40 की उम्र में गदर मचाया पारस डोगरा ने, रणजी ट्रॉफी 2025-26 में जड़ा 32वां शतक – वसीम जाफर के बाद सबसे सफल बल्लेबाज बने

परिचय – अनुभव और जुनून का संगम
भारतीय घरेलू क्रिकेट में अगर किसी खिलाड़ी ने अपनी लंबी पारी से लोगों का दिल जीता है, तो वह नाम है पारस डोगरा। 40 साल की उम्र में भी यह दिग्गज बल्लेबाज अपने बल्ले से आग उगल रहा है। रणजी ट्रॉफी 2025-26 सीजन के पहले मैच में जम्मू और कश्मीर के लिए खेलते हुए पारस डोगरा ने मुंबई के खिलाफ शानदार नाबाद शतक जड़कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
यह उनका 32वां रणजी शतक था, जिससे वे भारतीय घरेलू क्रिकेट इतिहास में वसीम जाफर के बाद दूसरे सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं।
रणजी ट्रॉफी 2025-26 का धमाकेदार आगाज
श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में खेले जा रहे मुकाबले में जम्मू-कश्मीर की शुरुआत कुछ खास नहीं रही थी। टीम के शुरुआती बल्लेबाज जल्द ही पवेलियन लौट गए, लेकिन पारस डोगरा ने अपने अनुभव और धैर्य का परिचय देते हुए पारी को संभाला।
उन्होंने पिच की स्थिति को भांपते हुए शुरुआत में संयम से खेला और फिर धीरे-धीरे रनगति तेज की।
डोगरा ने शानदार कवर ड्राइव, स्ट्रेट ड्राइव और पुल शॉट्स की मदद से विपक्षी गेंदबाजों को बेबस कर दिया।
पारस डोगरा ने इस पारी में 112 नाबाद रन बनाए और जम्मू-कश्मीर को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। इस शतक ने न केवल उनकी टीम को बचाया, बल्कि यह भी साबित किया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है।
रणजी ट्रॉफी में सर्वाधिक शतक लगाने वाले बल्लेबाज
भारतीय घरेलू क्रिकेट में शतक लगाने की कला हर किसी के बस की बात नहीं होती। रणजी ट्रॉफी में लंबे समय से वसीम जाफर का नाम सबसे ऊपर रहा है, लेकिन अब पारस डोगरा ने उन्हें चुनौती देने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है।
रणजी ट्रॉफी में सर्वाधिक शतक लगाने वाले बल्लेबाज:
- वसीम जाफर – 41 शतक
- पारस डोगरा – 32 शतक
- अजय शर्मा – 31 शतक
- अमोल मजूमदार – 28 शतक
- ऋषिकेश कनितकर – 28 शतक
यह सूची भारतीय घरेलू क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों को दर्शाती है, और पारस डोगरा का नाम अब इस एलीट ग्रुप में मजबूती से दर्ज हो चुका है।
पारस डोगरा – हिमाचल से पुडुचेरी तक का सफर
पारस डोगरा का क्रिकेट करियर प्रेरणा की मिसाल है। उनका जन्म 19 नवंबर 1984 को हिमाचल प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिमाचल प्रदेश क्रिकेट टीम से की थी और लंबे समय तक वहां के लिए शानदार प्रदर्शन किया।
बाद में उन्होंने पुडुचेरी की ओर से भी खेला और वहां भी अपने बल्ले से खूब रन बनाए। अब वे जम्मू और कश्मीर टीम के लिए खेल रहे हैं, जहां उन्होंने अपने अनुभव से युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी उठाई है।
कभी हार नहीं मानी – फिटनेस और समर्पण का उदाहरण
40 की उम्र में जहां ज्यादातर खिलाड़ी संन्यास की सोचने लगते हैं, वहीं पारस डोगरा मैदान पर पहले से ज्यादा ऊर्जावान नजर आते हैं।
उनका कहना है कि “क्रिकेट मेरे लिए केवल खेल नहीं, एक साधना है।”
वे अपनी फिटनेस पर पूरा ध्यान देते हैं और हर मैच से पहले घंटों अभ्यास करते हैं।
उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें ऐसा मुकाम दिलाया है, जहां वे घरेलू क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में गिने जाते हैं।
मुंबई के खिलाफ यादगार पारी
मुंबई जैसी मजबूत टीम के खिलाफ डोगरा की पारी इसलिए भी खास रही क्योंकि मुंबई रणजी ट्रॉफी इतिहास की सबसे सफल टीम रही है। मुंबई के तेज और स्पिन गेंदबाजों ने पूरी कोशिश की उन्हें परेशान करने की, लेकिन पारस ने अपनी क्लास और तकनीक से सभी प्रयासों को नाकाम कर दिया।
उन्होंने अपनी पारी के दौरान मैदान के हर कोने में शॉट लगाए और सधी हुई बल्लेबाजी से रन जोड़े।
इस शतक ने न केवल पारस डोगरा को रिकॉर्ड बुक में और ऊंचा पहुंचाया, बल्कि टीम जम्मू-कश्मीर के आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाइयां दीं।
पारस डोगरा के अब तक के आंकड़े
- फर्स्ट क्लास मैच: 140 से अधिक
- रन: 10000+
- औसत: लगभग 50
- शतक: 32
- अर्धशतक: 45 से अधिक
- सर्वश्रेष्ठ स्कोर: 253 रन
ये आंकड़े दिखाते हैं कि पारस डोगरा केवल निरंतरता के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि घरेलू क्रिकेट में लंबे समय तक टिके रहने वाले खिलाड़ियों में से एक हैं।

