सेल्सफोर्स ने एजेंटफोर्स वॉयस में हिंदी भाषा की सपोर्ट दी

एजेंटिक एंटप्राईज़ व्यापक स्तर पर ज्यादा नैचुरल, मल्टीलिंग्वल और इंक्लुसिव कस्टमर अनुभव देने में समर्थ हुए
मुंबई, मई, 2026 – ए.आई सीआरएम में ग्लोबल लीडर, सेल्सफोर्स ने आज एजेंटफोर्स वॉयस में हिंदी भाषा की सपोर्ट को शामिल कर लिया। यह एजेंटिक ए.आई को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने तथा भारत में अलग-अलग भाषाओं वाले ग्राहकों को सेवाएं देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हिंदी भाषा की सपोर्ट से बिज़नेस भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक, हिंदी बोलने वाले ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दे पाएंगे। इससे टीमों को तय सुरक्षा नियमों के माध्यम से अपने ए.आई एजेंट के कामों पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा, जिससे भारत में व्यापक स्तर पर ज्यादा नैचुरल, इंक्लुसिव, भरोसेमंद और विस्तृत ग्राहक अनुभव प्रदान करने में मदद मिलेगी।
एजेंटिक एज: पारंपरिक आईवीआर से आगे
पारंपरिक वॉयस टूल रिजिड डिसीज़न ट्री पर निर्भर होते हैं। वहीं हिंदी में एजेंटिक वॉयस ऑटोनोमस एजेंसी की ओर बुनियादी परिवर्तन प्रदर्शित करती है। यह सेल्सफोर्स के भरोसेमंद एजेंटफोर्स प्लेटफॉर्म पर निर्मित है। एजेंटफोर्स वॉयस कन्वर्सेशनल ए.आई, एंटरप्राईज़ डेटा और बिज़नेस वर्कफ्लो को एक साथ लाती है, ताकि संगठन सामान्य वॉयस असिस्टैंस से एक समझदार, कार्रवाई आधारित कस्टमर-इंगेज़मेंट की ओर बढ़ सकें। बिज़नेस इसके बिल्ट-इन कंट्रोल, गार्डरेल और तय एक्शंस की मदद से परिभाषित कर सकते हैं कि ए.आई एजेंट कैसे ऑपरेट करेंगे, वो कब काम करेंगे और कब उनके लिए मानव हस्तक्षेप की जरूरत होगी। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि ग्राहक की बातचीत सुरक्षित, निरंतर और एंटरप्राईज़ की नीतियों के अनुरूप बनी रहे।
यह प्लेटफॉर्म हिंदी और हिंगलिश (हिंदी+इंग्लिश) के बीच नैचुरल कोड-स्विचिंग को समझने के लिए बनाया गया है। यह सिस्टम स्पीच को केवल ट्रांसक्राईब नहीं करती है, बल्कि एक्शन-ओरिएंटेड रीज़निंग भी करता है, ताकि जटिल टास्क पूरे हो सकें।
एडवांस्ड हिंदी वॉयस क्षमताओं की मदद से बिज़नेस ए.आई की पहुँच को टियर 2 और टियर 3 बाजारों में भी बढ़ा सकेंगे, जिससे उनके काम में ऑपरेशनल एफिशियंसी आएगी तथा फाईनेंशियल सर्विसेज़, टेलीकॉम, रिटेल और पब्लिक सेक्टरों में अभूतपूर्व अवसर भी प्राप्त होंगे।
भारत में ए.आई एडॉप्शन का अगला चरण शुरू होगा
