IOC ने 2036 ओलिंपिक की बिड प्रक्रिया पर लगाया “पॉज़”, भारत की मेजबानी पर फैसला टला

IOC ने 2036 की बिडिंग प्रक्रिया पर लगाई रोक

26 जून 2025 को स्विट्ज़रलैंड के लॉज़ान में आयोजित अपनी कार्यकारी बोर्ड की पहली बैठक में नई IOC अध्यक्ष क्रिस्टी कॉवेंट्री ने घोषणा की कि “सम्पूर्ण बिडिंग प्रक्रिया को रोका गया है और भविष्य में मेजबान शहरों के चयन की प्रक्रिया की पुनः समीक्षा हेतु एक कार्य समूह गठित किया जाएगा।” यह कदम टेबल पर तभी उठाया गया जब कई सदस्य देशों ने पारंपरिक वोटिंग की जगह “फ्यूचर होस्ट कमीशन द्वारा चयन” की वर्तमान पद्धति पर पारदर्शिता और सम्मिलता की कमी को लेकर सवाल खड़े किए थे ।

IOC के पूर्व अध्यक्ष थॉमस बाक ने इसी पद्धति के तहत 2028 लॉस एंजिल्स और 2032 ब्रिसबेन को मेजबान देश घोषित किया था, जिसमें आईओसी सदस्यों की भागीदारी न्यूनतम थी । कॉवेंट्री ने स्पष्ट किया कि मेजबानों का चुनाव तभी होगा जब कार्य समूह यह तय कर ले कि ‘कब’ और ‘कैसे’ यह निर्णय सबसे उपयुक्त रूप से लिए जाएं ।


भारत की बोली और इसका वर्तमान महत्व

भारत ने अक्टूबर 2023 में Letter of Intent (LOI) प्रस्तुत कर 2036 ओलिंपिक की मेजबानी में रुचि जताई थी । इसके बाद India Olympic Association (IOA) और गुजरात सरकार सहित केंद्रीय स्तर पर प्रतिनिधिमंडल ने “कंटिन्युअस डायलॉग” चरण में प्रवेश किया था ।

कॉवेंट्री के फैसले के बावजूद, उनकी टीम ने यह स्पष्ट किया कि “30 जून से 2 जुलाई तक भारत का उच्च‑स्तरीय प्रतिनिधिमंडल Lausanne में आईओसी सदस्यों से मुलाकात करेगा और उनसे बातचीत जारी रहेगी।” यह दर्शाता है कि भारत अपनी दावेदारी को मजबूत करने में जुटा है, लेकिन अंकगणितीय निर्णायक वोलमेल निर्णय के लिए अब और समय चाहिए होगा।

IOC के लॉज़ान स्थित मुख्यालय में अगले सप्ताह होने वाली यह बैठक पहले से ही निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा है, और कॉवेंट्री ने कहा कि यह “पहली जानकारी प्राप्त करने तथा संभावनाओं को समझने का अवसर होगी।”


क्रिस्टी कॉवेंट्री: एक ऐतिहासिक नेता

स्विमिंग करियर और ओलंपिक चमक

  • 16 सितंबर 1983 को ज़िम्बाब्वे की राजधानी हारारे में जन्मी क्रिस्टी कॉवेंट्री ज़िम्बाब्वे की सर्वाधिक पदक विजेता ओलंपियन हैं ।
  • उन्होंने पाँच ओलंपिक (2000, 2004, 2008, 2012, 2016) में हिस्सा लिया और कुल 7 मेडल जीते: दो गल्ड, चार सिल्वर और एक ब्रॉन्ज ।
  • उनकी स्विमिंग शैली बैकस्ट्रोक और इन्डिविजुअल मेडली में विशिष्ट थी।

राजनीतिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि

  • 2018 में ज़िम्बाब्वे की युवा, खेल, कला और मनोरंजन मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला ।
  • IOC में उन्होंने Athletes’ Commission की अध्यक्षता करके एथलीटों के हितों के लिए काम किया ।

