2 में से 1 भारतीय घरों में बिस्तर और फर्नीचर के नीचे सफाई करना अक्सर भूल जाते हैं: Dyson के ‘How India Cleans’ अध्ययन 2026 के निष्कर्ष

आज Dyson ने अपने पहले ‘How India Cleans’ (भारत में सफाई के तरीके) अध्ययन[1] के नतीजे जारी किए। इस अध्ययन में यह समझने का प्रयास किया गया है कि भारतीय घरों में सफाई कैसे की जाती है, सफाई के दौरान किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है और लोग फ्लोर केयर तकनीक से क्या अपेक्षाएँ रखते हैं।

अध्ययन से पता चलता है कि चुनौती केवल सफाई में लगने वाले समय की नहीं है, बल्कि यह भी है कि इस्तेमाल किए जा रहे उपकरण पूरे घर के हर हिस्से की प्रभावी ढंग से सफाई कर पाते हैं या नहीं।

“लोग अब अपने वैक्यूम क्लीनर से एक ही बार की सफाई में पहले से कहीं बेहतर परिणाम चाहते हैं। वे बारीक धूल और लंबे बालों से लेकर अलग-अलग तरह की सतहों और मुश्किल से पहुंचने वाली जगहों तक, हर हिस्से की सफाई की उम्मीद करते हैं। Dyson के वैक्यूम क्लीनर पूरे घर में प्रभावी सफाई सुनिश्चित करने के लिए एक संपूर्ण सिस्टम के रूप में बेहतरीन प्रदर्शन देने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। Dyson की खासियत यह भी है कि हमारे सभी उत्पादों को लगातार कठोर परीक्षणों से गुजारा जाता है, ताकि वे लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन कर सकें।”

– टिम हेयर, डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंजीनियर, फ्लोर केयर, Dyson

भारतीय घरों में सफाई पर दिया जा रहा है पूरा समय, लेकिन क्या हर बार सफाई पूरी होती है?

आधे से अधिक उत्तरदाता अपने घर के फर्श की सफाई में 30 मिनट से एक घंटे तक का समय लगाते हैं, जबकि 11% लोग एक से दो घंटे तक सफाई करते हैं। हालांकि, सफाई में अधिक समय लगाने के बावजूद हमेशा मनचाहा परिणाम नहीं मिलता।

– अलग-अलग सतहें, लेकिन सफाई का एक ही तरीका: भारतीय घरों में मार्बल के फर्श (51%), विट्रिफाइड या सिरेमिक टाइल्स (49%) और ग्रेनाइट (43%) का इस्तेमाल आम है। वहीं, 72% उत्तरदाताओं के घरों में कार्पेट और रग्स भी मौजूद हैं। ऐसे में सफाई का एक ही तरीका अलग-अलग तरह की सतहों के लिए कारगर होना जरूरी है।

– बालों की सफाई आज भी एक बड़ी चुनौती: एक-तिहाई से अधिक (36%) उत्तरदाताओं ने बताया कि फर्श पर इंसानों या पालतू जानवरों के बाल रह जाना सफाई के दौरान उनकी आम परेशानियों में से एक है। लंबे बाल पारंपरिक ब्रश बार में उलझ भी जाते हैं, जिससे सफाई का एक अतिरिक्त काम बढ़ जाता है।

– वे जगहें, जहां अक्सर सफाई छूट जाती है: आधे से अधिक (52%) उत्तरदाताओं का कहना है कि फर्नीचर के नीचे की जगहों की सफाई अक्सर छूट जाती है, जबकि 48% लोगों को कोनों और किनारों की प्रभावी ढंग से सफाई करने में परेशानी होती है।

– धूल, जो सफाई के बाद भी वापस आ जाती है: 38% उत्तरदाताओं का कहना है कि सफाई करने के तुरंत बाद दोबारा धूल जम जाती है। घरों में मौजूद धूल इतनी हल्की होती है कि रोजमर्रा की गतिविधियों के कारण हवा में फैल सकती है। इसलिए प्रभावी सफाई का मतलब केवल धूल को एक जगह से दूसरी जगह हटाना नहीं, बल्कि उसे पूरी तरह साफ करना है।

बेहतर समाधान की तलाश: फ्लोर केयर तकनीक से लोगों की क्या अपेक्षाएँ हैं?

– तकनीक को दी जा रही है प्राथमिकता: फ्लोर केयर उत्पाद चुनते समय 61% उत्तरदाताओं ने बेहतर तकनीक को अपनी पहली प्राथमिकता बताया। इसके बाद सफाई का बेहतर प्रदर्शन (54%) और भरोसा (49%) आता है। वहीं, केवल 21% लोगों ने बेहतर कीमत या ऑफर्स को प्राथमिकता दी।

– सफाई केवल फर्श तक सीमित नहीं: उत्तरदाता अपने वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल घर के कई हिस्सों की सफाई के लिए करते हैं। इनमें फर्नीचर के नीचे (71%), हार्ड फ्लोर (70%), कार्पेट और रग्स (69%), अपहोल्स्ट्री यानी सोफा व अन्य गद्देदार फर्नीचर (69%), तथा बेड और मैट्रेस (63%) शामिल हैं।

आधुनिक घरों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई Dyson की तकनीक

हाल ही में लॉन्च किया गया Dyson V16 Piston Animal™, Dyson का अब तक का सबसे शक्तिशाली एंटी-टैंगल कॉर्डलेस वैक्यूम क्लीनर है, जिसे सफाई से जुड़ी इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए तैयार किया गया है। इसकी कीमत ₹79,900 है।

इसकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

– All Floor Cones™ Sense क्लीनर हेड: यह तकनीक फर्श की सतह में होने वाले बदलावों को पहचानकर सक्शन पावर और ब्रश बार की गति को अपने आप एडजस्ट करती है[2]। इससे अलग-अलग सतहों की सफाई के लिए क्लीनर हेड बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।

– लंबे बालों से छुटकारा: इसके दो ब्रश बार कोन सफाई के दौरान लंबे से लंबे बालों को भी सीधे डस्टबिन में पहुंचा देते हैं[3]।

– LED लाइट से बेहतर सफाई: इसकी LED लाइट फर्नीचर के नीचे और कोनों में छिपी अदृश्य धूल को भी देखने में मदद करती है।

– लंबे समय तक दमदार प्रदर्शन: यह 70 मिनट तक लगातार और बिना पावर कम हुए सक्शन प्रदान करता है। इसके CleanCompaktor™ बिन में धूल और कचरे को दबाकर जमा किया जाता है, जिससे इसमें सामान्य क्षमता से तीन गुना अधिक धूल जमा हो सकती है। यह क्षमता 30 दिनों तक की धूल और कचरे को समाहित कर सकती है।

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