भारत में नौकरी बाजार ने पकड़ी रफ्तार, तीन महीने की गिरावट थमी; जॉब पोस्टिंग 8.3% सालाना दर से बढ़ीं
डेटा के अनुसार भारत में नौकरी का बाजार साल की शुरुआत में हुए उतार-चढ़ाव के बाद अब धीरे-धीरे स्थिर हो रहा है। हेल्थकेयर और केयर-इकोनॉमी से जुड़े कामों में नौकरियां बढ़ रही हैं, जबकि टेक्नोलॉजी में नियुक्तियाँ अभी भी कम हो रही हैं।
भारत, 26 अगस्त 2026: जुलाई 2026 में इनडीड पर भारत में नौकरियों की पोस्टिंग 1.2% बढ़ीं। इससे पहले लगातार तीन महीनों तक नौकरी के पोस्टिंग में गिरावट आई थी। इसके बावजूद, पिछले साल जुलाई के मुकाबले इस साल नौकरी के पोस्टिंग 8.3% ज्यादा रहीं। हालांकि नौकरी के बाजार में अभी भी उतार-चढ़ाव है, लेकिन कंपनियां लगातार लोगों को नौकरी पर रख रही हैं। महामारी से पहले के मुकाबले भारत में नौकरी के पोस्टिंग अब भी 84% ज्यादा हैं।

इनडीड एपीएसी के सीनियर इकोनॉमिस्ट कैलम पिकरिंग ने बताया कि,”जुलाई में भारत में नौकरी के अवसरों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई और लगातार तीन महीनों से जारी गिरावट रुक गई। यह बढ़ोतरी भले ही धीरे हुई है, लेकिन देश में नौकरी के अवसर अभी भी महामारी से पहले के समय की तुलना में काफी ज्यादा हैं। इनडीड के अनुसार, दूसरे देशों के मुकाबले भारत में नौकरियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे पता चलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। अगर अलग-अलग क्षेत्रों को देखें तो तस्वीर थोड़ी अलग है। हेल्थकेयर और केयर-इकॉनमी से जुड़े कामों, जैसे मेडिकल टेक्नीशियन और चाइल्डकेयर से जुड़ी नौकरियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। वहीं टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में, खासकर आईटी और सॉफ्टवेयर से जुड़ी नौकरियों की मांग कम हो रही है। यानी देश की अर्थव्यवस्था भले ही अच्छी गति से बढ़ रही हो, लेकिन सभी क्षेत्रों में नौकरियों की मांग एक जैसी नहीं है।”
भारत में धीरे-धीरे ज्यादा लोग फ़ॉर्मल नौकरियों की ओर बढ़ रहे हैं। फ़ॉर्मल सेक्टर में नई नौकरियां पैदा होने की रफ्तार, देश में कुल रोजगार बढ़ने की रफ्तार से ज्यादा है। इसी बदलाव की वजह से भारत में इनडीड पर नौकरी के पोस्टिंग का स्तर दूसरे देशों के इनडीड बाजारों से बेहतर बना हुआ है। भारत में नौकरी के पोस्टिंग महामारी से पहले के स्तर से 82% ज्यादा हैं, जो दूसरे बाजारों की तुलना में काफी अधिक है।

हेल्थकेयर और केयर सेक्टर में नौकरियों की मांग सबसे ज्यादा, टेक्नोलॉजी में हायरिंग धीमी
पिछले तीन महीनों में करीब 80% नौकरी श्रेणियों में जॉब पोस्टिंग बढ़ीं, इससे पता चलता है कि भारत में कंपनियां कई अलग-अलग क्षेत्रों में भर्ती कर रही हैं, भले ही कुल जॉब पोस्टिंग का आंकड़ा बहुत ज्यादा न बढ़ा हो।
सबसे ज्यादा बढ़ोतरी इन क्षेत्रों में देखी गई:
० मेडिकल टेक्नीशियन की नौकरियों में 30% बढ़ोतरी हुई।
० चाइल्डकेयर में 26% बढ़ोतरी हुई।
० डॉक्टर और सर्जन की नौकरियों में 26% बढ़ोतरी हुई।
० थेरेपी से जुड़ी नौकरियों में 25% बढ़ोतरी हुई।
वहीं, टेक्नोलॉजी से जुड़ी नौकरियों में तस्वीर अलग रही। इनमें गिरावट दर्ज की गई:
० आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑपरेशंस और सपोर्ट में 24% कमी,
० सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में 18% कमी,
० डेटा और एनालिटिक्स में 14% कमी, और
० आईटी सिस्टम्स एवं सॉल्यूशंस में 11% की कमी दर्ज हुई।
हालांकि हाल के महीनों में टेक क्षेत्र में नौकरी पोस्टिंग कम हुई हैं, फिर भी कुल मिलाकर टेक से जुड़ी नौकरियां महामारी से पहले के स्तर से काफी ज्यादा हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों में टेक सेक्टर में नौकरियों की बढ़ोतरी की रफ्तार देश के बाकी क्षेत्रों की तुलना में धीमी रही है।

एआई अब सिर्फ टेक्नोलॉजी सेक्टर ही नहीं, बल्कि अलग-अलग नौकरियों के नाम और भूमिकाएं भी बदल रहा है।
अब ज्यादा से ज्यादा नौकरियों में एआई का असर दिखाई दे रहा है। यह बदलाव सिर्फ उन नौकरियों तक सीमित नहीं है, जिनमें एआई टूल बनाए जाते हैं, बल्कि कई पुरानी नौकरियों में भी एआई के कारण काम करने का तरीका और जिम्मेदारियां बदल रही हैं।
इनडीड के जॉब टाइटल्स के विश्लेषण के मुताबिक, मार्च 2026 की तिमाही में भारत में 349 जॉब टाइटल्स, यानी कुल टाइटल्स के करीब 6.6%, में एआई से जुड़ी जानकारी शामिल थी। यह संख्या पिछले एक साल में दोगुनी और पिछले दो साल में करीब चार गुना हो गई है। एआई से जुड़े इन जॉब टाइटल्स में अब 42% नॉन-टेक नौकरियां हैं। एक साल पहले यह आंकड़ा 39% और दो साल पहले 29% था। इससे साफ है कि एआई अब सिर्फ टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि आम नौकरियों में भी एक जरूरी स्किल बनता जा रहा है। एआई नई नौकरियां पैदा करने के साथ-साथ पहले से मौजूद नौकरियों के काम और जिम्मेदारियों को भी बदल रहा है।

हालात स्थिर, नौकरी बाजार में धीरे-धीरे सुधार
साल की शुरुआत में उतार-चढ़ाव के बाद भारत में नौकरी के अवसर अब धीरे-धीरे स्थिर होते दिखाई दे रहे हैं। भारत की औपचारिक अर्थव्यवस्था लगातार नई नौकरियां पैदा कर रही है, जिससे देश की आर्थिक प्रगति को मजबूती मिल रही है। वहीं, टेक्नोलॉजी और नॉन-टेक्नोलॉजी दोनों तरह की नौकरियों में एआई का बढ़ता इस्तेमाल दिखाता है कि देश का जॉब मार्केट अंदर से तेजी से बदल रहा है।