आईओसी की पहली अफ़्रीकी और महिला अध्यक्ष

  • मार्च 2025 में कोस्टा नवारिनो, ग्रीस में आयोजित 144वीं IOC सत्र में उन्हें पहली महिला और पहली अफ्रीकी IOC अध्यक्ष चुना गया ।
  • उन्होंने पहले महाशक्ति — थॉमस बाक — को मात देकर प्रथम सफलता हासिल की ।
  • कॉवेंट्री ने कार्यकाल की शुरुआत जून 2025 में की, जिस अवधि में वे लैंगिक समानता, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार‑रहित आवंटन सुनिश्चित करेंगी ।

नेतृत्व दर्शन

  • उनके मकसद में IOC को अधिक समावेशी, निष्पक्ष और राष्ट्रों के साथ घनिष्ठ बनाने का संकल्प शामिल है ।
  • लॉस एंजिल्स 2028 जैसे बड़े आयोजनों की तैयारी में उन्होंने “हम हॉर्ट के सर्वोत्तम पहलुओं को सम्मिलित करेंगे” ।
  • महिला वर्ग की सुरक्षा पर ध्यान देते हुए उन्होंने महिला मुक्केबाज़ी (Paris 2024) विवाद के बाद “एक कार्य समूह” बनाने की घोषणा की ।

अब किन चुनौतियों का सामना और आगे की राह?

  1. 2036 मेजबान निर्णय का समय
    IOC सदस्यों को कार्रवाई में शामिल करने तथा “कब निर्णय करें” प्रश्न का हल निकालना कॉवेंट्री की पहली प्राथमिकता है ।
    भारत सहित अन्य दावेदार देशों की बोली पर इसका सीधा असर होगा। निर्णय अब संभवतः 2026 या इससे बाद तक टल सकता है।
  2. पारदर्शिता और समावेशी ढांचा
    कमिशन आधारित चयन प्रणाली को बदलकर इसे अधिक लोकतांत्रिक एवं खुला बनाना कॉवेंट्री का लक्ष्य है ।
  3. अंतर्राष्ट्रीय और राजनीतिक दबाव
    रूस पर प्रतिबंध, ट्रांसजेंडर एथलीटों की भागीदारी, और मैचिंग मध्य पूर्व व अफ्रीका जैसे क्रयशील बाजारों से नए स्पॉन्सर ढूंढ़ना प्रमुख दिक्कतें होंगी ।
  4. भारत की भूमिका
    नरेंद्र मोदी स्टेडियम हेतु पिचिंग और निता अंबानी के IOC सदस्य होने से भारत की बोली में वज़न है ।
    मगर क्रिस्टी की लोकसंवाद नीति यह दिखाती है कि अब निर्णय तिथि और रुपरेखा दोनों पर चर्चा होगी।

निष्कर्ष

क्रिस्टी कॉवेंट्री के नेतृत्व में IOC एक नए युग में प्रवेश कर रहा है—जहां पारदर्शिता, समावेशिता और सदस्यता में सक्रिय भागीदारी प्राथमिकता होगी। 2036 ओलिंपिक की मेजबानी के निर्णय की प्रक्रिया वर्तमान में स्थगित है, लेकिन भारत जैसी महत्वाकांक्षी दावेदार की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

भारत का प्रतिनिधिमंडल Lausanne मंथन की प्रक्रिया में भाग लेगा और कॉवेंट्री के प्रस्तावित सुधारों का लाभ उठाने की उम्मीद है। भविष्य के मेजबान की घोषणा 2026 या उसके बाद हो सकती है, लेकिन प्रक्रिया में शुद्धिकरण से समता और विकास के मार्ग खुलेंगे।

Share This Post

22 thoughts on “IOC ने 2036 ओलिंपिक की बिड प्रक्रिया पर लगाया “पॉज़”, भारत की मेजबानी पर फैसला टला

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *