भारत में सांस्कृतिक भ्रमण करने की इच्छा बढ़ रही हैः स्काईस्कैनर की रिपोर्ट में सामने आया कि 2025 में 10 में से 8 भारतीय संस्कृति की खोज में यात्रा करना चाहते हैं
- 93 प्रतिशत भारतीयों को यदि विश्वसनीय सांस्कृतिक अनुभव मिलते हैं, तो वो कम मशहूर जगहों की यात्रा करने के लिए तैयार हैं।
- कोलकाता में दुर्गा पूजा (53 प्रतिशत), बरसाना की लट्ठमार होली (51 प्रतिशत) और केरला में ओनम (35 प्रतिशत) सर्वोच्च सांस्कृतिक अनुभव हैं, जिनमें इस साल भारतीय सैलानी शामिल होना चाहते हैं।
भारत, 28 अगस्त, 2025: प्रमुख ग्लोबल ट्रैवल ऐप, स्काईस्कैनर ने हाल ही में अपनी सांस्कृतिक पर्यटन रिपोर्ट जारी की है। इसमें भारतीय सैलानियों के बीच विश्वसनीय स्थानीय विरासत, परंपराओं एवं अनुभवों की खोज करने की बढ़ती इच्छा प्रदर्शित हुई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 82 प्रतिशत भारतीय सैलानी ऐसे स्थानों की यात्रा करना चाहते हैं, जो उन्हें सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करें। युवा पीढ़ी में मिलेनियल्स (84 प्रतिशत) और जेन ज़ी (80 प्रतिशत) की सांस्कृतिक अनुभवों की ओर दिलचस्पी बढ़ रही है। उनका यह जोश और अधिक गहराई की ओर आकर्षित हो रहा है क्योंकि अधिकांश सैलानी सांस्कृतिक पर्यटन को केवल संस्कृति को देखने तक सीमित नहीं मानते हैं। उनके अनुसार उनकी ट्रिप तब सफल होती है, जब वो उसके बारे में ज्ञान प्राप्त करते हैं। 39 प्रतिशत सैलानी अपने सफर को तब सफल मानते हैं, जब वो उस जगह और वहाँ के लोगों के बारे में कुछ नई जानकारी लेकर वापस आते हैं।
इस रिपोर्ट में एक जबरदस्त परिवर्तन भी सामने आया है। 76 प्रतिशत भारतीय सैलानियों ने किसी सांस्कृतिक समारोह में शामिल होने के लिए अपने सफर की योजना में परिवर्तन किया, जिससे प्रदर्शित होता है कि परंपरा और त्योहार अब छुट्टियों के निर्णय में पूरक गतिविधियाँ नहीं, बल्कि मुख्य कारण बन गई हैं। यह सांस्कृतिक जिज्ञासा किसी भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। हर 10 में से 7 सैलानियों ने कहा कि वो अपने देश में या विदेश में सांस्कृतिक अनुभव लेने के लिए तैयार हैं। भारतीय सैलानी मूलतः विश्वसनीय और दिलचस्प एडवेंचर पसंद करते हैं, जो उन्हें हिस्सा लेने, सीखने और परिवर्तनकारी कहानियों के साथ वापस लौटने का अवसर प्रदान करें।
सांस्कृतिक यात्रा में त्योहारों की ओर सबसे अधिक आकर्षण होता है।
भारतीय त्योहार सैलानियों को सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं। रिपोर्ट के अनुसारः
- आधे से अधिक भारतीय सैलानी (55 प्रतिशत) ने स्थानीय त्योहारों, मेलों या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
- कोलकाता में दुर्गा पूजा (53 प्रतिशत), बरसाना की लट्ठमार होली (51 प्रतिशत) और केरला में ओनम (35 प्रतिशत) सर्वोच्च सांस्कृतिक अनुभव हैं, जिनमें इस साल भारतीय सैलानी शामिल होने के लिए सबसे ज्यादा उत्सुक हैं।
- त्योहारों के अलावा, 53 प्रतिशत सैलानी ऐतिहासिक शहरों, जैसे जयपुर और वाराणसी की यात्रा करना चाहते हैं, जबकि 39 प्रतिशत सैलानी यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज़ साईट्स, जैसे आगरा का ताजमहल और कर्नाटक का हंपी देखना चाहते हैं। स्काईस्कैनर के डेटा में सामने आया कि भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक शहरों में से एक, वाराणसी के लिए की जाने वाली सर्च में पिछले साल के मुकाबले साल 2025 में 76 प्रतिशत वृद्धि हुई है ।