रणजी ट्रॉफी में स्थिरता का नाम – पारस डोगरा
पारस डोगरा ने पिछले दो दशकों में घरेलू क्रिकेट में अपनी निरंतरता और प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को बार-बार प्रभावित किया है।
हालांकि उन्हें कभी भारतीय टीम के लिए खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन उन्होंने हर बार अपने बल्ले से यह साबित किया कि वे किसी भी स्तर पर खेलने की क्षमता रखते हैं।
उनकी बल्लेबाजी में धैर्य, तकनीक और पारी को लंबा खींचने की कला देखने लायक होती है। यही वजह है कि वे रणजी ट्रॉफी में लगातार प्रदर्शन करने वाले दुर्लभ खिलाड़ियों में से एक बन चुके हैं।
घरेलू क्रिकेट के मिस्टर कंसिस्टेंट
भारतीय क्रिकेट में वसीम जाफर को अगर मिस्टर कंसिस्टेंट कहा जाता है, तो पारस डोगरा भी उसी श्रेणी में आते हैं।
उन्होंने हमेशा टीम की परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी की और मुश्किल हालात में टीम को संकट से बाहर निकाला।
डोगरा ने निचले क्रम में भी कई बार शानदार पारियां खेली हैं और अपनी टीम को जीत की राह दिखाई है।
युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा
आज के समय में जब युवा खिलाड़ी टी20 क्रिकेट की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, पारस डोगरा जैसी शख्सियतें उन्हें याद दिलाती हैं कि टेस्ट और फर्स्ट क्लास क्रिकेट ही असली परीक्षा है।
उनका अनुशासन, कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणादायक है।
वे बताते हैं कि क्रिकेट में सफलता पाने के लिए सिर्फ टैलेंट नहीं, बल्कि धैर्य, निरंतरता और आत्मविश्वास जरूरी है।
वसीम जाफर से आगे निकलने की दौड़
वर्तमान में वसीम जाफर के नाम रणजी ट्रॉफी में 41 शतक हैं, और पारस डोगरा उनसे केवल नौ शतक पीछे हैं।
अगर वे अगले दो सीजन तक इसी लय में बने रहे, तो यह कोई असंभव लक्ष्य नहीं होगा कि वे जाफर को पीछे छोड़ दें।
उनकी फिटनेस और फॉर्म देखकर लगता है कि डोगरा आने वाले वर्षों में रणजी ट्रॉफी के सबसे महान बल्लेबाजों में से एक बन जाएंगे।
निष्कर्ष – पारस डोगरा का सफर अभी बाकी है
पारस डोगरा की कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर की नहीं, बल्कि जुनून, मेहनत और जज्बे की कहानी है।
40 साल की उम्र में भी उन्होंने यह साबित कर दिया कि सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती।
रणजी ट्रॉफी 2025-26 के इस धमाकेदार शतक ने उन्हें फिर सुर्खियों में ला दिया है।
उनकी पारी ने घरेलू क्रिकेट के महत्व को दोबारा उजागर किया और यह बताया कि भारतीय क्रिकेट में अब भी कई ऐसे सितारे हैं जो अपने समय से आगे खेल रहे हैं।

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