एमेजॉन और आई.सी.आर.आई.एस.ए.टी ने पालघर, महाराष्ट्र में किसान दिवस मनाया

1,500 हेक्टेयर में चल रहे जल और भूमि संरक्षण अभियानों का उद्देश्य 700 आदिवासी किसान परिवारों के लिए जलवायु को बेहतर बनाना है

महाराष्ट्र, 21 अक्टूबर, 2026 – एमेजॉन और इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (आई.सी.आर.आई.एस.ए.टी) द्वारा 9 अक्टूबर, 2026 को पालघर जिले के अबितगढ़ गाँव में किसान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर खेती की विधियों में सुधार लाने और जल एवं भूमि के संरक्षण में स्थानीय किसानों द्वारा दिए जा रहे योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। इस ईवेंट में किसान परिवारों, फील्ड टीमों और पार्टनर्स ने हिस्सा लिया। इसमें खेती की सस्टेनेबल विधियों और ग्रामीण आजीविकाओं को सपोर्ट करने के लिए एमेजॉन और आई.सी.आर.आई.एस.ए.टी द्वारा किए जा रहे कार्यों को उजागर किया गया।

इस कार्यक्रम में शाहपुर चुनाव क्षेत्र के विधायक, माननीय श्री दौलत भीका दरोदा मौजूद थे। साथ ही, इसमें डॉ. अमोल वी. दहीफले, हेड, एग्रीकलचरल रिसर्च स्टेशन, पालघर और डॉ. एस.एस. सईद, जूनियर एग्रोनोमिस्ट, एग्रीकल्चरल रिसर्च स्टेशन, पालघर एवं आई.सी.आर.आई.एस.ए.टी वैज्ञानिकों एवं फील्ड टीमों, एमेजॉन के अधिकारियों और किसान समुदायों के सदस्यों ने भी हिस्सा लिया।

इस ईवेंट में पालघर जिले में 1,500 हेक्टेयर में चलाए जा रहे एमेजॉन- आई.सी.आर.आई.एस.ए.टी अभियान, ‘‘रीजनरेटिव लैंडस्केप फॉर ट्रांसफॉर्मिंग स्मॉलहोल्डर एग्री-फूड सिस्टम्स’’ की पहले साल की उपलब्धियां पेश की गईं। यह कार्यक्रम भूमि निम्नीकरण, पानी की कमी और विकेंद्रीकृत, समुदाय आधारित प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के माध्यम से छोटी जोत वाले किसानों की कमजारियों को दूर करने पर केंद्रित है। इस अभियान के अंतर्गत आज तक जल प्रबंधन के लिए 97 ठोस संरचनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इनमें अतिरिक्त जल को स्टोर करने वाली संरचनाएं, खेती के लिए तालाब, पक्के टैंक और नहरों को गहरा करने का काम शामिल है, जिससे लगभग 328,900 क्यूबिक मीटर की वॉटर हार्वेस्टिंग क्षमता का निर्माण हुआ है। इससे प्रोटेक्टिव इरीगेशन और शुष्क मौसम में भी खेती करने में मदद मिली है। पौधों की सेहत बेहतर हुई है, मिट्टी को पोषक तत्व मिले हैं और एग्रोफॉरेस्ट्री से 700 आदिवासी किसान परिवारों को लाभ मिला है। रबी के मौसम में इन परिवारों को खेती का ज्यादा आउटपुट मिलेगा और परिवारों की आय लगभग 80 प्रतिशत बढ़ेगी।

अनुराग खिलनानी, डायरेक्टर – डेटा सेंटर डिलीवरी, एपीएसी, एमेजॉन वेब सर्विसेज ने कहा, ‘‘एमेजॉन भारत में वॉटर पॉजिटिव हो चुका है। हम पानी की परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं, ताकि जल संसाधन मजबूत हों, जिससे स्थानीय समुदायों को मदद मिल सके। वैतरणा रिवर बेसिन मुंबई में 30 प्रतिशत से अधिक पेयजल की आपूर्ति करता है। इसलिए यह हमारे जल संरक्षण अभियानों के लिए महत्वपूर्ण है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से हमारा उद्देश्य स्थानीय किसानों को फसल की पैदावार बढ़ाने में मदद करना तथा हर साल अतिरिक्त फसलें उगाने में समर्थ बनाना है। साथ ही, हम वैतरणा रिवर सिस्टम में हर साल 1,300 मिलियन लीटर पानी की भरपाई करेंगे, जो लगभग 6,000 परिवारों की सालाना पानी की जरूरत के बराबर है।’’

डॉ. वेंकटराधा अकुराजू, सीनियर साईंटिस्ट – वडोज जोन हाईड्रोलॉजी, आई.सी.आर.आई.एस.ए.टी ने कहा, ‘‘एमेजॉन और स्थानीय किसानों के साथ हमारे सहयोग ने पानी और खाने की सुरक्षा के मामले में नतीजे देना शुरू कर दिए हैं। हमारे फील्ड डेटा से प्रदर्शित होता है कि परियोजना के इलाके में खरीफ फसल की पैदावार पहले के मुकाबले 20 प्रतिशत बढ़ी है। इससे भी अच्छी बात यह है कि किसानों के पास अब रबी फसलों के लिए पर्याप्त पानी है। रेनवॉटर हार्वेस्टिंग के प्रयासों ने इस मौसम में ग्राउंड वॉटर रिचार्ज में 328 मिलियन लीटर पानी का योगदान दिया है। 2027 में यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाने के बाद हर साल लगभग 1,300 मिलियन लीटर पानी की भरपाई होगी। यह रिचार्ज धीरे-धीरे वैतरणा नदी में पानी के स्तर को बनाए रखने में मदद करेगा, जो मुंबई में पीने के पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।’’

यह अभियान समुदायों की मदद करने की एमेजॉन की निरंतर प्रतिबद्धता प्रदर्शित करता है। इससे छोटी जोत वाले किसानों के लिए विज्ञान पर आधारित और जलवायु की रक्षा करने वाली कृषि को बढ़ावा देने के आई.सी.आर.आई.एस.ए.टी के मिशन में योगदान मिलेगा।

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