भारत में मूल रूप से हिंदी बोलने वाले लगभग 528 मिलियन लोग हैं और लगभग 692 मिलियन लोग हिंदी को पहली, दूसरी या तीसरी भाषा के रूप में बोलते हैं। यानी भारत में लगभग 57 प्रतिशत आबादी हिंदी भाषा बोलती है और हिंदी यहाँ पर सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसलिए भारत में इंक्लुसिव, वॉयस-फर्स्ट ए.आई अनुभवों के विस्तार के लिए हिंदी भाषा एक महत्वपूर्ण गेटवे है। एजेंटफोर्स वॉयस में हिंदी भाषा शामिल हो जाने के बाद संगठन 24/7 वॉयस इनेबल्ड सपोर्ट द्वारा बेहतर कस्टमर सर्विस दे सकेंगे, कस्टमर को होने वाली दिक्कतों को कम कर सकेंगे और इंग्लिश की बजाय हिंदी बोलने वाले लाखों यूज़र्स तक अपनी पहुँच को बढ़ा सकेंगे।
ए.आई व्यवसायों द्वारा ग्राहक सेवा देने के लिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में भाषा द्वारा ही यह तय होगा कि कौन इन अनुभवों तक पहुँच सकेगा, इन पर विश्वास कर सकेगा और इनका लाभ ले सकेगा। एजेंटफोर्स के लिए हाल ही में पेश की गई 25 से अधिक भाषाओं को आगे बढ़ाते हुए सेल्सफोर्स की योजना आने वाले महीनों में भारत की और अधिक भाषाओं को इसमें शामिल करने की है, ताकि संगठन उस भविष्य की ओर बढ़ सकें, जिसमें ए.आई हर ग्राहक से बिल्कुल नैचुरल, इंक्लुसिव और स्थानीय परिवेश से जुड़े तरीके से बात कर सके।
अरुंधति भट्टाचार्य, प्रेसिडेंट एवं सी.ई.ओ, साउथ एशिया – सेल्सफोर्स ने कहा, ‘‘भारत में ए.आई का अगला अध्याय केवल कोड द्वारा नहीं लिखा जाएगा। यह यहाँ के लोगों की भाषा में बोला जाएगा। भारत में व्यापक स्तर पर प्रभाव उत्पन्न करने के लिए ए.आई को कन्वर्सेशनल, इंक्लुसिव और स्थानीय परिवेश से जुड़ा होना जरूरी है। डिजिटल परिवेश में संवाद का सबसे स्वाभाविक इंटरफेस वॉयस है, खासकर भारत के लोगों के लिए, जहाँ करोड़ों यूज़र्स सीधे मोबाईल और वॉयस-फर्स्ट अनुभवों का उपयोग कर रहे हैं। एजेंटफोर्स में हिंदी वॉयस क्षमताओं की मदद से हम व्यवसायों को ए.आई के माध्यम से कस्टमर सर्विस का नया तरीका प्रदान कर रहे हैं, जो न केवल शब्दों, बल्कि सांस्कृतिक बारीकियों, लहजों और विश्वास को भी समझता है। इससे ए.आई की क्षमता हर एंटरप्राईज़ और हर व्यक्ति तक पहुँच सकेगी, फिर भले ही उनकी भाषा कोई भी क्यों न हो।’’
डॉ. सत्य रामास्वामी, चीफ डिजिटल एवं टेक्नोलॉजी ऑफिसर, एयर इंडिया ने कहा, ‘‘अगली जनरेशन के कस्टमर अनुभव के लिए खासकर भारत जैसे देश में, जहाँ कई भाषाएं बोली जाती हैं, वॉयस एक महत्वपूर्ण इंटरफेस के रूप में उभर रही है। ए.आई के बढ़ते एडॉप्शन के साथ हिंदी जैसी स्थानीय भाषाओं की क्षमताएं डिजिटल इंटरैक्शन को ज्यादा नैचुरल, एक्सेसिबल और इंक्लुसिव बनाती हैं। एयरलाईन, जिसमें ग्राहकों को पूरी यात्रा के दौरान तेज व विश्वसनीय सपोर्ट की जरूरत होती है, उसमें वॉयस-आधारित ए.आई रिस्पॉन्सिवनेस बढ़ा सकती है, दिक्कतों को कम कर सकती है और व्यापक स्तर पर ज्यादा व्यक्तिगत सेवा प्रदान कर सकती है।

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