पर्ल एकेडमी और ब्रिटिश काउंसिल ने भारत-ब्रिटेन के डिजाइन छात्रों को जोड़ा

सालभर दोनों देशों के छात्रों ने बिना आमने-सामने मिले तैयार किए डिजाइन प्रोजेक्ट

नई दिल्ली, 10 सितंबर 2026: पर्ल एकेडमी और ब्रिटिश काउंसिल ने डिजाइन शिक्षा के जरिए भारत और ब्रिटेन के उच्च शिक्षा संस्थानों को एक साथ लाने की पहल की है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के छात्रों को साथ काम करने, एक-दूसरे की संस्कृति को समझने और अपने विचार साझा करने का मौका देना है। पिछले एक साल में पर्ल एकेडमी और ब्रिटेन के चार उच्च शिक्षा संस्थानों के छात्रों ने एक ब्रिटिश कलाकार के साथ काम किया। अलग-अलग देशों और समय क्षेत्रों में रहते हुए उन्होंने एक ही स्टूडियो में कभी साथ बैठे बिना कई डिजाइन प्रोजेक्ट तैयार किए।

सालभर साथ मिलकर किए गए इस काम को अब नई दिल्ली में लगी प्रदर्शनी ‘डिजाइन विदाउट बॉर्डर्स: क्रिएटिव फ्यूचर्स कलेक्टिव’ में लोगों के सामने रखा गया है। उद्घाटन समारोह में ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर बेन मेलर समेत शिक्षा, डिजाइन और टिकाऊ विकास के क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोग शामिल हुए। इस दौरान ‘रचनात्मकता ही 21वीं सदी की नई पूंजी है’ विषय पर पैनल चर्चा हुई। इसमें मैनचेस्टर स्कूल ऑफ आर्ट, मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी, ब्रिटेन में अंतरराष्ट्रीय मामलों की प्रमुख रेचल वी. नोल्स; के2 इंडिया की अध्यक्ष और सह-संस्थापक सुनीता कोहली; भारतीय फैशन डिजाइनर और टिकाऊ फैशन की समर्थक पायल जैन; ब्रिटिश काउंसिल की भारत में उप निदेशक और उत्तर भारत की निदेशक शैनन वेस्ट; और पर्ल एकेडमी की प्रेसिडेंट अदिति श्रीवास्तव शामिल हुईं।

इस साझेदारी में पर्ल एकेडमी के साथ मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी, नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी, लंदन कॉलेज ऑफ कंटेम्पररी आर्ट्स और बर्मिंघम सिटी यूनिवर्सिटी शामिल रहे। छात्रों ने कोलैबोरेटिव ऑनलाइन इंटरनेशनल लर्निंग (COIL) मॉडल के तहत काम किया। इसमें अलग-अलग देशों के छात्र डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पढ़ाई से जुड़े प्रोजेक्ट मिलकर तैयार करते हैं। प्रदर्शनी में पर्ल एकेडमी के फैशन डिजाइन छात्रों और ब्रिटिश कलाकार अलेक्जेंडर गोरलिज्की का एक प्रोजेक्ट भी शामिल है। इसमें गोरलिज्की ने छात्रों के साथ मिलकर भारतीय ब्लॉक और स्क्रीन प्रिंटिंग की पुरानी तकनीकों को नए तरीके से इस्तेमाल किया।

इन प्रोजेक्ट में भारतीय कारीगरी को आज के डिजाइन और तकनीक से जोड़ा गया। भारत और ब्रिटेन के छात्रों ने चीजों, तकनीकों और विचारों को अपने-अपने तरीके से नया रूप दिया। लंदन कॉलेज ऑफ कंटेम्पररी आर्ट्स के साथ सत्याग्रह से प्रेरित खादी कलेक्शन तैयार किया गया। बर्मिंघम सिटी यूनिवर्सिटी के साथ क्रिकेट के बेकार हो चुके सामान—दस्ताने, पैड और यूनिफॉर्म आदि—से दो पोशाकें बनाई गईं। उन पर कांथा कढ़ाई की गई और खेल में महिलाओं की जगह का मुद्दा उठाया गया। नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी के साथ छात्रों ने टूटे हुए क्लैंप से काम करने वाला लैंप और पुरानी जाली से नेकलेस बनाया। दोनों को 3डी प्रिंटिंग से पूरा किया गया। छात्रों ने रेबेल टार्टन प्रोजेक्ट के तहत कपड़ों पर भी प्रयोग किए। मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के साथ छात्रों ने एआई की मदद से फैशन डिजाइन तैयार किए, पर्यावरण के नाम पर किए जाने वाले झूठे दावों पर व्यंग्य किया और सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा पर आधारित एक पोशाक बनाई। ब्रिटिश काउंसिल में प्रदर्शनी की जगह पर्ल एकेडमी के इंटीरियर डिजाइन छात्रों ने तैयार की। इसमें भारत और ब्रिटेन की डिजाइन परंपराओं से लिए गए पैटर्न, सामग्री और शैलियों का इस्तेमाल किया गया। इससे प्रदर्शनी को एक नया रूप मिला और यह दिखा कि डिजाइन दो संस्कृतियों को जोड़ सकता है।

