वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत की इस्पात आत्मनिर्भरता हेतु बड़े पैमाने पर खनन निवेश का आह्वान किया

नई दिल्ली, 8 अप्रैल, 2026: वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट साझा करते हुए भारत की इस्पात निर्माण महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने और संसाधन आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में लौह अयस्क उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। बड़े पैमाने पर निवेश और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खनन क्षमता की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने भारत की भू-वैज्ञानिक क्षमता को अनलॉक करने और देश की दीर्घकालिक औद्योगिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए सरल एवं उत्पादन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। पोस्ट में अग्रवाल ने उल्लेख किया कि भारत का 300 मिलियन टन इस्पात उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने के लिए लगभग 800 मिलियन टन लौह अयस्क की आवश्यकता होगी, जिसके लिए घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि जरूरी है। यह वृद्धि ऐसे बड़े और एकीकृत खनन खिलाड़ियों के समर्थन से संभव होगी, जो वैश्विक स्तर पर संचालन करने में सक्षम हों।
उन्होंने आगे कहा कि सरल और उत्पादन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाकर भारत प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) के विजन को साकार कर सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की भू-वैज्ञानिक संरचना और लौह अयस्क की गुणवत्ता दुनिया के प्रमुख खनन क्षेत्रों के समकक्ष है।
अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा:
हमारे प्रधानमंत्री जी का सपना है कि भारत 300 मिलियन टन स्टील का उत्पादन करे। इस विशाल लक्ष्य तक पहुँचने के लिए हमें 800 मिलियन टन Iron Ore की ज़रूरत होगी। लेकिन आज की जो स्थिति है, अगर हम इसी तरह चलते रहे तो हमें अपनी ज़रूरत का 75% हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ेगा।
अगर दुनिया भर में देखें तो सिर्फ 4 या 5 बड़ी कंपनियाँ हैं, जैसे Vale, BHP, Rio Tinto और Fortescue, जो पूरी दुनिया का 70% से 80% Iron Ore पैदा करती हैं। भारत के पास भी इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है कि हमारे यहाँ 3-4 ऐसी बड़ी कंपनियाँ हों, जिसमें हर एक 200 से 300 मिलियन टन का उत्पादन कर सकें। हाँ, इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहुत बड़ा खर्च होगा, मेरा अनुमान है कि इसमें $20 बिलियन से $25 बिलियन या उससे भी ज़्यादा का निवेश लगेगा।
लेकिन हम इसे सरल तरीके से करें, तो प्रधानमंत्री जी का आत्मनिर्भर भारत का सपना आसानी से पूरा हो सकता है। क्योंकि हमारी धरती के नीचे जो खनिज संपदा है, हमारी जो geology है, वो उन विदेशी कंपनियों के मुकाबले बराबर या उनसे बेहतर ही है।
आज पूरी दुनिया minerals और hydrocarbons के उत्पादन को आसान बना रही है क्योंकि यह आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है। आपने देखा होगा कि अमेरिकी सरकार ने भी तेल और गैस का उत्पादन बढ़ाने के लिए clearances को ‘self-certified’ कर दिया है।
ज़मीन के नीचे की संपदा को बाहर निकालने के लिए हमें प्रधानमंत्री जी जैसा ही एक बड़ा विज़न चाहिए। हमने पूरी दुनिया में देखा है कि इस सेक्टर के विकास से बड़े पैमाने पर रोज़गार पैदा होता है और जब उत्पादन बढ़ता है, तो ना सिर्फ वहां के लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठता है, उनके जीवन में समृद्धि और खुशहाली भी आती है।
