नाटक मिस आलूवालिया में दर्शकों ने खूब लगाए ठहाके…
लखनऊ : मंचकृति समिति के तत्वावधान में शेखर चटर्जी के लेखन व संगम बहुगणा के निर्देशन में नाटक मिस आलूवालिया का मंचन संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में किया गया। नाटक मिस आलूवालिया के हास्य से भरपूर दृश्यों को देखकर दर्शकों ने खूब ठहाके लगाये।

कथानुसार खांदा और प्यारे दोनों दोस्त है। खादा के एक पुश्तैनी मकान में रहते हैं। दोनों दोस्त शैल और मीना से प्यार करते हैं जो कि बहने है और उनकी इच्छा होती है कि कम से कम एक बार तो दोनों उनसे मिलने पर आ जाए, पर उसके लिए घर में किसी स्त्री का होना जरूरी है, तब ही उन्हें पता चलता है कि प्यारे की मौसी जो नैनीताल में रोजगार करती है उनसे मिलने आ रही है। दोनों खुशी में एक दावत का प्रोग्राम बनाते हैं और शैल.मीना को भी आमंत्रित करते हैए तभी उनका दोस्त पटला आ जाता है जो आॅफिस में फैंसी ड्रेस कैंपटीशन में भाग लेने जा रहा था वो उससे कहते है कि तू यहां ड्रेस चेंज करके प्रैक्टिस कर ले, पटला ड्रेस चेंज करने जाता है तब ही पता चलता है कि उनकी मौसी नहीं आ रही है अब तो दोनों मुश्किल में पड़ जाते है तब ही पटला जब स्त्री वेष में आता है तो दोनों उसे जबरदस्ती प्यारे की मौसी के रूप में पेश कर देते है। इधर खादा के बाचा भी आ जाते है और लड़कियों को ढूंढते उनके पिता भवतारण भी आ जाते है जब उन लोगों को पता चलता है कि यह मौसी करोड़पति है तो दोनों बुते पटला के पीछे लग जाते है। अब शुरू होता है भाग दौड़ का खेल तब ही असली मौसी भी आ जाती है, परिस्थितियां अत्यंत हास्य पद मोह ले लेती है। हंसी से परिपूर्ण थे नाटक सुखद अंत के साथ समाप्त होता है।

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