50% बाजार हिस्सेदारी की राह पर वेदांता एल्यूमिनियम

- वैल्यू एडेड उत्पादों से बढ़ाएगी मार्जिन
- भारत की एल्यूमिनियम उत्पादन क्षमता को बढ़ाएगी वेदांता
वेदांता एल्यूमिनियम, जो भारत की सबसे बड़ी एल्यूमिनियम उत्पादक कंपनी है और प्राथमिक उत्पादकों में घरेलू बाजार का लगभग आधा हिस्सा रखती है, देश में तेजी से बढ़ती एल्यूमिनियम मांग का लाभ उठाने की मजबूत स्थिति में है । अभी कपंनी एल्यूमिनियम के प्राथमिक उत्पादकों में घरेलू बाजार का लगभग आधा हिस्सा रखती है, दरअसल देश में एल्यूमिनियम की मांग बहुत तेज़ी से बढ़ रही है,भारत में एल्यूमिनियम की मांग सालाना 6% की दर से बढ़ रही है, जोकि दुनिया की औसतन एल्यूमिनियम की मांग से बहुत ज्य़ादा है। इस मांग को पूरा करने के लिए कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ा रही है, साथ ही कैप्टिव खदानों को चालू करने की योजना पर भी काम कर रही है।
कंपनी बढ़ती एल्यूमिनियम की मांग को पूरा करने के लिए भारत एल्यूमिनियम कंपनी (बाल्को) के स्मेल्टर की क्षमता 435 KT बढ़ाकर 10 लाख टन करने की योजना पर काम कर रही है, जिससे बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। दरअसल एल्यूमिनियम के निर्यात से ज्य़ादा फायदा उसको घरेलू बाज़ार में बेचने पर है, इससे कंपनी के मार्जिन में भी सुधार की उम्मीद है।
इसके साथ ही कंपनी हाई मार्जिन वाले वैल्यू एडेड प्रोडक्ट बनाने की दिशा में भी काम कर रही है, कंपनी अपनी कुल बिक्री में इन उत्पादों की हिस्सेदारी 90% से अधिक करने की कोशिश कर रही है। इनमें भवन निर्माण, रेलवे, ऑटो और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों के लिए बिलेट्स; बाल्को में निर्मित रोल्ड प्रोडक्ट्स, जो ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल, पावर, इंसुलेशन और पैकेजिंग क्षेत्रों में उपयोग किए जाने वाले उत्पादन होंगे। साथ ही ऑटो सेक्टर और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्राइमरी फाउंड्री अलॉय भी इसमें शामिल हैं।
कंपनी का उत्पाद पोर्टफोलियो हॉट और लिक्विड मेटल, वायर रॉड, इन्गॉट व अलॉय इन्गॉट, बिलेट्स, स्लैब, रोल्ड प्रोडक्ट्स, सो इन्गॉट, एल्युमिनियम सिलिकॉन (AlSi) टी-इन्गॉट, फ्लिप कॉइल्स और कम कार्बन वैरिएंट ‘रेस्टोरा’ व ‘रेस्टोरा अल्ट्रा’ तक फैला है। इतनी अधिक रेंज होने का फायदा भी कंपनी को मिलता है और साथ ही नए वैल्यू एडेड उत्पादों की वजह से कंपनी बेहतर स्थिति में पहुंचेगी। दरअसल देश में 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक वाहन हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा गया है, इसकी वजह से ईवी की मांग तेज़ी से बढ़ रही है और साथ ही प्रीमियम एल्यूमिनियम की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। इसको पूरा करने के लिए कंपनी लगभग ₹30,000 करोड़ का निवेश कर रही है, जिसमें से बड़ा हिस्सा पहले ही विस्तार योजना में लगाया जा चुका है। कंपनी निवेश चक्र के ‘हार्वेस्ट फेज’ में प्रवेश कर रही है। कंपनी ओडिशा में ₹1.3 लाख करोड़ की ग्रीनफील्ड एल्यूमिनियम स्मेल्टर परियोजना भी विकसित कर रही है, जिसमें 30 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता वाला स्मेल्टर और 4,900 मेगावाट का कैप्टिव पावर प्लांट शामिल होगा। इससे भारत की वैश्विक एल्यूमिनियम उत्पादन क्षमता में ख़ासी बढ़ोतरी होगी।
