पुस्तक मेले का स्वरूप भले ही बदल गया है पर पुस्तको का महत्व बना हुआ है
लेखक समाज में परिवर्तन लाते हैं – एसएस अवस्थी
लेखक पत्रकार अमित कुमार को केन्द्रीय मंत्री ने किया बागीश्वरी सम्मान से सम्मानित नई दिल्ली (एसएनबी) केन्द्रीय राज्य सड़क एवं राष्ट्रीय राजमार्ग तथा कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के मंत्री हर्ष महल्होत्रा ने कहा कि पहले से अब पुस्तक मेले का स्वरूप काफी बदल गया है। आज मोबाइल और इंटरनेट के आने से किताबों के प्रति लोगों की रूचि भले ही कम हुई हो फिर भी किताबों का अपना महत्व है। उन्होंने यह बात आज भारत मंडपम में आयोजित दिल्ली पुस्तक मेले में फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स (एफआईपी), आथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया व इंडियन रिप्रोग्राफिक राइटर्स आर्गेनाइजेशन की ओर से साहित्यकारों को पहला वागीश्वारी सम्मान प्रदान करते हुए कही। इस मौके पर एफआईपी के अध्यक्ष नवीन गुप्ता, आथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के महासचिव डा. एसएस अवस्थी समेत इटपो के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस मौके पर हर्ष मल्होत्रा ने साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय सहारा के वरिष्ठ पत्रकार व लेखक अमित कुमार समेत कुल 17 साहित्यकारों/पत्रकारों को सम्मानित किया गया। अमित कुमार की अब तक चार पुस्तके डायमंड बुक से प्रकाशित हो चुकी है, जिनमे पत्रकारिता पर लिखी उनकी किताब “जनसंपर्क” को दिल्ली सरकार के हिन्दी अकादमी की ओर से “साहित्यकृति सम्मान” मिल चुका है। इसके अलावा क्रिकेटर महेन्द्र सिंह धोनी की बायोग्राफी “सफलतम कप्ताप महेन्द्र सिंह धोनी” समेत एक कविता संग्रह और देश के प्रधान मंत्रियों पर लिखी गई किताब “पीएम पावर” इसी साल प्रकाशित हुई है, जो वेस्ट दस पुस्तकों मे शामिल रही है। इसके अलावा अमित कुमार ने हिन्दी के पहले उपन्यास “परीक्षा गुरु” को सीरियल में रूपांतरण किया, जिसका निर्माण और प्रसारण दूरदर्शन ने किया है। अमित कुमार के अलावा सम्मान पाने वालों में साहित्यकार डॉ. दिविक रमेश, प्रो. हरीश अरोड़ा, सविता चड्ढा, डॉ. हरीसिंह पाल, डॉ. वीरेंद्र शेखर, प्रो. सुधीर प्रताप सिंह, बी एस बागला, राकेश पाण्डेय, अतुल प्रभाकर, सुश्री सुनीता पंत बंसल, महेंद्र शर्मा, डॉ. कमलेश भट्ट कमाल, पत्रकार संजीव गुप्ता, व सुरेंद्र पंडित, लेखक मानस रंजन पात्र तथा डॉ संदीप कुमार शर्मा को प्रदान किया गया। इस मौके पर डॉ अवस्थी ने कहा कि इन सभी रचनाकारों साहित्यिक, बौद्धिक,भाषाई और संस्कृतिक मूल्यों की समृद्धि में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए यह सम्मान (बागीश्वरी सम्मान) दिया जा रहा है, और यह सम्मान प्रति वर्ष प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लेखक समाज में परिवर्तन लाते हैं। अगर पुस्तके नहीं होंगी तो समाज प्रगति नहीं करेंगा, इसलिए आज लेखकों को नवीन गुप्ता ने कहा कि लेखकों को सम्मानित करने की यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी।
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