अमृता का साइंस एवं इनोवेशन हब: मिज़ोरम में नई इमारत के साथ विकास की नई शुरुआत — तकनीक और करुणा से 9,000 जीवनों को सशक्त बनाया

मिज़ोरम विश्वविद्यालय में नवनिर्मित भवन के उद्घाटन के साथ, अमृता–मिज़ोरम साइंस, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन (एसटीआई) हब ने आदिवासी समुदायों के उत्थान हेतु विज्ञान और संवेदना को एक साथ लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

मिज़ोरम की सामुदायिक नवाचार यात्रा में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार के सहयोग से अमृता विश्व विद्यापीठम और मिज़ोरम विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित यह एसटीआई हब अब एक सशक्त भौतिक स्वरूप के साथ ग्रामीण विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान का केंद्र बनकर उभर रहा है — जहाँ विज्ञान समाज से जोड़ता है, और तकनीक जीवन बदलती है।

दो वर्ष पूर्व प्रारंभ किए गए इस हब ने अब तक राज्यभर में 9,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण एवं सेवाओं से लाभान्वित किया है — जिनमें खाद्य प्रसंस्करण, बांस हस्तशिल्प नवाचार, डिजिटल साक्षरता और स्वास्थ्य जागरूकता शामिल हैं। उल्लेखनीय बात यह है कि लाभार्थियों में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएँ हैं, जो ग्रामीण महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की एक शांत लेकिन मजबूत क्रांति की ओर संकेत करती हैं।

अमृता स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन और एसटीआई हब परियोजना के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, डॉ. रघु रामन ने कहा कि यह भवन अमृता की उत्तर-पूर्व भारत के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

“यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि विज्ञान और समाज के बीच एक सेतु है,” उन्होंने कहा।
“अमृता में हम मानते हैं कि तकनीक में मानवीय हृदय होना चाहिए। मिज़ोरम हब ने दिखाया है कि करुणा से प्रेरित अनुसंधान आत्मनिर्भर समुदायों का निर्माण कर सकता है। सोलर ड्रायर से लेकर डिजिटल उपकरणों तक — हम नवाचार को जड़ों से जोड़ रहे हैं।”

यह हब अमृता के लाइव-इन-लैब्स® और अम्माची लैब्स की विशेषज्ञता को एकीकृत करता है — जिसके माध्यम से पहाड़ी और ग्रामीण आवश्यकताओं के अनुरूप सस्ती, स्थानीय तकनीकें विकसित की गई हैं; जैसे — कृषि उत्पादों के लिए कम लागत वाले सोलर ड्रायर, पर्यावरण-अनुकूल बांस हस्तशिल्प उपकरण, और जल-शुद्धिकरण प्रणालियाँ। ये सभी समाधान ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर विकसित किए गए हैं, ताकि वे प्रासंगिक, सरल और समुदाय द्वारा स्वामित्व वाले हों।

मिज़ोरम सरकार के ग्रामीण विकास एवं प्रशासन मंत्री तथा मिज़ोरम विश्वविद्यालय से परियोजना के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, डॉ. लालनिलावमा ने इस हब को “ग्रामीण नवाचार के लिए एक निर्णायक मोड़” बताया।

उन्होंने कहा,
“अमृता के सहयोग ने हमारे सामुदायिक विकास के दृष्टिकोण को बदल दिया है। यह नया केंद्र ग्रामीण परिवारों को वैज्ञानिक समाधान प्रदान करने, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीविकोपार्जन को मजबूत बनाने में हमारी क्षमता को और गहरा करेगा।”

यह परियोजना भारत के ‘वोकल फॉर लोकल’ विज़न के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के कई सतत विकास लक्ष्यों — जैसे लैंगिक समानता, सम्मानजनक कार्य, और ज़िम्मेदार उपभोग — को भी मजबूती प्रदान करती है।

इस हब की प्रेरणा अमृता विश्व विद्यापीठम की कुलाधिपति माता अमृतानंदमयी देवी (अम्मा) की मानवता-केन्द्रित शिक्षा दर्शन से आती है। अम्मा के शब्दों में:
“ज्ञान तभी पूर्ण होता है जब वह समाज को ऊपर उठाता है।”
यह भाव अब इस नए भवन की नींव में अंकित है।

नए परिसर से अपने अगले चरण की शुरुआत करते हुए, अमृता–मिज़ोरम एसटीआई हब यह सिद्ध कर रहा है कि जब विज्ञान संवेदना के साथ आगे बढ़े, तब भारत के सबसे दूरस्थ क्षेत्र भी नवाचार के केंद्र बन सकते हैं।

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2 thoughts on “अमृता का साइंस एवं इनोवेशन हब: मिज़ोरम में नई इमारत के साथ विकास की नई शुरुआत — तकनीक और करुणा से 9,000 जीवनों को सशक्त बनाया

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