कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन गुलवीर सिंह और हरजिंदर कौर ने रचा इतिहास बॉक्सिंग में तीन पदक पक्के

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए यादगार दिन

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पांचवें दिन भारतीय खिलाड़ियों ने एक बार फिर अपने दमदार प्रदर्शन से देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। भारतीय एथलीटों ने दो रजत पदक जीतकर पदक तालिका में अपनी मौजूदगी मजबूत की। उत्तर प्रदेश के स्टार धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की दस हजार मीटर दौड़ में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल जीतकर नया इतिहास रच दिया। वहीं महिला वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया।

इसके अलावा भारतीय बॉक्सिंग टीम ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए तीन पदक लगभग सुनिश्चित कर दिए हैं। तीनों भारतीय मुक्केबाज अपने मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में पहुंच चुके हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाले दोनों हारने वाले खिलाड़ियों को भी कांस्य पदक मिलता है। ऐसे में भारत के खाते में कम से कम तीन और पदक जुड़ना तय है।

हालांकि भारत दो सिल्वर जीतने के बावजूद पदक तालिका में आठवें स्थान से नौवें स्थान पर खिसक गया है क्योंकि अन्य देशों ने अधिक स्वर्ण पदक जीते हैं। फिलहाल भारत के खाते में दो गोल्ड सहित कुल बारह पदक दर्ज हो चुके हैं।

गुलवीर सिंह ने दस हजार मीटर दौड़ में रचा नया इतिहास

भारत के उभरते हुए लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की दस हजार मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीत लिया। इसके साथ ही वह इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के लिए बेहद खास मानी जा रही है।

स्कॉटस्टाउन स्टेडियम में लगातार हो रही बारिश और गीले ट्रैक के बावजूद गुलवीर ने शानदार धैर्य और रणनीति का प्रदर्शन किया। उन्होंने पूरी रेस सत्ताईस मिनट उनचास दशमलव अठहत्तर सेकेंड में पूरी की। अंतिम लैप की शुरुआत में वह चौथे स्थान पर थे लेकिन आखिरी क्षणों में जबरदस्त स्पीड बढ़ाते हुए दूसरे स्थान पर पहुंच गए और सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया।

ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन ने गोल्ड मेडल जीता जबकि आइल ऑफ मैन के मुल्लार्की ने कांस्य पदक हासिल किया।

सेना में भर्ती की तैयारी से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर

सत्ताईस वर्षीय गुलवीर सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिरसा गांव के निवासी हैं। वह भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं। उनकी सफलता की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है।

गुलवीर ने शुरुआत में सेना में भर्ती होने के उद्देश्य से दौड़ना शुरू किया था। वर्ष दो हजार अठारह में ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में शामिल होने के बाद उन्होंने एथलेटिक्स को गंभीरता से अपनाया। लगातार कठिन प्रशिक्षण और अनुशासन की बदौलत उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी अलग पहचान बनाई।

कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका यह सिल्वर मेडल आने वाले वर्षों में भारतीय लंबी दूरी की दौड़ के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

हरजिंदर कौर ने फिर बढ़ाया भारत का गौरव

महिला वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने उनहत्तर किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने कुल दो सौ सत्ताईस किलोग्राम वजन उठाया और भारत को प्रतियोगिता का एक और महत्वपूर्ण पदक दिलाया।

हरजिंदर ने स्नैच में एक सौ एक किलोग्राम वजन उठाकर अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में एक सौ छब्बीस किलोग्राम वजन उठाकर कुल दो सौ सत्ताईस किलोग्राम के साथ दूसरा स्थान हासिल किया।

इस स्पर्धा में कनाडा की चार्लोट सिमोन्यू ने कुल दो सौ चालीस किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता जबकि ऑस्ट्रेलिया की नया फीबी हेमैन को कांस्य पदक मिला।

