74% एम्प्लॉयर्स को उम्मीद है कि वो पीक सीजन के बाद भी फेस्टिव हायरिंग में रखे गए लोगों को काम पर बनाए रखेंगे: इनडीड

53% एम्प्लॉयर्स को उम्मीद है कि इस साल फेस्टिव हायरिंग बढ़ेगी, जबकि एक्टिव हायरिंग 2025 के मुकाबले काफी पहले शुरू हो रही है

भारत. 13 अक्टूबर, 2026: भारत में फेस्टिव सीजन अपने पीक पर पहुंच रहा है। इनडीड के नए आंकड़ों के मुताबिक, अब फेस्टिव सीजन में होने वाली हायरिंग सिर्फ कुछ समय के लिए बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए नहीं है। कंपनियां इस बार पहले से ही हायरिंग शुरू कर रही हैं और जरूरत के हिसाब से ज्यादा फ्लेक्सिबल टीम तैयार कर रही हैं। कंपनियां फेस्टिव सीजन में रखे गए कर्मचारियों को आगे भी नौकरी पर बनाए रखने का विचार कर रही हैं। इनडीड के ‘फेस्टिव सीज़न आउटलुक 2026’ के मुताबिक, 74% एम्प्लॉयर्स को उम्मीद है कि वे 2026 में फेस्टिव सीजन के दौरान रखे गए कम से कम 10% कर्मचारियों को पीक सीजन खत्म होने के बाद भी नौकरी पर बनाए रखेंगे। यह सब नौकरी बढ़ाने, दोबारा कॉन्ट्रैक्ट करने या लंबे समय की नौकरी में बदलने के जरिए हो सकता है। इस तरह की हायरिंग की सबसे ज्यादा जरूरत डिलीवरी, वेयरहाउस, प्रोडक्शन, ट्रांसपोर्ट और सामान पहुंचाने जैसे कामों में है।

आधे से अधिक, यानी 53% एप्लॉयर्स को उम्मीद है कि 2025 के मुकाबले इस साल फेस्टिव हायरिंग बढ़ेगी। खास बात यह है कि कंपनियां इस बार हायरिंग की तैयारी पहले ही शुरू कर रही हैं। दस में से लगभग सात (69%) ने हायरिंग शुरू कर दी है या इसके सितंबर में शुरू होने की उम्मीद थी। पिछले साल यह आंकड़ा सिर्फ 34% था। वहीं, 66% कंपनियों ने अगस्त तक वर्कफोर्स प्लानिंग शुरू कर दी थी या करने वाली थीं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 40% यानी 26% कम था।

इनडीड इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर शशि कुमार ने बताया कि, “इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। फेस्टिव सीजन में कंपनियां अब सिर्फ कुछ समय के लिए लोगों को नौकरी पर नहीं रख रही हैं, बल्कि अच्छे कर्मचारियों को आगे भी अपने साथ जोड़ने के बारे में सोच रही हैं। फेस्टिव सीजन में काम बढ़ने पर कंपनियों को ज्यादा लोगों की जरूरत होती है। लेकिन अब कंपनियां समझ रही हैं कि यह हायरिंग सिर्फ कुछ समय के लिए नहीं होनी चाहिए। अगर हायरिंग पहले शुरू की जाए और अच्छा काम करने वाले लोगों को आगे भी नौकरी दी जाए, तो फेस्टिव सीजन अच्छे कर्मचारियों को पहचानने का अच्छा मौका बन सकता है।”

फेस्टिव सीजन में अब ऑपरेशनल कामों के लिए ज्यादा हायरिंग:

फेस्टिव सीजन में बढ़ती खरीदारी के साथ डिलीवरी और वेयरहाउस के काम करने वाले लोगों की मांग भी बढ़ रही है। इस दौरान डिलीवरी और लास्ट-माइल डिलीवरी एक्ज़िक्यूटिव्स एवं वेयरहाउस एसोसिएट्स, पिकर्स एवं पैकर्स की मांग सबसे अधिक यानी 29% रही। इसके बाद, प्रोडक्शन, असेंबली और पैकेजिंग के लिए मांग 27% थी। इस पैटर्न को वित्त वर्ष 2024-25 की मांग भी प्रदर्शित करती है, जब रिटेल और सेल्स (33%), डिलीवरी (25%) और लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग (20%) ब्लू-कॉलर हायरिंग में सबसे ऊपर थे। इससे साफ है कि फेस्टिव अर्थव्यवस्था में फ्रंटलाइन ऑपरेशंस का महत्व लगातार बना हुआ है।

लेकिन एम्प्लॉयर्स को सिर्फ ज्यादा लोग नहीं चाहिए। करीब आधे एम्प्लॉयर्स (47%) का कहना है कि त्योहारों के सीजन में ऐसे लोगों को ढूंढना सबसे मुश्किल है, जो भरोसेमंद हों और शिफ्ट, रात या वीकेंड में काम करने के लिए तैयार हों। पिछले साल भी यही चुनौती देखने को मिली थी। तब सिर्फ 43% एम्प्लॉयर्स ने माना था कि त्योहारों पर रखे गए कर्मचारी जॉब-रेडी थे, जबकि 71% एम्प्लॉयर्स ने कहा था कि कर्मचारियों द्वारा परफॉरमेंस ना देना या बीच में नौकरी छोड़ देना एक आम समस्या थी। इससे साफ है कि अब त्योहारों के दौरान हायरिंग का मतलब सिर्फ ज्यादा लोगों को रखना नहीं है, बल्कि ऐसे लोगों को चुनना है जो काम के लिए तैयार हों। कम समय में बढ़ने वाली मांग के दौरान वही कर्मचारी ज्यादा काम के साबित होते हैं, जो जल्दी काम शुरू कर सकें, काम की जरूरत के हिसाब से खुद को ढाल सकें और पूरे पीक सीजन में भरोसे के साथ काम करते रहें।

