अमृता विश्वविद्यालय को टी.एच.ई सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट रेटिंग्स 2026 में विश्व में 37वां स्थान

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, गरीबी उन्मूलन, स्वच्छ जल एवं स्वच्छता तथा सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा में विश्वविद्यालय ने वैश्विक शीर्ष 25 में बनाई जगह

नेशनल, 24 जून 2026: अमृता विश्व विद्यापीठम ने टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट रेटिंग्स 2026 में “इंडस्ट्री, इनोवेशन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर” (SDG 9) श्रेणी में भारत में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG) 9 के तहत लचीले बुनियादी ढांचे के निर्माण, समावेशी एवं सतत औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने तथा नवाचार को प्रोत्साहित करने में विश्वविद्यालय के योगदान को दर्शाती है।

पूर्व में THE इम्पैक्ट रैंकिंग्स के नाम से जानी जाने वाली यह प्रतिष्ठित वैश्विक रैंकिंग दुनिया की एकमात्र ऐसी मूल्यांकन प्रणाली है जो विश्वविद्यालयों के संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को आगे बढ़ाने में योगदान का आकलन करती है। अमृता की कुल वैश्विक रैंकिंग 37वीं रही, जिससे वह 115 से अधिक देशों और क्षेत्रों के 1,500 से अधिक संस्थानों के बीच दुनिया के अग्रणी विश्वविद्यालयों में शामिल हो गया। इन परिणामों की घोषणा आज इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित ग्लोबल सस्टेनेबल डेवलपमेंट कांग्रेस 2026 में की गई।

विश्व स्तर पर अमृता विश्वविद्यालय ने पाँच SDGs—गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (SDG 4), लैंगिक समानता (SDG 5), गरीबी उन्मूलन (SDG 1), स्वच्छ जल एवं स्वच्छता (SDG 6) तथा सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा (SDG 7)—में शीर्ष 25 विश्वविद्यालयों में स्थान प्राप्त किया।

इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय ने “इंडस्ट्री, इनोवेशन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर” (SDG 9) और “जलवायु कार्रवाई” (SDG 13) में विश्व के शीर्ष 50 संस्थानों में स्थान बनाया। वहीं “अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण” (SDG 3) में शीर्ष 100 में स्थान हासिल किया। एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में विश्वविद्यालय पहली बार “गरीबी उन्मूलन” (SDG 1), “शून्य भूख” (SDG 2) और “सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा” (SDG 7) श्रेणियों में भी रैंकिंग में शामिल हुआ।

विश्वविद्यालय की कुलाधिपति एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक पूज्य श्री माता अमृतानंदमयी देवी (अम्मा) ने THE सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट रेटिंग्स का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल विश्वविद्यालयों और शोधकर्ताओं का मूल्यांकन केवल वित्तपोषण, प्रकाशनों या बौद्धिक उपलब्धियों के आधार पर नहीं करती, बल्कि समाज पर उनके वास्तविक प्रभाव को भी महत्व देती है। अम्मा की “करुणा-आधारित अनुसंधान” की दृष्टि ने ग्रामीण भारत में अनेक मानवीय पहलों को जन्म दिया है।

अम्मा ने कहा, हमें यह भी देखना चाहिए कि हम अपने शोध का उपयोग समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्गों की सेवा के लिए कितना कर पाए हैं। तभी हमारा प्रभाव अधिक व्यापक और सार्थक बनता है। सतत विकास के प्रयासों में हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जब हम समाज की नींव में खड़े लोगों को सशक्त बनाते हैं, तभी पूरे समाज की संरचना मजबूत और स्वस्थ बनती है।

अमृता विश्व विद्यापीठम की प्रो-वाइस चांसलर एवं स्कूल फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर्स की डीन डॉ. मनीषा वी. रमेश ने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के मूल्यों और उसके कार्यों के बीच गहरे सामंजस्य को दर्शाती है।

डॉ. मनीषा ने कहा, इंडस्ट्री, इनोवेशन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत में प्रथम स्थान प्राप्त करना उस विश्वास की पुष्टि है जिसने वर्षों से हमारे कार्यों का मार्गदर्शन किया है—तकनीक का वास्तविक मूल्य तभी है जब वह उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों से लेकर दूरदराज के गांवों में स्वच्छ जल उपलब्ध कराने तक, हम अपने शोध को उसके प्रकाशन से नहीं बल्कि उससे सुरक्षित और बेहतर हुए जीवनों से मापते हैं। भारत के 2,800 गांवों में हमारे सामुदायिक कार्य यह दर्शाते हैं कि वास्तविक प्रभाव तब पैदा होता है जब शोध को लोगों के जीवन सुधारने वाले समाधानों में बदला जाता है। यह सम्मान उन सभी समुदायों का है जिन्होंने नवाचार और सेवा की इस यात्रा में हमारा साथ दिया।

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