- वहीं अपने त्योहारों एवं परंपराओं, वास्तुकला के वैभव और स्थानीय विरासत के लिए मशहूर केरला (32 प्रतिशत) और राजस्थान (30 प्रतिशत) भी भारत में सांस्कृतिक राजधानियों के रूप में उभरे हैं।
कम मशहूर स्थानों की ओर बढ़ती रुचि
इनके अलावा, सैलानी ऐसे स्थानों की यात्रा करने के लिए उत्सुक हैं, जो भीड़ से अलग हैं और परंपराओं का संरक्षण करते हैं। 93 प्रतिशत सैलानी कम मशहूर स्थानों की यात्रा करना चाहते हैं, जहाँ उन्हें भीड़ से दूर विश्वसनीय परंपराओं का अनुभव लेने का मौका मिले। इन कम चर्चित स्थानों को तलाशने का एक तरीका है, स्काईस्कैनर का ‘एक्सप्लोर एवरीव्हेयर’ सर्च फीचर। इसमें ‘अंडररेटेड डेस्टिनेशंस’ और ‘आर्ट एंड कल्चर’ जैसे फिल्टर विकल्प होते हैं, जो परंपराओं में समृद्ध स्थानों की खोज करना बहुत आसान बना देते हैं।
नील घोष, स्काईस्कैनर ट्रैवल ट्रेंड्स एंड डेस्टिनेशन एक्सपर्ट ने कहा, ‘‘भारतीय सैलानी केवल मौजमस्ती के लिए छुट्टियाँ मनाने से आगे बढ़ रहे हैं। वो और अधिक गहरे अनुभव चाहते हैं, जिससे एक नई श्रेणी का जन्म हुआ है। यह श्रेणी है संस्कृति के प्रति उत्सुक सैलानियों की, जो ज्ञान, संपर्क और संतुष्टि की खोज में यात्रा करने निकलते हैं। उनके लिए यात्रा सफल तब होती है, जब वो ऐसी कहानियाँ लेकर वापस आते हैं, जो लोगों व स्थानों के बारे में उनकी समझ को बढ़ाती हैं। हमारी रिपोर्ट में सामने आया है कि 71 प्रतिशत सैलानी अपने परिवार के साथ यात्रा करना पसंद करते हैं। 62 प्रतिशत अपने दोस्तों के साथ तथा 56 प्रतिशत अपने पति या पत्नी के साथ सफर पर जाना चाहते हैं। इससे प्रदर्शित होता है कि आज की यात्रा केवल जगहों को देखने के लिए नहीं की जाती है, बल्कि गहरे जुड़ाव के लिए की जाती है। स्काईस्कैनर का ऑल-इन-वन ऐप इन सार्थक यात्राओं की योजना को किफायती और आसान बना देता है।’’
देखने से लेकर शामिल होने तक
जहाँ संस्कृति की ओर रूझान बढ़ रहा है, वहीं कुछ नए पैटर्न विकसित हो रहे हैं, जिनसे प्रदर्शित होता है कि भारतीय सैलानी परंपराओं को समझने के लिए किस प्रकार यात्रा की योजना बनाते हैं और उनका अनुभव लेते हैं। इस रिपोर्ट में सामने आया कि हर 10 में से लगभग 4 सैलानी विरासत ग्राम स्थलों या ईको-सांस्कृतिक समुदायों की खोज पर निकलना पसंद करते हैं। वहीं 38 प्रतिशत अलग-अलग स्वाद का अनुभव लेने के लिए सफर करते हैं, जिससे स्थानीय व्यंजनों की ओर ऐतिहासिक रूझान प्रदर्शित होता है। भारत के आर्थिक विकास एवं गवर्नेंस के बारे में शोध पर आधारित विचारों को आगे बढ़ाने वाले पॉलिसी थिंकटैंक, पहले इंडिया फाउंडेशन की एसोसिएट फैलो डॉ. अदिति रावत ने इस रूझान के बारे में कहा, ‘‘सांस्कृतिक पर्यटन भारतीय सैलानियों द्वारा अपने देश और दुनिया का अनुभव लेने का नजरिया बनता जा रहा है। सांस्कृतिक खोज के इस रूझान में आराम, लग्ज़री और मौजमस्ती भी शामिल हो रहे हैं, जिनके कारण सैलानी ज्यादा लंबे समय तक छुट्टियाँ मनाने और इस अनुभव में गहराई से शामिल होने के लिए प्रेरित होते हैं। बढ़ती उपलब्धता, मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर, और डिजिटल कनेक्टिविटी से प्रेरित यह रूझान यात्रा को केवल जगहों को देखने की बजाय उन कहानियों में शामिल होने के अनुभव में बदल रहा है, जिसमें सैलानी प्रत्येक जगह की विरासत, स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक अनुभवों में हिस्सा लेते हैं।’’
सुरक्षा और स्मार्ट प्लानिंग की है महत्वपूर्ण भूमिका