कबड्डी से वेटलिफ्टिंग तक प्रेरणादायक यात्रा

हरजिंदर कौर पंजाब के नाभा के महेश गांव की रहने वाली हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने अपने खेल जीवन की शुरुआत वेटलिफ्टिंग से नहीं बल्कि कबड्डी और रस्साकशी से की थी।

उनके कोच परविंदर शर्मा ने उनकी असाधारण ताकत और मांसपेशियों को देखकर उन्हें वेटलिफ्टिंग अपनाने की सलाह दी। हरजिंदर बचपन में घर पर चारा काटने वाली भारी मशीन चलाने में परिवार की मदद करती थीं। इस मेहनत ने उनकी शारीरिक क्षमता को मजबूत बनाया और बाद में यही ताकत उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई।

कॉमनवेल्थ गेम्स दो हजार बाईस में उन्होंने कांस्य पदक जीता था। अब दो हजार छब्बीस में सिल्वर जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उनका अगला लक्ष्य स्वर्ण पदक है।

वेटलिफ्टिंग में भारत का शानदार दबदबा

कॉमनवेल्थ गेम्स दो हजार छब्बीस में वेटलिफ्टिंग भारत के लिए सबसे सफल खेलों में से एक बनकर उभरा है। हरजिंदर कौर के सिल्वर के साथ भारत के खाते में इस खेल में सात पदक हो चुके हैं।

भारत के लिए मीराबाई चानू ने गोल्ड मेडल जीता। ऋषिकांत सिंह ज्ञानेश्वरी यादव राजा मुथुपांडी अजय बाबू और हरजिंदर कौर ने सिल्वर मेडल हासिल किए जबकि बिंदियारानी देवी ने कांस्य पदक जीता।

यह प्रदर्शन दर्शाता है कि भारतीय वेटलिफ्टिंग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है और भविष्य में भी देश को कई बड़े अंतरराष्ट्रीय पदक मिलने की उम्मीद है।

मणिपुर के खिलाड़ियों ने दिखाई अपनी ताकत

भारत की वेटलिफ्टिंग सफलता में मणिपुर के खिलाड़ियों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। मीराबाई चानू ऋषिकांत सिंह और बिंदियारानी देवी ने भारत के लिए पदक जीतकर राज्य की खेल प्रतिभा को फिर साबित किया है।

इन खिलाड़ियों ने यह दिखाया कि सीमित संसाधनों के बावजूद समर्पण और मेहनत से विश्व स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।

बॉक्सिंग में भारत के तीन पदक लगभग तय

भारतीय बॉक्सिंग टीम ने भी शानदार प्रदर्शन किया। महिला मुक्केबाज प्रीति पवार और प्रिया घांघस के साथ पुरुष मुक्केबाज जादूमणि ने अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली।

प्रीति पवार ने चौवन किलोग्राम वर्ग में नॉर्दर्न आयरलैंड की निकोल क्लाइड को एकतरफा मुकाबले में हराया। प्रिया घांघस ने साठ किलोग्राम वर्ग में स्कॉटलैंड की निया मिचेल को मात दी। वहीं जादूमणि ने पचपन किलोग्राम वर्ग में जाम्बिया के म्वेंगो म्वाले को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

अब तीनों खिलाड़ियों के पास स्वर्ण पदक जीतने का शानदार अवसर है। यदि वे सेमीफाइनल जीतते हैं तो फाइनल में पहुंचकर गोल्ड के लिए मुकाबला करेंगे।

बॉक्सिंग के नियम से भारत को मिला फायदा

कॉमनवेल्थ गेम्स में बॉक्सिंग का नियम अन्य खेलों से अलग है। यहां कांस्य पदक के लिए अलग मुकाबला नहीं होता। सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों खिलाड़ियों को संयुक्त रूप से कांस्य पदक दिया जाता है।

