जीतने की क्षमता है।
  2. युवा प्रतिभाओं पर फोकस – कोयल बार जैसी खिलाड़ी को बेहतर सुविधाएं और ट्रेनिंग दी जाए तो वह वर्ल्ड चैंपियन बन सकती हैं।
  3. अनुभव का फायदा – बिंदिया रानी जैसी वरिष्ठ खिलाड़ियों का अनुभव नई पीढ़ी को प्रेरणा देगा।
  4. इंटरनेशनल मंच पर आत्मविश्वास – करीबी अंतर से हारने वाले मुकाबले यह संकेत हैं कि थोड़ी और मेहनत से भारत शीर्ष पर पहुंच सकता है।

निष्कर्ष

कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। कोयल बार की गोल्डन सफलता और वर्ल्ड रिकॉर्ड, बिंदिया रानी, मुथुपांडी राजा और स्नेहा सोरेन के सिल्वर मेडल भारत की ताकत और संभावनाओं का प्रमाण हैं।

यह जीत न सिर्फ मेडल तालिका में भारत की स्थिति मजबूत करती है, बल्कि आने वाले वर्षों में वेटलिफ्टिंग में भारत की सुपरपावर बनने की यात्रा की शुरुआत का भी संकेत देती है।

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