यह साझेदारी दिखाती है कि डिजाइन की पढ़ाई अब दूसरे देशों और अलग-अलग विषयों को भी जोड़ रही है। इस तरीके से छात्र दूसरे देशों के साथियों के साथ लगातार काम कर सकते हैं और एक-दूसरे के विचारों व अनुभवों से सीख सकते हैं। इसके लिए उनका विदेश जाना जरूरी नहीं है। वे अपने रोज के कोर्स के दौरान ही दूसरे देश के छात्रों के साथ काम करने का अनुभव ले सकते हैं।

ब्रिटिश काउंसिल ने भारत और ब्रिटेन के छात्रों के सालभर के काम को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए अपने परिसर में इस प्रदर्शनी को जगह दी है। यहां दोनों देशों की शिक्षा, संस्कृति, कला और डिजाइन पर बातचीत के मौके भी मिलेंगे। ‘डिजाइन विदाउट बॉर्डर्स: क्रिएटिव फ्यूचर्स कलेक्टिव’ प्रदर्शनी नई दिल्ली के 17, केजी मार्ग स्थित ब्रिटिश काउंसिल परिसर में 31 अक्टूबर तक चलेगी। इस दौरान स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए पैनल चर्चा, मास्टरक्लास और कार्यशालाएं भी होंगी। इनमें उद्योग जगत के लोग, शिक्षक, सरकारी अधिकारी, राजनयिक और कला व डिजाइन क्षेत्र से जुड़े लोग हिस्सा लेंगे।

साझेदारी पर पर्ल एकेडमी की प्रेसिडेंट अदिति श्रीवास्तव ने कहा, “भारत और ब्रिटेन के बीच सदियों पुराना रिश्ता है, जिसने दोनों देशों की कला और डिजाइन को प्रभावित किया है। यह साझेदारी हमारे छात्रों को इस रिश्ते को आगे बढ़ाने का मौका देती है। वे अलग-अलग संस्कृतियों और समय क्षेत्रों में रहते हुए एक वैश्विक कक्षा में मिलकर काम कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करना डिजाइन शिक्षा का अहम हिस्सा बन सकता है। इससे छात्रों को सीखने, नई चीजें बनाने और दुनिया को अलग-अलग नजरियों से देखने के नए मौके मिलते हैं।”

ब्रिटिश काउंसिल की भारत में कंट्री डायरेक्टर एलिसन बैरेट एमबीई ने कहा, “ब्रिटिश काउंसिल और पर्ल एकेडमी जैसी साझेदारियां दिखाती हैं कि डिजाइन शिक्षा में भारत और ब्रिटेन का सहयोग कितना व्यापक और असरदार हो सकता है। नए तरीकों से दोनों देशों के छात्रों को जोड़ने पर वे अपने विचार साझा कर सकते हैं और एक-दूसरे की संस्कृति से सीख सकते हैं। इससे आगे भी ऐसे सहयोग का रास्ता खुल सकता है। हमें इन प्रोजेक्ट में तैयार किए गए काम को ब्रिटिश काउंसिल में दिखाने की खुशी है। हमें उम्मीद है कि इससे दोनों देशों के और संस्थान भी मिलकर कला और डिजाइन से जुड़े नए प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए प्रेरित होंगे।”
यह पहल दिखाती है कि दोनों संस्थान ऐसी शिक्षा को बढ़ावा देना चाहते हैं, जिसमें छात्र अलग-अलग संस्कृतियों, विषयों और देशों के लोगों से सीखें, नई चीजें बनाएं और मिलकर काम करें।

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