संजू सैमसन पर गौतम गंभीर के पुराने पोस्ट फिर वायरल आखिर क्यों नहीं मिल रहा संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन में मौका

संजू सैमसन पर बवाल क्यों बढ़ रहा है
भारतीय क्रिकेट में हर नई सीरीज के साथ कुछ न कुछ चर्चा का विषय बनता है और इस बार चर्चा के केंद्र में हैं संजू सैमसन। वह खिलाड़ी जिसे कभी टीम इंडिया के बड़े सितारों में से एक बनाने की बात होती थी। वह खिलाड़ी जिसे गौतम गंभीर ने भारत का सबसे बेहतरीन विकेटकीपर बल्लेबाज बताया था। और वही खिलाड़ी जो आज कई मैचों से प्लेइंग इलेवन में जगह पाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
सोशल मीडिया पर तीन पुराने पोस्ट वायरल हैं जिनमें गौतम गंभीर ने सैमसन की जोरदार वकालत की थी। लेकिन अब जब गंभीर टीम इंडिया के मुख्य कोच हैं, संजू लगातार बाहर बैठ रहे हैं। इसी विरोधाभास ने फैन्स को भड़का दिया है।
इस पूरे मामले में भावनाएं, आंकड़े, पुरानी बातें और वर्तमान चयन नीति सब शामिल हैं। आइए इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं।
गौतम गंभीर की पुरानी आवाज जो आज फिर गूंज रही है
गौतम गंभीर का नाम भारतीय क्रिकेट में उस शख्सियत के रूप में लिया जाता है जो अपनी बेबाक राय और मजबूत स्टैंड के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने जब 2019 से लेकर 2021 के बीच कई बार संजू सैमसन का समर्थन किया, तो यह सिर्फ एक खिलाड़ी की तारीफ नहीं थी, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर उनका स्पष्ट दृष्टिकोण था।
पहला वायरल पोस्ट
गंभीर ने कहा था कि यह हैरान करने वाली बात है कि संजू सैमसन को वह सम्मान और निरंतरता नहीं दी जा रही जिसकी वह असल में हकदार हैं। उन्होंने लिखा था कि दुनिया में बहुत कम बल्लेबाज हैं जिनमें संजू जैसा नैचुरल टैलेंट और आक्रामक क्षमता है।
दूसरा पोस्ट
गंभीर ने साफ शब्दों में कहा था कि संजू भारत का बेस्ट विकेटकीपर बल्लेबाज है और अगर कोई खिलाड़ी वर्ल्ड कप में नंबर चार पर बैटिंग कर सकता है तो वह सिर्फ संजू सैमसन है।
तीसरा पोस्ट
यह सबसे ज्यादा चर्चित पोस्ट है जिसमें गंभीर ने कहा था कि भले कोई बल्लेबाज 21 बार भी डक हो जाए, अगर उसमें प्रतिभा है और टीम को उसके कौशल की जरूरत है तो उसे ड्रॉप नहीं किया जाना चाहिए।
इन पोस्ट्स का मकसद स्पष्ट था। गंभीर संजू की तुलना में अन्य विकेटकीपरों और मध्य क्रम के बल्लेबाजों के मुकाबले उन्हें बेहतर विकल्प मानते थे।
कोच बनने के बाद गंभीर के फैसले क्यों दिख रहे अलग
अब सवाल उठता है कि अगर गंभीर इतने बड़े समर्थक थे तो फिर सैमसन टीम में लगातार नजरअंदाज क्यों किए जा रहे हैं। यह वही बिंदु है जिसे लेकर सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश है।
टीम संरचना में बदलाव
कोच बनने के बाद गंभीर सिर्फ किसी खिलाड़ी के टैलेंट नहीं, बल्कि पूरी टीम के संतुलन और रणनीति को देखते हैं। उनका मुख्य लक्ष्य है कि सही समय पर सही संयोजन के साथ टीम मैदान में उतरे।
शुभमन गिल की मजबूती
गिल ने हाल के वर्षों में ऐसा प्रदर्शन किया है कि उन्हें बाहर करना लगभग असंभव है। वह ओपनिंग में स्थिरता, बड़ी इनिंग खेलने की क्षमता और मैच समझदारी दोनों लेकर आए हैं।
विकेटकीपिंग विकल्पों की बढ़ती भीड़
ऋषभ पंत की वापसी, जितेश शर्मा की आक्रामक बल्लेबाजी, ईशान किशन का अनुभव, ये सब मिलकर प्रतिस्पर्धा को बेहद कठिन बनाते हैं।
टीम रणनीति में रोल की स्पष्टता
गंभीर का जोर हमेशा इस बात पर रहता है कि हर खिलाड़ी अपनी परिभाषित भूमिका में फिट बैठे। सैमसन ने पिछले कुछ वर्षों में ओपनिंग और मध्य क्रम दोनों में खेला और यही अस्थिरता उनके चयन के खिलाफ गई।
क्या संजू सैमसन को सही मौका मिला
यह प्रश्न फैन्स के बीच सबसे बड़ा है। इससे इनकार नहीं कि संजू को समय समय पर मौका मिला, लेकिन क्या उन्हें वैसा स्थायी मौका मिला जैसा कई अन्य खिलाड़ियों को मिलता है।
अच्छे आंकड़ों के बावजूद दुविधा
टी20 में संजू सैमसन के प्रदर्शन को देखें तो उन्होंने तीन शतक और एक शानदार अर्धशतक ओपनिंग के रूप में बनाए हैं। उनकी स्ट्राइक रेट हमेशा टीम के लिए फायदेमंद रही है।
दूसरी ओर, शुभमन गिल ने तकनीक और स्थिरता के सहारे एक बेहद मजबूत ओपनर के रूप में जगह बनाई है। लेकिन तुलना करें तो सैमसन का नैचुरल पावर-हिटिंग उन्हें अलग काबिलियत देता है।
निरंतरता की कमी का मुद्दा
सैमसन के खिलाफ सबसे बड़ा तर्क यही दिया जाता है कि वह लगातार रन नहीं बना पाए। कोच और चयनकर्ता हमेशा कहा करते हैं कि टीम को ऐसे खिलाड़ियों की आवश्यकता है जो हर परिस्थिति में टीम को स्थिरता दे सकें।
लेकिन समर्थकों का तर्क भी उतना ही मजबूत है कि जब तक किसी खिलाड़ी को लगातार दस पंद्रह मैचों का मौका नहीं मिलेगा, वह फॉर्म में कैसे आएगा।
संजू और गिल की तुलना क्यों हो रही है
यह तुलना इसलिए हो रही है क्योंकि दोनों की पोजीशन कहीं न कहीं एक जैसी मानी जाती है।
गिल की टेक्निकल क्लास
गिल ओपनिंग में पावर प्ले के अंदर गेंदबाजों को पढ़कर खेलते हैं और बड़ी इनिंग बनाने में माहिर हैं।
सैमसन की एक्सप्लोसिव बैटिंग
संजू हर फॉर्मेट में तेजी से रन बनाते हैं। उनकी शॉट-मेकर क्षमता मौजूदा भारतीय बल्लेबाजों में दुर्लभ मानी जाती है।
लेकिन क्रिकेट सिर्फ प्रतिभा नहीं, चयन नीति, संयोजन और रणनीति का खेल भी है। यही बात आज संजू के खिलाफ जा रही है।
क्या टीम इंडिया सैमसन को मिस कर रही है
इस सवाल पर क्रिकेट विशेषज्ञों की दो राय हैं।
पहली राय
टीम इंडिया के पास गिल, सूर्या, जितेश, पंत, हार्दिक, रोहित जैसे बल्लेबाज हैं जो किसी भी परिस्थिति में मैच जीत सकते हैं, ऐसे में सैमसन की कमी महसूस नहीं होती।
दूसरी राय
सैमसन जैसा गतिशील खिलाड़ी टी20 और एकदिवसीय फॉर्मेट में गेम चेंजर साबित हो सकता है। खासकर तब जब टीम को किसी ऐसे बल्लेबाज की जरूरत हो जो शुरुआत से ही प्रेशर में खेल सके।
गौतम गंभीर और संजू सैमसन का संबंध आगे कैसा
भले ही अभी संजू प्लेइंग इलेवन में नहीं हैं, लेकिन गंभीर और संजू के बीच कोई विवाद नहीं है। गंभीर हमेशा टैलेंट का सम्मान करते हैं और अगर टीम संतुलन अनुमति दे तो संजू को कभी भी शामिल किया जा सकता है।
गंभीर की फिलॉसफी
उनकी सोच हमेशा है कि टीम पहले, खिलाड़ी बाद में।
सैमसन का फोकस
वह अपने प्रदर्शन पर ध्यान दे रहे हैं। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल उनके लिए नए अवसर खोल सकते हैं।