देशभर में बढ़ रहे नौकरी के मौके:

देश के छोटे शहरों और कस्बों में भी हायरिंग की डिमांड बढ़ रही है। लगभग आधे (49%) एम्प्लॉयर्स को उम्मीद है कि टियर-2 शहरों ग्रोथ देखने को मिलेगी। इसकी वजह संगठित रिटेल, ई-कॉमर्स और ग्राहकों की बढ़ती मांग है। वहीं, 38% का मानना है कि टियर-3 शहरों और छोटे कस्बों में भी अवसर बढ़ेंगे क्योंकि इन जगहों पर डिलीवरी और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। मेट्रो शहरों की अहमियत बनी रहेगी। 38% को अभी भी उम्मीद है कि ग्रोथ बड़े शहरों में केंद्रित रहेगी। कुल मिलाकर, नौकरी के मौके अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं। छोटे शहरों और कस्बों में भी रोजगार के नए मौके बन रहे हैं।

अस्थायी नौकरी, लेकिन आगे काम मिलने की उम्मीद:

त्योहारों के समय बढ़ने वाले काम के लिए कंपनियां ज्यादा लोगों को कुछ समय के लिए रखेंगी। करीब 75% लोगों को कॉन्ट्रैक्ट, टेम्परेरी, गिग या पार्ट-टाइम काम मिलेगा। वहीं करीब 25% लोगों को स्थायी फुल-टाइम नौकरी मिलेगी।

लेकिन कर्मचारी सिर्फ कुछ महीनों की नौकरी नहीं चाहते। वे चाहते हैं कि आगे भी काम मिलने का मौका हो। 32% लोग 3 महीने तक की त्योहार वाली नौकरी तभी करेंगे, जब नौकरी आगे बढ़ने या स्थायी होने की उम्मीद हो। वहीं 31% लोग सिर्फ लंबे समय या स्थायी नौकरी ही करना चाहते हैं। इनडीड की पिछली रिपोर्ट में भी यही बात सामने आई थी। वित्त वर्ष 2024-25 में 83% नौकरी तलाशने वालों ने कहा था कि वे अस्थायी या गिग काम के बजाय स्थायी और फुल-टाइम नौकरी पसंद करते हैं। यानी लोग जरूरत के हिसाब से अस्थायी काम करने को तैयार हैं, लेकिन स्थायी नौकरी और नौकरी की सुरक्षा उनके लिए ज्यादा जरूरी है।

सिर्फ ज्यादा पैसे ही जरूरी नहीं:

त्योहारों में काम करने वाले लोगों के लिए सिर्फ ज्यादा सैलरी ही जरूरी नहीं है। 10 में से 7 लोग ऐसी नौकरी चाहते हैं, जिसमें आगे भी काम मिलने का मौका हो। 35% लोग सामान्य सैलरी के साथ ऐसी नौकरी पसंद करेंगे, जिसमें आगे काम जारी रहने की साफ उम्मीद हो। वहीं 36% लोग थोड़ी ज्यादा सैलरी के साथ ऐसी नौकरी चुनेंगे, जिसमें आगे काम बढ़ने की संभावना हो। सिर्फ 13% लोग ऐसी नौकरी करेंगे, जिसमें ज्यादा पैसे मिलें लेकिन आगे काम मिलने की कोई उम्मीद न हो। लोगों के लिए समय पर सैलरी, नौकरी आगे बढ़ने की संभावना और काम की साफ जानकारी भी बहुत जरूरी है। यानी लोग त्योहारों में सिर्फ पैसे कमाने के लिए काम नहीं करना चाहते, वे ऐसी नौकरी चाहते हैं जिसमें आगे भी काम मिलने की उम्मीद हो।

शशि कुमार ने आगे बताया कि, “आमतौर पर माना जाता है कि लोग कुछ समय की नौकरी ज्यादा पैसे कमाने के लिए करते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। लोग यह भी देखते हैं कि नौकरी खत्म होने के बाद उन्हें आगे क्या फायदा मिलेगा। अगर नौकरी से अनुभव मिले और आगे भी काम मिलने की उम्मीद हो, तो यह उनके लिए ज्यादा फायदेमंद है। इससे साफ है कि लोग थोड़े समय की नौकरी करते हुए भी अपने आगे के करियर के बारे में सोचते हैं।”

फेस्टिव सीजन के बाद:

फेस्टिव हायरिंग का असली टेस्ट रश के खत्म होने के बाद होगा। पीक डिमांड के लिए रखी गई वर्कफोर्स कुछ स्थायी नतीजे छोड़ कर जाती है। नए अनुभव वाले लोग, टेलेंट की बेहतर समझ रखने वाले एम्प्लॉयर, और जबरदस्त मैच, जो पारंपरिक हायरिंग में संभव नहीं होते। जहाँ एम्प्लॉयर्स ज्यादा जल्दी हायरिंग की योजना बना रहे हैं, वहीं कर्मचारी अवसरों के बारे में ज्यादा सोच-समझकर निर्णय ले रहे हैं। फेस्टिव सीजन केवल अस्थायी तौर से मांग नहीं बढ़ा रहा है, बल्कि यह कैंडिडेट्स के लिए बड़े लेबर मार्केट में प्रवेश करने, खोजने और मोबिलिटी बनाए रखने का अवसर बनता जा रहा है।     

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