मेटा अध्ययन से पता चला है कि लगभग 80% भारतीय खरीदार सोशल मीडिया पर नए उत्पाद खोजते हैं

सोशल मीडिया कैसे लिख रहा है भारत की खरीदारी की नई किताब
डिजिटल‑फर्स्ट युग में भारत के ग्राहक तेजी से इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म और उनके मार्गदर्शक कंटेंट की ओर मुड़ रहे हैं। एक हालिया Meta‑commissioned GWI सर्वे, जिसमें 16–64 वर्ष के 2,548 इंटरनेट यूज़र्स ने हिस्सा लिया, दर्शाता है कि लगभग 80% भारतीय खरीदार नए उत्पाद सोशल मीडिया के ज़रिए खोजते हैं, और इन खोजों का लगभग 96–98% Meta के प्लेटफॉर्म पर होता है, जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम ।
स्क्रॉल से कार्ट तक: उपभोक्ता का नया सफर
अब वो दौर गया जब विंडो‑शॉपिंग स्टोर विज़िट से शुरू होती थी। आज का “फिजिटल” ग्राहक (digital और physical का मेल) स्क्रॉल करके शुरुआत करता है। फेसबुक या इंस्टाग्राम पर मिलने वाली जानकारी, रील, वीडियो और इन्फ्लुएंसर्स की राय से वह स्टोर में जाकर निर्णय लेता है या वहीं ऑनलाइन खरीद भी करता है ।
मेघना अप्पराव का मानना
Meta India में ई‑कॉमर्स एवं रिटेल डायरेक्टर मेघना अप्पराव कहती हैं:
“Indian shoppers today are social‑first, mobile‑first, and video‑first — चाहे खरीदारी ऑनलाइन हो या ऑफलाइन।”
शॉर्ट‑फॉर्म वीडियो का असर
2–3 मिनट की रील या ब्रांड वीडियो ने खरीद निर्णय पर गहरा प्रभाव डाला है – लगभग 1/3 दर्शक खरीदने को प्रेरित होते हैं। विशेषकर लक्ज़री क्षेत्रों में ये प्रभाव और भी बढ़ जाता है ।
इन्फ्लुएंसर्स: नए भरोसेमंद सलाहकार
क्या पता चलता है? 6 में से 10 भारतीय ग्राहक राष्ट्रीय स्तर के इन्फ्लुएंसर्स को फॉलो करते हैं। ये कंटेंट क्रिएटर्स जागरूकता, भरोसा और निर्णय प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं – चाहे ऑनलाइन हो या ऑफलाइन खरीददारी ।
व्हाट्सऐप: चैट से शॉपिंग तक
व्हाट्सऐप अब केवल चैट ऐप नहीं बचा रहा; लगभग 60% ग्राहक तब खरीदारी करते हैं जब उन्हें प्लेटफ़ॉर्म पर ऑफर मिलता है ।
Meta की “Click‑to‑WhatsApp” और ोमनीचैनल एड सुविधा से कंपनियां सोशल + मैसेजिंग + फिजिकल अनुभव को जोड़ रही हैं। तानिष्क ने इससे 14× ऑफलाइन ROAS पाया, और ऑनलाइन ROAS में 40% की वृद्धि देखी ।
फिजिटल क्रांति
यहाँ दो व्यवहार प्रमुख हैं:
- वेबरूमिंग: ग्राहक पहले ऑनलाइन अनुसंधान करता है और फिर स्टोर में खरीदता है।
- शोरूमिंग: पहले स्टोर में जाकर उत्पाद देखता है, लेकिन बाद में ऑनलाइन खरीदता है।
अप्पराव कहती हैं:
“अगर आपका ब्रांड रील या स्टोरी में नहीं दिख रहा, तो आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह फुटफॉल खो रहे हैं।”
ब्रांड्स के लिए क्या मायने रखता है
ब्रांडों को अब अपने प्लेबुक में यह शामिल करना होगा:
- ओमनीचैनल रणनीति अपनाएं – सोशल, मैसेजिंग और स्टोर अनुभव को जोड़ें
- शॉपेबल वीडियो बनाएं – 2–3 मिनट की रील और आकर्षक कंटेंट पर फोकस करें
- क्रिएटर्स को जोड़ें – मैक्रो और माइक्रो दोनों इन्फ्लुएंसर्स के साथ काम करें
- मैसेजिंग कॉमर्स को सशक्त बनाएँ – व्हाट्सऐप जैसा प्लेटफ़ॉर्म उपयोग करें
- टचपॉइंट्स मापें – क्लिक, विजिट और रूपांतरण को एनालिटिक्स के ज़रिए ट्रैक करें
भविष्य की राह
Meta प्लेटफ़ॉर्म पर 3.8 अरब से ज़्यादा सक्रिय उपयोगकर्ता और भारत में तेजी से ग्रोथ के साथ, डिजिटल कॉमर्स में अपार अवसर मौजूद है ।
भाषाई और क्षेत्रीय बाजारों में vernacular कंटेंट, creator‑led कैंपेन और AI सुझाव का प्रयोग बढ़ा है।
निष्कर्ष
सोशल मीडिया अब सिर्फ प्रेरित नहीं करता—it इरफ्ेंस करता है। नए उत्पादों की खोज से लेकर अंतिम निर्णय तक, ये प्लेटफॉर्म और वहां का कंटेंट भारत के उपभोक्ता मस्तिष्क में गहरे जुड़े हैं।
जो ब्रांड strategic वीडियो, creator partnerships और messaging‑commerce को अपनाएंगे—वह नई ऊँचाइयों को छुएँगे। जो चूक जाएंगे, उन्हें उपभोक्ताओं की नज़र से आगे निकलना मुश्किल होगा।

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