सबसे महत्वपूर्ण, लेकिन स्पॉटलाइट से दूर – भारत के ब्लू-कॉलर कर्मचारी: शशि कुमार, हेड ऑफ सेल्स, इनडीड इंडिया

दिल्ली: शशि कुमार, हेड ऑफ सेल्स, इनडीड इंडिया के अनुसार भारत के गतिशील शहरी केंद्रों में चुपचाप एक क्रांति आ रही है, जो ‘ब्लू-कॉलर कर्मियों’ की वृद्धि के साथ आगे बढ़ रही है, जिनमें प्लंबिंग, बिजली, कारपेंट्री, डिलीवरी एग्ज़िक्यूटिव्स, और टेक सपोर्ट आदि कामों में कुशल कर्मी शामिल हैं। ये शहर भारत के आर्थिक इंजन हैं, जहाँ की व्यस्त सड़कों पर बढ़ता इन्फ्रास्ट्रक्चर और उसके द्वारा उत्पन्न असीमित अवसर साफ दिखाई देते हैं। यह प्रगति कार्यबल की रीढ़ कहे जाने वाले इन शहरी नायकों द्वारा आगे बढ़ाई जा रही है। ये लोग त्योहारों पर घरों को रोशनी से जगमगाते हैं, कुछ ही मिनटों में लोगों तक आवश्यक सामग्री पहुँचाते हैं, और हमारे दैनिक जीवन के वो नायक बन जाते हैं, जिनके बारे में कोई बात नहीं करता। शहरों में होते विस्तार के साथ ये कर्मचारी बहुत आवश्यक हो गए हैं। वो न केवल हमारे इन्फ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने बल्कि भारत की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
इनडीड के आँकड़ों के मुताबिक इस प्रगति के बीच विशेष कार्यों के लिए मांग सबसे ज्यादा बढ़ी है, जो विभिन्न उद्योगों को जोड़कर रोजगार के स्थिर अवसर लेकर आए हैं। इनडीड पर ट्रेंड हो रही जॉब्स के अनुसार ई-कॉमर्स के विकास से लेकर एमएसएमई में हुई वृद्धि तक ये तीन ब्लू-कॉलर नौकरियाँ सबसे महत्वपूर्ण हो गई हैं, जिनके लिए जॉब पोस्टिंग में सबसे ज्यादा उछाल आया है।
ब्लू-कॉलर नौकरियों के लिए सबसे ज्यादा मांग में रहने वाले पदों में इलेक्ट्रिशियन का पद भारत के विकसित होते शहरी ढांचे की नींव है। प्रतिमाह 16,300 रुपये के औसत मासिक वेतन के साथ इलेक्ट्रिशियन घरों, ऑफिसों, और उद्योगों में इलेक्ट्रिकल सिस्टम स्थापित करने, उसके रखरखाव और रिपेयरिंग का काम संभालते हैं। सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों के बिजलीकरण में तेजी लाने और स्मार्ट सिटीज़ के विस्तार के साथ कुशल इलेक्ट्रिशियंस की मांग भी लगातार बढ़ रही है। रिन्युएबल एनर्जी और सस्टेनेबल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता जोर इस मांग को और बढ़ा रहा है तथा इलेक्ट्रिशियंस के लिए स्थायी अवसर उत्पन्न कर रहा है।
दूसरा महत्वपूर्ण कार्य कैशियर का है, जो भारत के विकसित होते हुए रिटेल और सर्विस सेक्टर में सुगम लेन-देन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 14,500 रुपये प्रतिमाह के औसत वेतन के साथ कैशियर भुगतान का काम संभालते हैं, विनिमय की प्रक्रिया करते हैं, और आवश्यक ग्राहक सेवा प्रदान करते हैं। संगठित रिटेल, सुपरमार्केट्स और क्विक सर्विस रेस्टोरैंट्स में हुई वृद्धि के साथ कैशियर की मांग भी अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गई है। इसके अलावा डिजिटल पेमेंट सिस्टम की हुई वृद्धि और रिटेल में ग्राहक सेवा पर बढ़ते फोकस के साथ कुशल कैशियर की मांग बढ़ी है, जो आधुनिक पॉईंट-ऑफ-सेल सिस्टम को संभालने में कुशल हैं।
वहीं, डिलीवरी एक्ज़िक्यूटिव्स और ड्राईवर्स भी भारत के शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यात्रियों को ले जाने से लेकर वस्तुओं की आपूर्ति तक भारतीय शहरों को गतिशील बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका है। ड्राईवर्स का वेतन औसतन 14,400 रुपये प्रतिमाह होता है, तथा उनकी भूमिका पारंपरिक परिवहन से लेकर लॉजिस्टिक्स, अंतिम छोर तक आपूर्ति, और राईड-हेलिंग सेवाओं तक बढ़ चुकी है। फैलते भारतीय शहरों और ई-कॉमर्स/क्विक कॉमर्स की बढ़ती मांग के साथ ये सेवाएं उत्पादों व सेवाओं की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बहुत आवश्यक हैं।
इन कुशल कर्मियों की बढ़ती मांग से भारत के शहरों में हो रहा व्यापक परिवर्तन प्रदर्शित होता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास, व्यवसायों के विस्तार, और ग्राहकों की बढ़ती जरूरतों के साथ भारत के कार्यबल में ब्लूकॉलर कर्मचारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, और देश को निरंतर वृद्धि एवं विकास के मार्ग पर आगे ले जाएंगे। इसलिए इन नौकरियों की अहमियत को समझकर उन्हें महत्व और सहयोग दिया जाना आवश्यक है।

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