यही कारण है कि भारत के तीनों मुक्केबाजों के कम से कम कांस्य पदक पहले ही सुनिश्चित हो चुके हैं। अब पूरा देश उनसे स्वर्ण पदक की उम्मीद कर रहा है।

निरुपमा देवी पदक से चूकीं

महिला तिरसठ किलोग्राम भार वर्ग में भारत की निरुपमा देवी सेरम अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद पदक नहीं जीत सकीं। उन्होंने स्नैच में तिरानवे किलोग्राम वजन उठाकर पांचवां स्थान हासिल किया।

हालांकि क्लीन एंड जर्क में एक सौ तेइस किलोग्राम वजन उठाने के तीनों प्रयास असफल रहे। इसके कारण उन्हें कोई अंक नहीं मिला और वह पदक की दौड़ से बाहर हो गईं।

इस वर्ग में कनाडा की ओलंपिक चैंपियन मॉड शैरॉन ने स्वर्ण पदक जीता जबकि इंग्लैंड की सारा डेविस स्मेल को सिल्वर और नाउरू की फेमिली क्रिस्टी नोट्टे को कांस्य पदक मिला।

एथलेटिक्स में विशाल टीके ने बढ़ाई उम्मीद

भारतीय धावक विशाल टीके ने पुरुष चार सौ मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली। उन्होंने अपनी हीट में छियालिस दशमलव उनचास सेकेंड का समय निकालकर दूसरा स्थान हासिल किया।

दूसरी ओर राजेश रमेश सैंतालीस दशमलव तैंतालीस सेकेंड के समय के साथ कुल सत्रहवें स्थान पर रहे और अगले दौर में जगह नहीं बना सके।

विशाल से अब भारत को फाइनल में पहुंचने और पदक जीतने की उम्मीद है।

स्विमिंग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने किया प्रभावित

भारतीय तैराक श्रीहरि नटराज ने पुरुष सौ मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया। उन्होंने पचपन दशमलव अट्ठावन सेकेंड का समय निकाला।

हालांकि साजन प्रकाश पचास मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में अगले दौर में जगह नहीं बना सके।

पैरा स्विमिंग में कार्तिक बुडीगिना और अली इमाम ने पुरुष पचास मीटर फ्रीस्टाइल एस तेरह वर्ग के फाइनल में प्रवेश कर भारत की उम्मीदों को और मजबूत किया।

पदक तालिका में भारत की स्थिति

भारत अब तक दो स्वर्ण पांच रजत और पांच कांस्य सहित कुल बारह पदक जीत चुका है। हालांकि अन्य देशों के बेहतर स्वर्ण प्रदर्शन के कारण भारत पदक तालिका में नौवें स्थान पर पहुंच गया है।

ऑस्ट्रेलिया पैंतीस स्वर्ण सहित कुल अस्सी पदकों के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है। आने वाले दिनों में बॉक्सिंग एथलेटिक्स स्विमिंग और अन्य स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से कई और पदकों की उम्मीद की जा रही है।

भारत के लिए उम्मीदों से भरा आगे का सफर

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है। गुलवीर सिंह और हरजिंदर कौर की ऐतिहासिक उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि भारत अब हर खेल में नई पहचान बना रहा है। बॉक्सिंग में तीन पदक लगभग तय हैं जबकि कई अन्य खिलाड़ी भी फाइनल की ओर बढ़ रहे हैं।

यदि भारतीय खिलाड़ी इसी आत्मविश्वास और संघर्ष के साथ प्रदर्शन जारी रखते हैं तो आने वाले दिनों में पदकों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। यह प्रदर्शन न केवल खिलाड़ियों की मेहनत का परिणाम है बल्कि भारतीय खेलों के उज्ज्वल भविष्य का भी संकेत है। पूरे देश की नजर अब आगामी मुकाबलों पर है जहां भारतीय खिलाड़ी स्वर्णिम इतिहास लिखने के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेंगे।

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  • October 13, 2026 at 12:42 am
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