भारतीय सैलानियों के बीच यात्रा करने के लिए व्यवहारिक योजना की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सांस्कृतिक यात्रा के लिए आवश्यक हैंः
- सांस्कृतिक यात्रा के लिए सैलानी सबसे ज्यादा महत्व सुरक्षा (45 प्रतिशत) देते हैं, जिसके बाद विश्वसनीयता (33 प्रतिशत) और मौसम (31 प्रतिशत) का स्थान आता है।
- 41 प्रतिशत सैलानी एक से दो माह पहले ही यात्रा की योजना बना लेते हैं। वो अनेक प्रभावों से प्रेरणा लेते हैंः 45 प्रतिशत सैलानियों को प्रेरणा सोशल मीडिया से मिलती है, 39 प्रतिशत अपने परिवार और दोस्तों से प्रभावित होते हैं, तथा 27 प्रतिशत सैलानी स्काईस्कैनर जैसे ऐप्स की मदद से सही स्थान और डील तलाशते हैं।
- यात्रा की योजना में मूल्य पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाता है। 60 प्रतिशत के अनुसार त्योहारों के लिए उड़ानों को बुक करने के लिए सबसे अच्छे समय से योजना में सबसे ज्यादा मदद मिलती है, वहीं 58 प्रतिशत के अनुसार किरायों की तुलना स्मार्ट विकल्प चुनने में मदद करती है।
भारतीयों को यात्रा करने में मदद करने के लिए नील घोष ने आगे कहा, ‘‘जगहों की खोज करने के लिए सैलानी स्काईस्कैनर के ऐप-ओनली एआई फीचर में अपनी रुचि डाल सकते हैं। इसके बाद सैवी सर्च द्वारा उन्हें मंदिरों वाले शहरों, स्थानीय अनुभव देने वाले स्थानों, शाही महलों आदि को खोजने में मदद मिलती है। यह टूल दिए गए संकेतों के आधार पर स्थानों की सूची तैयार करता है, स्काईस्कैनर की फ्लाईट सर्च में ले जाता है, तथा आपको सबसे अच्छे मूल्यों की तुलना करने में समर्थ बनाता है। त्योहारों के आसपास छुट्टियों की योजना बनाने के लिए सबसे आसान तरीका है, ‘होल मंथ व्यू’, जो उन तारीखों के आसपास उड़ान के लिए सबसे सस्ते दिन तलाशने में मदद करता है। इस तरह की स्मार्ट प्लानिंग से किफायती मूल्य में सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त किए जा सकते हैं, और आप ऐसी यादों और जानकारी के साथ वापस आ सकते हैं, जो आजीवन आपके साथ बनी रहेंगी।’’
पर्यटन में व्यापक परिवर्तन
सैलानियों की सांस्कृतिक पर्यटन में बढ़ती रुचि इस बात का संकेत है कि देश में पर्यटन उद्योग का भविष्य सांस्कृतिक अनुभवों की ओर बढ़ रहा है। इस बारे में डॉ. अदिति रावत ने कहा, ‘‘इस परिवर्तन को सांस्कृतिक शहर और विश्वसनीय स्थानीय अनुभव गति दे रहे हैं, जो सैलानियों को स्थानीय लोगों और उनके जीवन से जुड़ने का अवसर देते हैं। उत्तर भारत का उदाहरण लें, तो यहाँ पर असाधारण सांस्कृतिक विविधता और अनछुए प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलते हैं, वहीं केरला में बैकवॉटर, शास्त्रीय कलारूप, और आयुर्वेद की परंपराएं सैलानियों को आकर्षित करते हैं। अरुणाचल प्रदेश में आदिवासी उत्सवों से लेकर असम की चाय और सेहत तथा थ्रिसुर की कथकली परफॉर्मेंस तक हर एक अनुभव उस जगह की अद्वितीय शक्ति का एहसास पेश करता है। मौजमस्ती के लिए यात्रा और देखो अपना देश, स्वदेश दर्शन 2.0, एवं एडॉप्ट ए हैरिटेज जैसे सरकारी अभियानों के साथ सांस्कृतिक खोज पर्यटन को भारत की पहचान के शक्तिशाली संरक्षक के रूप में स्थापित कर रही है। इससे अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है, हमारी विविधता हमारी वैश्विक संपत्ति बन रही है तथा स्थानीय जगहें एवं संस्कृति वैश्विक सैलानियों को आकर्षित करने का केंद्र बन रही हैं, जिससे स्थानीय समुदाय सशक्त बन रहे हैं और भारत में पर्यटन अर्थव्यवस्था के भविष्य को आकार मिल रहा है।’’

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