बिहार के मरीज का दुर्लभ फेफड़ों का ट्यूमर अमृता अस्पताल फरीदाबाद में बिना फेफड़ा निकाले सफलतापूर्वक किया गया इलाज

पटना / फरीदाबाद, जुलाई 2025: कई अस्पतालों से लौटाए जाने के बाद जब उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी थीं, तब बिहार
के 58 वर्षीय हरि नारायण सिंह को अमृता अस्पताल, फरीदाबाद में जीवन की नई सांस मिली। यहां डॉक्टरों की विशेषज्ञ
टीम ने एक जटिल और दुर्लभ एंडोब्रोंकियल कारसिनॉयड ट्यूमर को ऑपरेशन से हटाया—वो भी बिना फेफड़ा निकाले।


शुरुआती लक्षण जैसे कि सांस फूलना और सीटी चेस्ट में रुकावट, कई अस्पतालों में अस्थमा के रूप में गलत समझे गए।
अंततः एक सीटी स्कैन में उनके एयरवे में ट्यूमर की पुष्टि हुई। यह ट्यूमर फेफड़ों के कुल कैंसर मामलों का सिर्फ 5%
हिस्सा होता है, और अक्सर देर से पहचान में आता है।


“ इस केस की खासियत केवल इसका दुर्लभ ट्यूमर नहीं था, बल्कि यह था कि हम मरीज का पूरा फेफड़ा बचा पाए,” कहा
डॉ. समीर भाटे, सीनियर कंसल्टेंट और प्रमुख, कार्डियोथोरासिक सर्जरी, अमृता अस्पताल। “हमने पारंपरिक ऑपरेशन
(प्लमनॉक्टॉमी) की जगह स्लीव रिसेक्शन तकनीक अपनाई, जिससे ट्यूमर को हटाने के साथ-साथ फेफड़ों की कार्यक्षमता
भी सुरक्षित रही।”


इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में अमृता के पल्मोनोलॉजी विभाग की अहम भूमिका रही, जिसका नेतृत्व डॉ. अर्जुन
खन्ना, डॉ. सौरभ पाहुजा और डॉ. प्रदीप बजाड़ ने किया। मरीज की ब्रोंकोस्कोपी और सटीक निदान ने सर्जरी को संभव
बनाया।


खुले ऑपरेशन तकनीक से की गई यह सर्जरी पूरी तरह सफल रही और मरीज को बिना किसी जटिलता के स्वस्थ होकर
डिस्चार्ज कर दिया गया।
“ मैंने तो कभी इस बीमारी का नाम भी नहीं सुना था,” कहते हैं हरि नारायण सिंह। “लेकिन डॉ. समीर भाटे और डॉ. पाहुजा
ने मुझे बहुत सहजता से पूरी स्थिति समझाई। मुझे लगा मैं सबसे सुरक्षित हाथों में हूं।”

अमृता अस्पताल में यह केस एक मिसाल है—कैसे दुर्लभ बीमारियों का भी समय पर निदान और विशेषज्ञ देखभाल से
जीवन बचाया जा सकता है।
“ अगर यह ट्यूमर समय रहते नहीं पकड़ा जाता, तो मरीज की सांस की नली में भारी रक्तस्राव जानलेवा हो सकता था,” डॉ.
भाटे ने कहा। “हम चाहते हैं कि ऐसे मामलों में ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीजों को भी भरोसा और इलाज मिले।“


अमृता अस्पताल का यह प्रयास न केवल क्लिनिकल उत्कृष्टता का प्रमाण है, बल्कि यह उस भरोसे का भी प्रतीक है, जो हर
मरीज यहां लेकर आता है—एक आखिरी उम्मीद, जो यहां आकर हकीकत बन जाती है।

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