क्या सैमसन को फिर मौका मिलेगा
सवाल यह नहीं कि मिलेगा या नहीं, बल्कि कब मिलेगा। क्रिकेट में हर खिलाड़ी का समय आता है और अगर संजू अपनी फॉर्म को बरकरार रखते हैं तो किसी भी बड़े टूर्नामेंट में वह फिर से टीम के लिए मैच विनर बन सकते हैं।
सैमसन के खेल में दम है, आत्मविश्वास है और बड़े शॉट्स का दुर्लभ गुण है। बस जरूरत है लगातार मौके और स्पष्ट भूमिका की।
निष्कर्ष
गौतम गंभीर के पुराने पोस्ट आज इसलिए वायरल हो रहे हैं क्योंकि उनमें लिखा हर शब्द आज भी संजू सैमसन की क्षमता की गवाही देता है। लेकिन टीम इंडिया की मौजूदा जरूरतें, चयन नीति और प्रतियोगिता की तीव्रता ने संजू के रास्ते को मुश्किल बना दिया है।
संजू सैमसन भारतीय क्रिकेट का वह अध्याय हैं जो अभी पूरा नहीं हुआ है।
उनकी कहानी अभी जारी है और जिस दिन उन्हें सही मौका मिला, वे वह खिलाड़ी साबित होंगे जो कभी कोच गंभीर ने कहा था
भारत का सबसे बेहतरीन विकेटकीपर बल्लेबाज।

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